2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भाद्रपद पंचमी पर महाकालेश्वर उज्जैन में भस्म आरती, बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भाद्रपद पंचमी पर महाकालेश्वर उज्जैन में भस्म आरती, बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

सारांश

भाद्रपद पंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का अलौकिक आयोजन हुआ। पंचामृत अभिषेक, चंदन-मेवों से शृंगार और महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण के बाद देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन किए।

मुख्य बातें

2 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का चांद, चंदन और सूखे मेवों से अलौकिक शृंगार किया गया।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण किया गया।
जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक के बाद कपूर आरती एवं मुकुट धारण कराया गया।
देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु 'जय श्री महाकाल' के जयघोष के साथ दर्शन के लिए उमड़े।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर बुधवार, 2 सितंबर को तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती भक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर बाबा का अलौकिक शृंगार किया गया और देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। बाबा के दर्शन होते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।

कपाट खुलने की परंपरा

परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के साथ पूजा-अर्चना आरंभ हुई। सर्वप्रथम भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, इसके उपरांत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

शृंगार और भस्म अर्पण

पूजा की विशेष परंपराओं के अंतर्गत प्रथम घंटाल बजाकर बाबा को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात कपूर आरती हुई और बाबा को मुकुट धारण कराया गया। शृंगार के दौरान उन्हें चांद, चंदन और सूखे मेवों से आकर्षक रूप में सजाया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। परंपरा के अनुसार यह भस्म महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की जाती है।

भस्म आरती का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही कारण है कि इस आरती के प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है। भस्म अर्पण के बाद झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती प्रारंभ हुई। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई और पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति

इस अलौकिक दर्शन के लिए उज्जैन की पावन नगरी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। आरती में शामिल भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। भाद्रपद माह में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रहती है। आगामी तिथियों पर भी विशेष पूजा-अर्चना और शृंगार के आयोजन अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का केंद्र भी है — भाद्रपद जैसे पवित्र माह में यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या स्थानीय पर्यटन और व्यापार को सीधे प्रभावित करती है। महाकाल लोक परियोजना के बाद से दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस मंदिर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और सुदृढ़ करती है। यह नियमित आयोजन भारत की जीवंत मंदिर-परंपरा और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला सबसे पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
भाद्रपद पंचमी पर महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
2 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पंचमी पर बाबा महाकाल को चांद, चंदन और सूखे मेवों से सजाया गया। इससे पहले जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, कपूर आरती और मुकुट धारण की परंपरागत विधि संपन्न की गई।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के लिए कैसे पहुँचें?
उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित है और रेल, सड़क एवं वायु मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है और श्रद्धालुओं को पहले से पंजीकरण कराने की सलाह दी जाती है।
महानिर्वाणी अखाड़े का भस्म आरती में क्या महत्व है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से ही बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। यह सदियों पुरानी परंपरा है जो इस आरती को अन्य मंदिरों की आरतियों से विशिष्ट बनाती है।
भाद्रपद माह में महाकाल दर्शन का विशेष महत्व क्यों है?
भाद्रपद माह हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं शृंगार के आयोजन होते हैं। इस माह में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रहती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले