महाकाल का दिव्य शृंगार: त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला और भांग से सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। देर रात से ही हज़ारों श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे, और भोर होते-होते पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।
कपाट खुलने का क्रम
रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर घंटियों की टनटनाहट, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से भर गया। श्रद्धालुओं ने जैसे ही बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन पाए, भक्तिभाव से पूरा प्रांगण एकाकार हो उठा।
दिव्य शृंगार और अभिषेक
कपाट खुलने के तुरंत बाद मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और राम नाम अंकित बेलपत्र अर्पित किए गए। चंद्रमा और मुंड माला से सुसज्जित बाबा के इस दिव्य शृंगार ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
भस्म आरती की विशेषता
मंदिर के पुजारियों ने महाआरती संपन्न कराई। जानकारी के अनुसार, परंपरागत रूप से महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा आस्था और अनुशासन का अनूठा संगम है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस अनुपम दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। शनिवार की देर रात से ही भक्त कतारों में खड़े थे और भोर की आरती में बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
आगे का दृष्टिकोण
श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती भारतीय धार्मिक परंपरा का एक अद्वितीय अनुष्ठान है, जो सदियों से अनवरत जारी है। यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अग्रणी स्थान दिलाता है।