10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकाल का दिव्य शृंगार: त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला और भांग से सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकाल का दिव्य शृंगार: त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला और भांग से सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी पर भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला और भांग से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए हज़ारों श्रद्धालु रात से ही कतारों में खड़े रहे। कपिला गाय के गोबर और जड़ी-बूटियों से बनी भस्म से सजे इस दिव्य अनुष्ठान ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला, भांग, चंदन और बेलपत्र से दिव्य शृंगार किया गया।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक के बाद महाआरती संपन्न की गई।
भस्म आरती में अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है, न कि श्मशान की राख का।
आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
हज़ारों श्रद्धालु शनिवार देर रात से ही दर्शन के लिए कतार में खड़े रहे; सुरक्षा हेतु बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मी तैनात रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। देर रात से ही हज़ारों श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे, और भोर होते-होते पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।

कपाट खुलने का क्रम

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर घंटियों की टनटनाहट, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से भर गया। श्रद्धालुओं ने जैसे ही बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन पाए, भक्तिभाव से पूरा प्रांगण एकाकार हो उठा।

दिव्य शृंगार और अभिषेक

कपाट खुलने के तुरंत बाद मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और राम नाम अंकित बेलपत्र अर्पित किए गए। चंद्रमा और मुंड माला से सुसज्जित बाबा के इस दिव्य शृंगार ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

भस्म आरती की विशेषता

मंदिर के पुजारियों ने महाआरती संपन्न कराई। जानकारी के अनुसार, परंपरागत रूप से महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा आस्था और अनुशासन का अनूठा संगम है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस अनुपम दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। शनिवार की देर रात से ही भक्त कतारों में खड़े थे और भोर की आरती में बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

आगे का दृष्टिकोण

श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती भारतीय धार्मिक परंपरा का एक अद्वितीय अनुष्ठान है, जो सदियों से अनवरत जारी है। यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अग्रणी स्थान दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की पहचान और मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन की रीढ़ है। श्मशान राख से कपिला गाय के गोबर और जड़ी-बूटियों से बनी भस्म की ओर हुआ यह बदलाव परंपरा और स्वच्छता के बीच संतुलन का प्रयास दर्शाता है — हालाँकि कुछ परंपरावादी इसे मूल स्वरूप से विचलन मानते हैं। बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था यह भी संकेत देती है कि इस आयोजन का प्रबंधन अब केवल आस्था का नहीं, बल्कि प्रशासन की भी परीक्षा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती क्या है और यह कब होती है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का भस्म से शृंगार किया जाता है। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की अनूठी परंपरा है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारी के अनुसार, पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का प्रयोग किया जाता है। यह बदलाव स्वच्छता और परंपरा के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की धार्मिक गरिमा और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू है।
21 जून को बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी को बाबा महाकाल को त्रिपुंड, चंद्रमा, मुंड माला, भांग, चंदन और राम नाम अंकित बेलपत्र से सजाया गया। इसके अलावा पंचामृत — दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस — से अभिषेक भी किया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन कैसे करें?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण कराना होता है। भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालु प्रायः रात से ही कतार में खड़े होते हैं; मंदिर प्रशासन और पुलिस द्वारा व्यवस्था बनाए रखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले