18 जुलाई 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ चतुर्थी पर भव्य भस्म आरती, ओम-बेल पत्र-मुकुट से सजे बाबा महाकाल

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महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ चतुर्थी पर भव्य भस्म आरती, ओम-बेल पत्र-मुकुट से सजे बाबा महाकाल

सारांश

आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का ओम, बेल पत्र और मुकुट से भव्य शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती के दौरान 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। देश-विदेश से श्रद्धालु रात से ही कतार में खड़े रहे।

मुख्य बातें

18 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्थी पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को ओम, बेल पत्र और मुकुट से सुसज्जित कर पंचामृत अभिषेक किया गया।
कपाट खुलने से पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई और ढोल-नगाड़ों के साथ शृंगार-आरती की प्रक्रिया शुरू हुई।
भस्म आरती में अब कपिला गाय के गोबर व औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है, शमशान राख का नहीं।
आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर पुलिस तैनाती की गई।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 18 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्थी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। ओम, बेल पत्र और मुकुट से सुसज्जित भगवान महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़े और पूरा प्रांगण 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

शनिवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पवित्र हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतार में खड़े होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।

पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार

कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा महाकाल को ओम, बेल पत्र और मुकुट से सजाया गया और भव्य शृंगार कर उनकी महाआरती मंदिर के पुजारियों द्वारा संपन्न कराई गई।

भस्म आरती की परंपरा और विशेषता

गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती अपनी अनूठी परंपरा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। पूर्व में शमशान की राख से यह आरती संपन्न होती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और व्यवस्था

बाबा महाकाल की यह आरती देश-विदेश में अत्यंत प्रसिद्ध है और इसके दर्शन के लिए आम जनमानस के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और उसके आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि व्यवस्था सुचारु बनी रहे। आगामी सावन माह में भी ऐसे ही भव्य आयोजनों की उम्मीद श्रद्धालुओं को है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। शमशान राख से कपिला गोबर-आधारित भस्म की ओर हुआ बदलाव परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य-चेतना के बीच संतुलन का प्रयास है, जिसे अक्सर मुख्यधारा की कवरेज नजरअंदाज करती है। सावन माह की दहलीज पर यह आयोजन आने वाले हफ्तों में श्रद्धालुओं की संख्या और प्रशासनिक दबाव दोनों में तेज वृद्धि का संकेत देता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का सबसे पवित्र और अनूठा दैनिक अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। यह आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ तक उज्जैन पहुँचती हैं।
भस्म आरती में किस प्रकार की भस्म का उपयोग होता है?
पहले शमशान की राख से भस्म आरती संपन्न होती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा को आधुनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया गया।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनावा अनिवार्य है?
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह पारंपरिक पोशाक नियम मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
आषाढ़ चतुर्थी पर बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
18 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष चतुर्थी पर बाबा महाकाल को ओम, बेल पत्र और मुकुट से सुसज्जित किया गया। इससे पहले दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से जलाभिषेक और अभिषेक संपन्न हुआ।
महाकाल मंदिर के कपाट किस विधि से खोले जाते हैं?
प्रतिदिन तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ महाकालेश्वर मंदिर के कपाट विधिवत खोले जाते हैं। इसके बाद मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटियों के बीच अभिषेक व शृंगार की प्रक्रिया शुरू होती है।
राष्ट्र प्रेस
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