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ऋषभ पंत की टेस्ट जगह खतरे में: ध्रुव जुरेल और ईशान किशन बने कड़ी चुनौती

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ऋषभ पंत की टेस्ट जगह खतरे में: ध्रुव जुरेल और ईशान किशन बने कड़ी चुनौती

सारांश

ऋषभ पंत, जो कभी तीनों फॉर्मेट में अपरिहार्य थे, अब केवल टेस्ट में बचे हैं — और वहाँ भी ध्रुव जुरेल की धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी और ईशान किशन की बहुआयामी क्षमता ने उनकी राह संकरी कर दी है। पंत के 43.37 के औसत के बावजूद, चयन की लड़ाई अब पहले से कहीं ज़्यादा खुली है।

मुख्य बातें

ऋषभ पंत वर्तमान में वनडे और टी20 दोनों फॉर्मेट से बाहर हैं और केवल टेस्ट टीम में शामिल हैं।
ध्रुव जुरेल ने 10 टेस्ट में 478 रन ( औसत 34.14 ) बनाकर टेस्ट में पंत के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेश की है।
ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट और टी20 विश्व कप में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद वनडे टीम में वापसी की है।
पंत ने 50 टेस्ट में 3,557 रन , 8 शतक , औसत 43.37 — रिकॉर्ड मजबूत, लेकिन प्रतिस्पर्धा तीखी।
किशन और पंत दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, जो टीम संतुलन में किशन को अतिरिक्त प्रासंगिकता देता है।

विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत, जो कभी भारतीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट की रीढ़ माने जाते थे और उपकप्तान की भूमिका निभा चुके हैं, अब केवल टेस्ट टीम तक सीमित रह गए हैं। वनडे और टी20 से पहले ही बाहर किए जा चुके पंत के लिए अब टेस्ट फॉर्मेट में भी स्थान बनाए रखना आसान नहीं रहा, क्योंकि ध्रुव जुरेल और ईशान किशन ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं के सामने गंभीर विकल्प पेश कर दिए हैं।

जुरेल का उभरता दावा

पंत की अनुपस्थिति में ध्रुव जुरेल ने टेस्ट क्रिकेट में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। देश और विदेश दोनों में उन्होंने भारतीय पारी को संकट के क्षणों में संभाला है और मध्यक्रम को स्थिरता दी है। 10 टेस्ट की 16 पारियों में जुरेल ने 1 शतक और 1 अर्धशतक की सहायता से 478 रन बनाए हैं और उनका औसत 34.14 रहा है।

पंत और जुरेल की बल्लेबाजी शैली में स्पष्ट अंतर है। पंत आक्रामक स्वभाव के हैं और क्रीज पर त्वरित निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं — इसी अंदाज ने उन्हें टेस्ट में कई यादगार जीत दिलाई हैं। दूसरी ओर, जुरेल शांत और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी के साथ टेस्ट की परंपरागत माँग को पूरा करते हैं, जो लंबे प्रारूप के लिए उतना ही मूल्यवान गुण है।

ईशान किशन की बहुआयामी चुनौती

यदि जुरेल टेस्ट में पंत के लिए सबसे तात्कालिक चुनौती हैं, तो ईशान किशन समग्र रूप से भारत के सभी विकेटकीपरों के लिए सबसे व्यापक दावेदार बनकर उभरे हैं। किशन ने घरेलू क्रिकेट में तीनों फॉर्मेट में प्रभावशाली प्रदर्शन कर राष्ट्रीय टीम में वापसी की है। टी20 विश्व कप में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा और अब वनडे टीम में भी उनकी वापसी हो चुकी है।

पंत की तरह किशन भी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, जो उन्हें टीम संतुलन की दृष्टि से प्रासंगिक बनाता है। किशन की विशेषता यह है कि वह परिस्थिति के अनुसार शीर्ष क्रम और मध्यक्रम दोनों में सहजता से बल्लेबाजी कर सकते हैं। 2 टेस्ट की 3 पारियों में उन्होंने 1 अर्धशतक समेत 78 रन बनाए हैं — आँकड़े सीमित हैं, लेकिन अनुभव और क्षमता का दायरा व्यापक है।

