महाकालेश्वर उज्जैन: ज्येष्ठ अधिकमास पर भस्म आरती में उमड़ा जनसैलाब, त्रिपुंड-चन्द्रमा-त्रिनेत्र से सजे बाबा
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 7 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर तड़के आयोजित भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भांग से निर्मित त्रिपुंड, मस्तक पर चन्द्रमा और दिव्य त्रिनेत्र से किया गया, जिसने उपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंजता रहा और समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया।
ब्रह्म मुहूर्त में जागरण और विशेष श्रृंगार
रविवार की भोर में परंपरा के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल को जगाया गया। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन सम्पन्न किया। इसके बाद बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया — भांग से तैयार त्रिपुंड, मस्तक पर चन्द्रमा और दिव्य त्रिनेत्र के साथ यह स्वरूप इस बार विशेष रूप से आकर्षक रहा। श्रृंगार पूर्ण होते ही श्रद्धालुओं में भाव-विभोर होने की लहर दौड़ गई।
भस्म आरती: आस्था और परंपरा का संगम
श्रृंगार के उपरांत भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से दर्शन किए और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। मान्यता है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन मात्र से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं।
मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाएँ
भस्म आरती में शामिल होने के लिए भक्त देर रात से ही कतारों में लग गए थे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए थे। दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। गौरतलब है कि ज्येष्ठ अधिकमास के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है।
भक्तों की आस्था और जयघोष
जैसे ही बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार पूर्ण हुआ, श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। कई भक्त महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए तो कई आँखें भर आईं। मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ अधिकमास के चलते देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजन-अनुष्ठान आयोजित हो रहे हैं।
ज्येष्ठ अधिकमास का धार्मिक महत्त्व
ज्येष्ठ अधिकमास हिंदू पंचांग में विशेष महत्त्व रखता है — इसे 'मलमास' या 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है और इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना माना जाता है। महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और उज्जैन में उनकी भस्म आरती देश की सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक परंपराओं में से एक है। रविवार की यह भस्म आरती एक बार फिर श्रद्धा, परंपरा और सनातन आस्था का अनुपम उदाहरण बन गई।