भाद्रपद पंचमी पर महाकालेश्वर उज्जैन में भस्म आरती, बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर बुधवार, 2 सितंबर को तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती भक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर बाबा का अलौकिक शृंगार किया गया और देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। बाबा के दर्शन होते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।
कपाट खुलने की परंपरा
परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के साथ पूजा-अर्चना आरंभ हुई। सर्वप्रथम भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, इसके उपरांत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
शृंगार और भस्म अर्पण
पूजा की विशेष परंपराओं के अंतर्गत प्रथम घंटाल बजाकर बाबा को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात कपूर आरती हुई और बाबा को मुकुट धारण कराया गया। शृंगार के दौरान उन्हें चांद, चंदन और सूखे मेवों से आकर्षक रूप में सजाया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। परंपरा के अनुसार यह भस्म महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की जाती है।
भस्म आरती का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही कारण है कि इस आरती के प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है। भस्म अर्पण के बाद झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती प्रारंभ हुई। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई और पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
इस अलौकिक दर्शन के लिए उज्जैन की पावन नगरी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। आरती में शामिल भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। भाद्रपद माह में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रहती है। आगामी तिथियों पर भी विशेष पूजा-अर्चना और शृंगार के आयोजन अपेक्षित हैं।