जी20 वित्त मंत्रियों की एशविल बैठक: वैश्विक विकास, कर्ज और ईरान संकट पर होगा मंथन
सारांश
मुख्य बातें
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर 31 अगस्त से नॉर्थ कैरोलिना के एशविल स्थित ब्लू रिज पर्वतीय क्षेत्र में दो दिवसीय जी20 बैठक में जुट रहे हैं, जहाँ वैश्विक आर्थिक विकास, बढ़ते सरकारी कर्ज, व्यापार असंतुलन और ईरान संघर्ष के आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित चर्चा होगी। इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट कर रहे हैं, और यह दिसंबर में मियामी में प्रस्तावित जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले आर्थिक एजेंडा तय करने की दृष्टि से निर्णायक मानी जा रही है।
बैठक का एजेंडा और अमेरिकी प्राथमिकताएँ
अमेरिका अपनी जी20 अध्यक्षता में आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना चाहता है। बेसेंट ने रविवार को कहा, 'जैसे राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका की आर्थिक वृद्धि को फिर से गति देने और उसे अपनी सरकार की प्राथमिकता बनाने पर काम कर रहे हैं, वैसे ही हम भी इस वर्ष जी20 वित्तीय ट्रैक के मेजबान के रूप में आर्थिक विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'हम दुनिया भर के नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र के नेताओं को एक साथ लाने के लिए उत्साहित हैं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि मजबूत आर्थिक विकास न केवल संभव है, बल्कि जरूरी भी है।'
अमेरिका चाहता है कि बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, व्यापार और आर्थिक असंतुलनों को कम करने, सरकारी कर्ज की चुनौतियों का समाधान खोजने और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर ठोस चर्चा हो। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि देशों को सब्सिडी, अधिक उत्पादन और निर्यात-आधारित नीतियों की बजाय उत्पादकता, नवाचार और निवेश के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।
भारत की भागीदारी
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को पड़ोसी राज्य साउथ कैरोलाइना के ग्रीनविले-स्पार्टनबर्ग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचीं, जहाँ अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उनका स्वागत किया। भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण अगले दो दिनों तक जी20 बैठक और उससे जुड़ी चर्चाओं में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता भी जारी है।
ईरान संकट और ऊर्जा बाजार पर असर
यह बैठक ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाले व्यापार पर भी असर पड़ा है। कथित तौर पर अमेरिका जी20 देशों से ईरान के खिलाफ और कड़े आर्थिक कदमों का समर्थन करने की अपील कर सकता है। हालाँकि, प्रतिबंधों और तेहरान के साथ जारी व्यापारिक संबंधों को लेकर सदस्य देशों के अलग-अलग रुख किसी साझा सहमति तक पहुँचने में बाधा बन सकते हैं।
व्यापार असंतुलन और चीन का अप्रत्यक्ष संदर्भ
व्यापार इस बैठक का एक संवेदनशील मुद्दा रहने वाला है। हालाँकि अमेरिकी अधिकारियों ने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया है, लेकिन वॉशिंगटन पहले भी चीनी उद्योगों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और उसके वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जता चुका है। विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज के बोझ और निजी निवेश में आने वाली बाधाओं पर भी विचार-विमर्श होगा। कार्यक्रम के कुछ हिस्सों में उद्योग और तकनीकी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
प्रमुख भागीदार और आगे की राह
सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने कहा कि बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और चुनौतियों पर चर्चा होगी और सदस्य देश मिलकर 'विकास, स्थिरता और समृद्धि' को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखेंगे। बेसेंट, फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श, सीतारमण और अल-जदान के अलावा जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा और बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा भी इस बैठक में भाग ले रहे हैं।
जी20 के 19 सदस्य देशों, यूरोपीय संघ, अफ्रीकी संघ और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हैं। ईरान, टैरिफ और चीन से जुड़े मतभेदों के कारण अंतिम संयुक्त बयान सीमित रह सकता है या केवल अध्यक्षीय सारांश जारी हो सकता है। एशविल की इन चर्चाओं का सीधा असर दिसंबर में मियामी में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के आर्थिक एजेंडे पर पड़ेगा, जिसकी मेजबानी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।