26 अगस्त 2026
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भारत-कनाडा संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं — 'दुनिया के सबसे स्वाभाविक साझेदार'

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भारत-कनाडा संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं — 'दुनिया के सबसे स्वाभाविक साझेदार'

सारांश

वित्त मंत्री सीतारमण की टोरंटो यात्रा महज़ एक कूटनीतिक दौरा नहीं — यह उस रिश्ते की बहाली का प्रतीक है जो कभी गहरे तनाव में था। 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर के व्यापार लक्ष्य और यूरेनियम करार के साथ, भारत-कनाडा संबंध एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहे हैं।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 26 अगस्त 2026 को टोरंटो में चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुँचीं।
सीतारमण ने भारत और कनाडा को 'दुनिया के सबसे स्वाभाविक साझेदार' बताया।
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक दोगुने से अधिक करने का संयुक्त संकल्प।
कैमेको के साथ 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम समझौता और सीईपीओ वार्ता औपचारिक रूप से शुरू।
जून 2025 में जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी-कार्नी बैठक में 'भविष्य पर केंद्रित रणनीतिक साझेदारी' पर सहमति बनी।
'वसुधैव कुटुंबकम' को नई रणनीतिक साझेदारी का मूल आधार घोषित किया गया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 अगस्त 2026 को टोरंटो में भारतीय मूल के कारोबारी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा दुनिया के सबसे स्वाभाविक साझेदार हैं और हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में जबरदस्त परिवर्तन आया है। सीतारमण कनाडा की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर टोरंटो पहुँची हैं, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को नई ऊँचाई देना है।

मुख्य घटनाक्रम

वित्त मंत्री ने टोरंटो में आयोजित कार्यक्रम में कहा, "हाल के समय में भारत और कनाडा के आपसी रिश्तों में जबरदस्त बदलाव आया है। इसकी वजह लोकतंत्र और अनेकता जैसे हमारे साझा मूल्य, बढ़ता आर्थिक सहयोग, उच्च-स्तरीय मुलाकातों की अभूतपूर्व रफ्तार और हमारे लोगों के बीच आपसी मजबूत संबंध हैं।" उन्होंने कनाडा में बसे भारतीय व्यापारिक समुदाय को दो जीवंत लोकतंत्रों के बीच एक 'रणनीतिक पुल' बताया।

द्विपक्षीय संबंधों की नई नींव

सीतारमण ने जून 2025 में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई मुलाकात का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस बैठक में दोनों नेताओं ने 'भविष्य पर केंद्रित रणनीतिक साझेदारी' को नए सिरे से स्थापित करने पर सहमति जताई थी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे थे।

उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान कई अहम समझौते हुए — जिनमें सीईपीओ वार्ता की औपचारिक शुरुआत, कैमेको के साथ 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम करार, और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक दोगुने से अधिक करने का संयुक्त संकल्प शामिल है। 'वसुधैव कुटुंबकम' को नई रणनीतिक साझेदारी के मूल आधार के रूप में स्वीकार किया गया।

साझा मूल्य और सांस्कृतिक बंधन

वित्त मंत्री ने दोनों देशों के बीच गहरे वैचारिक और सांस्कृतिक समानताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "हम दोनों जीवंत लोकतंत्र हैं जो कानून के शासन को मानते हैं। हम कॉमनवेल्थ परंपराओं, एक जैसे संसदीय मॉडल और एक ही आधिकारिक भाषा को साझा करते हैं।" उन्होंने जोड़ा कि कनाडा और भारत आज की दुनिया के दो महान बहु-सांस्कृतिक समाज हैं, और यह साझा विविधता किसी भी व्यापार समझौते से कहीं गहरा बंधन है।

आम जनता और व्यापार जगत पर असर

गौरतलब है कि कनाडा में करीब 18 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहाँ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य दोनों देशों के निर्यातकों, निवेशकों और प्रवासी समुदाय के लिए नए अवसर खोल सकता है। सीईपीओ वार्ता यदि सफल रही, तो यह भारत के लिए एक प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्था के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगी।

क्या होगा आगे

सीतारमण की इस चार दिवसीय यात्रा में वित्तीय संस्थाओं, पेंशन फंड प्रबंधकों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। दोनों देशों के बीच सीईपीओ वार्ता की प्रगति और यूरेनियम समझौते के क्रियान्वयन पर निकट भविष्य में ध्यान केंद्रित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

70 अरब कनाडाई डॉलर के व्यापार लक्ष्य और सीईपीओ वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देशों की घरेलू राजनीति इस गति को बनाए रखने देती है या नहीं — कनाडा में भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दे अभी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कनाडा यात्रा का उद्देश्य क्या है?
सीतारमण की यह चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा भारत और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए है। इस दौरान वे टोरंटो में भारतीय कारोबारी समुदाय, वित्तीय संस्थाओं और पेंशन फंड प्रबंधकों से मुलाकात कर रही हैं।
भारत और कनाडा के बीच 2030 तक व्यापार लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक दोगुने से अधिक करने का संयुक्त संकल्प लिया है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान तय किया गया था।
कैमेको यूरेनियम समझौता क्या है और इसका महत्व क्या है?
कनाडाई कंपनी कैमेको के साथ 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम समझौता प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान हुआ। यह भारत की परमाणु ऊर्जा ज़रूरतों के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
सीईपीओ वार्ता क्या है और इससे भारत को क्या फायदा होगा?
सीईपीओ (Comprehensive Economic Partnership Agreement) एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की वार्ता है, जो प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान औपचारिक रूप से शुरू हुई। यदि यह सफल रही, तो भारत को एक प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्था के साथ तरजीही व्यापार पहुँच मिलेगी, जिससे निर्यात और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
मोदी और मार्क कार्नी के बीच जी7 में क्या सहमति बनी थी?
जून 2025 में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 'भविष्य पर केंद्रित रणनीतिक साझेदारी' को नए सिरे से स्थापित करने पर सहमति जताई थी। इस बैठक को भारत-कनाडा संबंधों की बहाली का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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