क्या जी20 नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों पर सहमति बनाई?
सारांश
Key Takeaways
- आपदा प्रतिरोधकता पर सहमति
- ऊर्जा संक्रमण की आवश्यकता
- महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान
- विकासशील देशों के लिए निवेश का आह्वान
- सभी देशों की एकजुटता की आवश्यकता
जोहान्सबर्ग, 23 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। जी20 शिखर सम्मेलन में विश्व के प्रमुख नेताओं की एकत्रता हुई। इन नेताओं ने शनिवार को जी20 सम्मेलन में आपदा प्रतिरोधकता, ऋण स्थिरता, ऊर्जा संक्रमण, और आवश्यक खनिजों पर समझौता किया। सभी नेताओं ने जी20 दक्षिण अफ्रीका शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर सहमति भी दी।
यह घोषणा समिट की शुरुआत पर अपनाई गई। उल्लेखनीय है कि यह बैठक दो दिवसीय है और आज रविवार को इसका दूसरा दिन है। जी20 का आयोजन जोहान्सबर्ग में एकजुटता, समानता, और सततता के विषय पर हो रहा है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, घोषणापत्र में चेतावनी दी गई है कि निरंतर और तेजी से आ रही आपदाएं विकास को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण प्रतिक्रियात्मक प्रणाली पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।
जी20 में शामिल नेताओं ने कहा कि आपदाएं सतत विकास की दिशा में प्रगति में बाधा डालती हैं और यह देश की क्षमताओं पर और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की प्रतिक्रियात्मकता को भी प्रभावित करती हैं।
इन नेताओं ने लोगों पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, विशेषकर कमजोर छोटे द्वीपीय विकासशील देशों और सबसे कम विकसित देशों के लिए मजबूत आपदा प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक के दौरान ऊर्जा पहुंच और संक्रमण पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। घोषणापत्र में उन असमानताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 600 मिलियन से अधिक अफ्रीकियों के पास बिजली नहीं है।
सभी नेताओं ने 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय क्षमता को तीन गुना और ऊर्जा दक्षता में सुधार को दोगुना करने के प्रयासों का समर्थन किया। इसके साथ ही, विकासशील देशों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जुटाने और कम लागत वाली वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने "आपसी सहमति वाली शर्तों पर" स्वैच्छिक प्रौद्योगिकी स्थानांतरण के महत्व पर भी बल दिया।
जी20 ने महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक "महत्वपूर्ण खनिज ढांचा" का समर्थन किया। इसका उद्देश्य इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को टिकाऊ और मजबूत बनाना है, जो उद्योगों और विकास के लिए आवश्यक हैं।
नेताओं का कहना है कि खनिजों को केवल कच्चा माल नहीं रहना चाहिए। इनका उपयोग देश के विकास के लिए किया जाना चाहिए। यह घोषणा दर्शाती है कि वैश्विक समस्याओं का सामना करने के लिए सभी देशों को एकजुट होकर और समान तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है।