जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक अटलांटा में 30-31 अक्टूबर को, मार्को रुबियो ने किया ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 19 मई को घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा, जो 30-31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा शहर में आयोजित होगी। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका दिसंबर में होने वाले जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों में भी जुटा है।
बैठक का उद्देश्य और एजेंडा
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस बैठक में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विदेश मंत्री शामिल होंगे। बातचीत का केंद्र वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, तथा 'खुले बाजारों' और 'मजबूत एवं भरोसेमंद सप्लाई चेन' को समर्थन देना होगा। इसका व्यापक उद्देश्य जी20 के मूल मिशन — वैश्विक स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना — को आगे ले जाना है।
अटलांटा को क्यों चुना गया
विदेश विभाग ने अटलांटा के चयन को उचित ठहराते हुए कहा कि यह शहर 'कूटनीति, व्यापार और वैश्विक जुड़ाव का एक प्रमुख केंद्र' है, जो इस तरह की उच्चस्तरीय चर्चाओं के लिए उपयुक्त स्थान है। गौरतलब है कि अटलांटा दक्षिण-पूर्वी अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक और कूटनीतिक हब माना जाता है।
दिसंबर में नेताओं का शिखर सम्मेलन
विदेश विभाग के मीडिया नोट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14-15 दिसंबर को फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह शिखर सम्मेलन अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के समारोहों के साथ भी जुड़ा होगा, जिससे इसका राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है।
भारत की भूमिका और हित
भारत, जो जी20 का एक प्रमुख सदस्य और अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, इन चर्चाओं पर करीबी नजर रखेगा। विशेष रूप से वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है। भारत लगातार बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, ग्लोबल साउथ की अधिक भागीदारी, और सेमीकंडक्टर तथा महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सुरक्षित सप्लाई चेन की वकालत करता रहा है।
जी20 का वैश्विक महत्व
जी20 में अमेरिका, भारत, चीन, रूस, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्राजील, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह समूह मिलकर विश्व की लगभग 85 प्रतिशत जीडीपी और करीब दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। हाल के वर्षों में इस मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त, नई तकनीकें और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे केंद्र में रहे हैं। विदेश विभाग ने अभी तक बैठक के विस्तृत एजेंडे, प्रतिनिधिमंडलों की सूची या द्विपक्षीय बैठकों का ब्यौरा जारी नहीं किया है।