अराघची की चेतावनी: ईरान-अमेरिका युद्ध का बोझ अब अमेरिकी घरों तक, सैन्य जवाब का विकल्प खुला
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 17 मई को स्पष्ट किया कि अमेरिकी हमलों से तेहरान को नुकसान ज़रूर हुआ है, लेकिन इस संघर्ष की आर्थिक मार अब सीधे अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी पड़ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है, और रिपोर्टों के अनुसार वार्ता विफल होने की स्थिति में अराघची सैन्य संघर्ष फिर शुरू करने को तैयार हैं।
अराघची का अमेरिका को सीधा संदेश
अराघची ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'अमेरिकियों से कहा गया है कि उन्हें ईरान पर अपनी पसंद के युद्ध का बढ़ता खर्च उठाना होगा। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और स्टॉक मार्केट के बुलबुले को एक तरफ रख दें — असली दर्द तब शुरू होता है जब अमेरिका के कर्ज और मॉर्गेज रेट बढ़ने लगते हैं। ऑटो लोन की देनदारी पहले ही 30 से अधिक साल के सबसे ऊँचे स्तर पर है।' इसके साथ उन्होंने अमेरिकी वित्त बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड का चार्ट भी साझा किया। अराघची ने अनुमान जताया कि यह दबाव जल्द उधार लेने की बढ़ती लागत में तब्दील होगा, जिससे संभावित मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।
रूस की चेतावनी और युद्धविराम की अनिश्चितता
इस बीच रूस की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगले कुछ घंटों या दिनों में अमेरिका और इज़रायल ईरान पर फिर से हमले शुरू कर सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन स्थायी युद्धविराम की कोई ठोस रूपरेखा अभी तक सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, अराघची ने संकेत दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास नाकाम रहे तो ईरान सैन्य विकल्प से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान की घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर
युद्ध की मार ईरानी नागरिकों पर भी भारी पड़ रही है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, फारसी कैलेंडर के अप्रैल के अंतिम महीने में खाद्य कीमतें 115 फीसदी तक पहुँच गई हैं। खाना पकाने का तेल, चावल और चिकन की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना बढ़ चुकी है। हाल के हफ्तों में दवाइयाँ, इलेक्ट्रॉनिक्स, कारें और पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी नई ऊँचाई पर पहुँच गए हैं।
ईरानी रियाल की ऐतिहासिक गिरावट
शनिवार को तेहरान के खुले बाज़ार में ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1.8 मिलियन पर कारोबार कर रहा था — जो इस महीने की शुरुआत में दर्ज किए गए अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। यह ईरानी अर्थव्यवस्था पर संघर्ष के गहराते असर का स्पष्ट संकेत है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनल आंशिक रूप से खुले हैं, लेकिन ज़मीन पर तनाव बरकरार है। गौरतलब है कि रूस जैसे तीसरे पक्ष की चेतावनियाँ और ईरानी विदेश मंत्री का आक्रामक स्वर यह दर्शाता है कि निकट भविष्य में स्थिरता की संभावना सीमित है। अगले कुछ दिनों में वार्ता की दिशा तय करेगी कि संघर्ष नए मोड़ लेता है या थमता है।