महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ अधिकमास सप्तमी पर भव्य भस्म आरती, 'जय श्री महाकाल' से गूंजा उज्जैन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर मंदिर में 23 मई 2025 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तड़के ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस पावन अवसर पर आयोजित भस्म आरती के दौरान समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी आस्था को नई ऊर्जा दी।
परंपरागत विधि-विधान से खुले मंदिर के कपाट
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट विधिवत खोले गए। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े के पुजारियों द्वारा बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से स्नान कराया गया। पंचामृत स्नान के पश्चात बाबा का अलौकिक एवं मनमोहक शृंगार किया गया।
शनिवार का विशेष शृंगार
शनिवार के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और 'ऊं' की आकृतियाँ सजाई गईं। यह शृंगार भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरागत रूप से बाबा को भस्म रमाई गई।
भस्म आरती का भव्य आयोजन
अभिषेक और शृंगार के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को विधिवत भस्म अर्पित की गई और आरती उतारी गई। मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु
ज्येष्ठ अधिकमास की सप्तमी तिथि के धार्मिक महत्व को देखते हुए इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी गईं। सामान्य दिनों में दर्शन के लिए सामान्य कतार में लगभग 30 से 45 मिनट का समय लगता है, जबकि त्योहारों और विशेष तिथियों पर प्रतीक्षा अधिक हो सकती है। भक्त प्रतीक्षा के दौरान भी महाकाल की भक्ति में लीन दिखे।
आस्था और भक्ति का अनूठा संगम
यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ अधिकमास को हिंदू पंचांग में विशेष पुण्यकाल माना जाता है और इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती विश्व की उन विरल आरतियों में से है जो भोर में तड़के होती है। आने वाले दिनों में अधिकमास के शेष पर्वों पर भी इसी प्रकार भव्य आयोजन अपेक्षित हैं।