पंत का टेस्ट रिकॉर्ड और दबाव

ऋषभ पंत के टेस्ट आँकड़े अभी भी प्रभावशाली हैं। उन्होंने 50 टेस्ट की 87 पारियों में 8 शतक और 19 अर्धशतक की सहायता से 3,557 रन बनाए हैं और उनका औसत 43.37 है। यह आँकड़े उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट विकेटकीपर बल्लेबाजों में रखते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट में विकेटकीपिंग की भूमिका को लेकर चयन नीति लगातार बदलती रही है। गौरतलब है कि पंत वनडे और टी20 से बाहर होने के बाद अब केवल टेस्ट के भरोसे हैं, ऐसे में उनका अगला प्रदर्शन उनके करियर की दिशा तय करने में निर्णायक होगा।

आगे क्या होगा

यदि आने वाली टेस्ट सीरीज में पंत का प्रदर्शन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा, तो जुरेल और किशन दोनों के नाम पर चयनकर्ताओं का ध्यान केंद्रित होना स्वाभाविक होगा। किशन का लंबा अंतरराष्ट्रीय अनुभव और तीनों फॉर्मेट में उपयोगिता उन्हें दीर्घकालिक विकल्प के रूप में मजबूत बनाती है। भारतीय विकेटकीपिंग की यह प्रतिस्पर्धा निकट भविष्य में और तीखी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारतीय क्रिकेट की मौजूदा नीति 'फॉर्म बनाम नाम' की बहस में तेज़ी से फॉर्म की तरफ झुकती दिख रही है। विडंबना यह है कि जुरेल को पंत की ही अनुपस्थिति ने पनपने का मौका दिया, और अब वही जुरेल पंत की वापसी को जटिल बना रहे हैं। किशन की बहुआयामी उपयोगिता उन्हें प्रबंधन के लिए 'एक पत्थर, तीन निशाने' का विकल्प बनाती है। असली सवाल यह है कि क्या चयन समिति अनुभव को प्राथमिकता देगी या उस खिलाड़ी को जो अभी सबसे अधिक रन बना रहा है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋषभ पंत को टेस्ट टीम से क्यों खतरा है?
पंत वनडे और टी20 से पहले ही बाहर हो चुके हैं और अब टेस्ट में ध्रुव जुरेल तथा ईशान किशन के बेहतरीन प्रदर्शन ने उनकी जगह को चुनौती दी है। जुरेल ने पंत की अनुपस्थिति में देश-विदेश में भारतीय पारी संभाली है, जबकि किशन तीनों फॉर्मेट में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं।
ध्रुव जुरेल का टेस्ट रिकॉर्ड कैसा है?
ध्रुव जुरेल ने 10 टेस्ट की 16 पारियों में 1 शतक और 1 अर्धशतक की मदद से 478 रन बनाए हैं और उनका औसत 34.14 है। उनकी शांत और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी शैली टेस्ट क्रिकेट की माँग के अनुकूल मानी जाती है।
ईशान किशन का टेस्ट में क्या अनुभव है?
ईशान किशन ने अब तक 2 टेस्ट की 3 पारियों में 1 अर्धशतक के साथ 78 रन बनाए हैं। हालाँकि टेस्ट आँकड़े सीमित हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट और टी20 विश्व कप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में वापसी दिलाई है और वनडे टीम में भी उनकी जगह पक्की हुई है।
ऋषभ पंत का टेस्ट करियर रिकॉर्ड क्या है?
ऋषभ पंत ने 50 टेस्ट की 87 पारियों में 8 शतक और 19 अर्धशतक लगाते हुए 3,557 रन बनाए हैं और उनका औसत 43.37 है। यह आँकड़े उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट विकेटकीपर बल्लेबाजों में शुमार करते हैं।
पंत और जुरेल की बल्लेबाजी शैली में क्या फर्क है?
पंत आक्रामक शैली के बल्लेबाज हैं जो त्वरित निर्णयों से मैच पलटने की क्षमता रखते हैं, जबकि जुरेल शांत और धैर्यशील बल्लेबाजी के साथ टेस्ट की परंपरागत जरूरतों को पूरा करते हैं। दोनों शैलियाँ टेस्ट क्रिकेट में मूल्यवान हैं, लेकिन चयनकर्ताओं के लिए यही विकल्प की जटिलता बढ़ाता है।
राष्ट्र प्रेस
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