14 सितंबर 2026
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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, बाबा महाकाल का गणेश स्वरूप में भव्य शृंगार

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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, बाबा महाकाल का गणेश स्वरूप में भव्य शृंगार

सारांश

भाद्रपद की तृतीया-चतुर्थी तिथि पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का भांग से गणेश स्वरूप में भव्य शृंगार हुआ। रुद्राक्ष-पुष्पमालाओं से सजे बाबा के दर्शन और भस्म आरती के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे।

मुख्य बातें

14 सितंबर 2026 , सोमवार को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग से गणेश स्वरूप में शृंगार किया गया; रुद्राक्ष माला और पुष्पमालाएँ अर्पित की गईं।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई।
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद व फलों का रस शामिल रहा।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 14 सितंबर 2026, सोमवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे, जिनमें से अनेक बीती रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट उद्घाटन और अभिषेक विधि

सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और फिर दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।

गणेश स्वरूप में दिव्य शृंगार

आज के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से गणेश स्वरूप में शृंगार किया गया। उन्हें रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएँ अर्पित की गईं। भाद्रपद की चतुर्थी तिथि का गणेश पर्व से विशेष संबंध होने के कारण इस स्वरूप का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। भव्य शृंगार के दर्शन पाते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा।

भस्म आरती की परंपरा और महानिर्वाणी अखाड़े की भूमिका

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर के पुजारी ने महाआरती कराई और पूरा परिसर घंटियों, शंखध्वनि व मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए वेशभूषा नियम

भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस परंपरा का पालन मंदिर प्रबंधन द्वारा कड़ाई से कराया जाता है। बाबा की इस दिव्य आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुँचते हैं।

भाद्रपद की इस विशेष तिथि पर संपन्न भस्म आरती और गणेश स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालुओं में अपार आस्था और उत्साह देखा गया। आने वाले दिनों में गणेश उत्सव के पर्व पर भी महाकालेश्वर मंदिर में इसी तरह की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का सबसे प्रभावशाली प्रतीक है। भाद्रपद में गणेश स्वरूप का शृंगार इस तिथि की विशिष्टता को रेखांकित करता है और यह दर्शाता है कि मंदिर प्रबंधन धार्मिक कैलेंडर के अनुसार परंपरा को जीवंत रखता है। हर बार बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु यह भी बताते हैं कि महाकाल की आस्था पर्यटन और तीर्थ — दोनों दृष्टियों से उज्जैन की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी स्तंभ है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
14 सितंबर 2026 को महाकाल का कौन-सा स्वरूप सजाया गया?
14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल तृतीया-चतुर्थी तिथि पर बाबा महाकाल का भांग से गणेश स्वरूप में शृंगार किया गया। उन्हें रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएँ भी अर्पित की गईं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए वेशभूषा नियम क्या हैं?
भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर प्रबंधन इस नियम का कड़ाई से पालन कराता है।
भस्म आरती की परंपरा किसके द्वारा निभाई जाती है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह परंपरा सदियों से अखंड रूप से चली आ रही है।
महाकाल भस्म आरती के दर्शन के लिए कब पहुँचना चाहिए?
भस्म आरती तड़के होती है और दर्शनार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध हो जाते हैं। समय से पूर्व पहुँचना और ऑनलाइन बुकिंग करना उचित माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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