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महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ अधिकमास सप्तमी पर भव्य भस्म आरती, 'जय श्री महाकाल' से गूंजा उज्जैन

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महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ अधिकमास सप्तमी पर भव्य भस्म आरती, 'जय श्री महाकाल' से गूंजा उज्जैन

सारांश

ज्येष्ठ अधिकमास की सप्तमी तिथि पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा जलाभिषेक और पंचामृत स्नान के बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के जयकारों के बीच दर्शन कर पुण्यलाभ लिया।

मुख्य बातें

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 23 मई 2025 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक और पंचामृत स्नान कराया गया।
शनिवार के विशेष शृंगार में बाबा के मस्तक पर चंद्रमा , त्रिशूल और 'ऊं' की आकृतियाँ सजाई गईं।
सामान्य दिनों में दर्शन के लिए 30 से 45 मिनट की प्रतीक्षा; विशेष तिथियों पर भीड़ अधिक रहती है।
देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।

उज्जैन स्थित विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर मंदिर में 23 मई 2025 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस पावन अवसर पर आयोजित भस्म आरती के दौरान समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी आस्था को नई ऊर्जा दी।

परंपरागत विधि-विधान से खुले मंदिर के कपाट

सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट विधिवत खोले गए। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े के पुजारियों द्वारा बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से स्नान कराया गया। पंचामृत स्नान के पश्चात बाबा का अलौकिक एवं मनमोहक शृंगार किया गया।

शनिवार का विशेष शृंगार

शनिवार के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और 'ऊं' की आकृतियाँ सजाई गईं। यह शृंगार भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरागत रूप से बाबा को भस्म रमाई गई।

भस्म आरती का भव्य आयोजन

अभिषेक और शृंगार के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को विधिवत भस्म अर्पित की गई और आरती उतारी गई। मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु

ज्येष्ठ अधिकमास की सप्तमी तिथि के धार्मिक महत्व को देखते हुए इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी गईं। सामान्य दिनों में दर्शन के लिए सामान्य कतार में लगभग 30 से 45 मिनट का समय लगता है, जबकि त्योहारों और विशेष तिथियों पर प्रतीक्षा अधिक हो सकती है। भक्त प्रतीक्षा के दौरान भी महाकाल की भक्ति में लीन दिखे।

आस्था और भक्ति का अनूठा संगम

यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ अधिकमास को हिंदू पंचांग में विशेष पुण्यकाल माना जाता है और इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती विश्व की उन विरल आरतियों में से है जो भोर में तड़के होती है। आने वाले दिनों में अधिकमास के शेष पर्वों पर भी इसी प्रकार भव्य आयोजन अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ज्येष्ठ अधिकमास जैसे दुर्लभ पंचांग-संयोगों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ यह दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन लगातार विस्तार पा रहा है। हालाँकि, इस बढ़ती भीड़ के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा-व्यवस्था पर मंदिर प्रशासन की तैयारी का आकलन भी उतना ही ज़रूरी है जितना आस्था का उत्सव मनाना।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है और यह क्यों खास है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। यह विश्व की उन विरल आरतियों में से है जो भोर में की जाती है और मान्यता है कि इस दौरान महाकाल भक्तों को साकार रूप में दर्शन देते हैं।
ज्येष्ठ अधिकमास सप्तमी का धार्मिक महत्व क्या है?
ज्येष्ठ अधिकमास हिंदू पंचांग में एक दुर्लभ अतिरिक्त मास है जो कुछ वर्षों के अंतराल पर आता है और इसे विशेष पुण्यकाल माना जाता है। इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठानों, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है, इसीलिए इस अवसर पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से अधिक रहती है।
महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कितना समय लगता है?
सामान्य दिनों में सामान्य कतार में दर्शन के लिए लगभग 30 से 45 मिनट का समय लगता है। त्योहारों, विशेष तिथियों और छुट्टियों के दौरान भीड़ अधिक होने से प्रतीक्षा समय बढ़ सकता है।
भस्म आरती में महानिर्वाणी अखाड़े की क्या भूमिका है?
महानिर्वाणी अखाड़ा महाकालेश्वर मंदिर की पूजा-अर्चना की परंपरागत जिम्मेदारी निभाता है। प्रतिदिन भस्म आरती से पूर्व इसी अखाड़े के पुजारी बाबा का जलाभिषेक, पंचामृत स्नान और भस्म अर्पण करते हैं।
शनिवार को महाकाल का विशेष शृंगार क्यों किया जाता है?
शनिवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन बाबा महाकाल का शृंगार अधिक विस्तृत और विशेष होता है। इस दिन मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और 'ऊं' की आकृतियाँ सजाई जाती हैं जो भगवान शिव के प्रतीक चिह्न हैं।
राष्ट्र प्रेस
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