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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ षष्ठी पर भस्म आरती, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन

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उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ षष्ठी पर भस्म आरती, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन

सारांश

आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के सोमवार को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। पंचामृत अभिषेक, रजत शृंगार और भस्म अर्पण के बाद 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूँज उठा। सावन से पहले यह आरती श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बनी।

मुख्य बातें

20 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल षष्ठी (सोमवार) पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक और रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, पुष्पमाला से भव्य शृंगार किया गया।
अब भस्म आरती में श्मशान की राख के स्थान पर कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 20 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। सोमवार की इस अलौकिक आरती के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े, जो बीती रात से ही कतारों में खड़े थे।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। ज्योंही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

भव्य शृंगार और अभिषेक

मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किए गए। शृंगार में रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएँ अर्पित की गईं, जिससे बाबा का स्वरूप अत्यंत भव्य हो उठा।

भस्म आरती की परंपरा

उल्लेखनीय है कि पूर्व में बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और व्यवस्था

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है। अपने आराध्य के दर्शन के लिए आम जनमानस के साथ-साथ विशिष्ट हस्तियाँ भी यहाँ पहुँचती हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे। आषाढ़ माह के सोमवार को महाकाल की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है, इसी कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या असामान्य रूप से अधिक रही।

महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन की धार्मिक पहचान का केंद्र है। आने वाले सावन माह में यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान का आधार है। आषाढ़ के सोमवार को श्रद्धालुओं की असामान्य भीड़ यह दर्शाती है कि सावन से पहले ही तीर्थाटन की लहर शुरू हो चुकी है। भस्म की परंपरा में श्मशान राख से कपिला गोबर-भस्म की ओर बदलाव एक सूक्ष्म किंतु महत्वपूर्ण संस्थागत निर्णय है, जो आस्था और स्वच्छता के बीच संतुलन साधने की कोशिश है — इस पहलू पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर महाआरती की जाती है। यह देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक परंपरा मानी जाती है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
पहले बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा और स्वच्छता के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से किया गया।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर प्रशासन द्वारा धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
20 जुलाई 2026 की भस्म आरती में बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
आषाढ़ शुक्ल षष्ठी को बाबा महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक किया गया। इसके बाद भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित कर रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पमालाओं से भव्य शृंगार किया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती देखने कब जाएँ?
भस्म आरती प्रतिदिन तड़के होती है और सोमवार तथा आषाढ़-सावन माह के विशेष दिनों पर श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक होती है। दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध है और भीड़ के कारण रात से ही कतार लगाना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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