जी20 बैठक में चीन ने व्यापार असंतुलन प्रस्तावों पर आम सहमति रोकी, 19 देश एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 2 सितंबर 2026 को ऐशविले, नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के बाद पुष्टि की कि चीन ने व्यापार असंतुलन और गैर-बाजार आर्थिक तौर-तरीकों को निशाना बनाने वाले प्रस्तावों पर आम सहमति बनने से रोक दिया। शेष 19 सदस्य देश — जिनमें भारत भी शामिल था — चेयरमैन के उस बयान के पक्ष में खड़े रहे, जिसमें अत्यधिक बाहरी सरप्लस वाले देशों से घरेलू खपत बढ़ाने और निर्यात-निर्भरता घटाने की माँग की गई थी।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
दो दिन की बैठक के समापन पर पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा, 'यह साफ है कि दुनिया में सबसे अधिक और टिकाऊ न रहने वाले करंट अकाउंट सरप्लस वाला देश, यानी पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, इस बात से असहमत था।' उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे लगता है कि 19 देशों को किसी बात पर सहमत करना वाकई बड़ी बात है।'
चेयरमैन के बयान में स्पष्ट किया गया कि अत्यधिक और लगातार असंतुलन बाजारों को बिगाड़ सकते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को कमजोर कर सकते हैं और दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। सदस्य देशों से कहा गया कि वे ऐसी गैर-बाजार नीतियाँ और तौर-तरीके समाप्त करें जो इस तरह के असंतुलन को बढ़ावा देते हैं।
चीन की आपत्तियाँ किन मुद्दों पर थीं
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने कम से कम चार प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई — एनर्जी ट्रेड और होर्मुज जलडमरूमध्य, वैश्विक आर्थिक असंतुलन, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की निगरानी, और सॉवरेन डेट रीस्ट्रक्चरिंग (सरकारी कर्ज का पुनर्गठन)। यह ऐसे समय में आया है जब चीन पर पश्चिमी देशों का सब्सिडी-समर्थित निर्यात को लेकर दबाव पहले से बढ़ा हुआ है।
बेसेंट ने कहा, 'हमारा मानना है कि पूरी दुनिया में गैर-बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं द्वारा सस्ते निर्यात की कभी न खत्म होने वाली बाढ़ लाना टिकाऊ नहीं है।' उनके अनुसार, बाकी सदस्यों के बीच बनी सहमति उन अर्थव्यवस्थाओं के बारे में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दर्शाती है जो सब्सिडी-समर्थित उत्पादन और निर्यात पर अत्यधिक निर्भर हैं।
भारत और अन्य सदस्यों की भूमिका
भारत उन 19 सदस्य देशों में शामिल रहा जिन्होंने चेयरमैन के बयान का समर्थन किया। गौरतलब है कि भारत ने 2023 में जी20 की अध्यक्षता की थी और यूक्रेन युद्ध को लेकर तीखे मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली में नेताओं का घोषणा-पत्र तैयार करवाने में सफलता पाई थी। इस बार भी भारत की स्थिति बहुपक्षीय सहमति के पक्ष में रही।
चेयरमैन के बयान में लगातार घाटे वाले देशों से घरेलू बचत को प्रोत्साहित करने और राजकोषीय समेकन (फिस्कल कंसोलिडेशन) की दिशा में काम करने को भी कहा गया।
IMF की भूमिका और आगे की राह
सदस्य देशों ने IMF से कहा कि वह वैश्विक असंतुलन के कारणों की जाँच को और मजबूत करे — इसमें आर्थिक नीतियों की कमियाँ और दूसरे देशों पर उनके दुष्प्रभाव शामिल हैं। सदस्यों ने यह भी माँग की कि अगर कोई कदम नहीं उठाया गया तो उसके संभावित नुकसान का अधिक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया जाए।
बेसेंट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या जी20 के अलग-अलग सदस्य देश इसके जवाब में टैरिफ या अन्य व्यापार सुरक्षात्मक नीतियाँ लागू करेंगे। उन्होंने कहा, 'आगे का रास्ता सभी देशों को खुद तय करना होगा, लेकिन हम देखते हैं कि इस मामले में काफी सहमति है।'
बैठक के अन्य एजेंडे
दो दिन की इस बैठक में निजी क्षेत्र की अगुवाई वाली आर्थिक वृद्धि, सरकारी कर्ज, वित्तीय साक्षरता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वित्तीय नियमन जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बेसेंट के अनुसार, जी20 फाइनेंस ट्रैक के इतिहास में यह पहला अवसर था जब व्यापार जगत के प्रमुख नेता वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के साथ एक मंच पर शामिल हुए। 2026 में अमेरिका जी20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसकी प्राथमिकताओं में आर्थिक विकास, वैश्विक असंतुलन, सरकारी कर्ज और वित्तीय नवाचार शामिल हैं।