पश्चिम बंगाल में इमामों-पुरोहितों का भत्ता बंद, BJP नेता श्रीनिवास बोले— प्रो-माइनॉरिटी राजनीति का अंत
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने इमामों और पुरोहितों को दिए जाने वाले सरकारी भत्तों को समाप्त करने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हैदराबाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता टीआर श्रीनिवास ने इस कदम को सकारात्मक बताते हुए पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए।
भत्ता समाप्ति का फैसला
कैबिनेट के इस निर्णय के तहत राज्य सरकार अब इमामों और पुरोहितों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता जारी नहीं रखेगी। BJP नेता टीआर श्रीनिवास ने कहा कि यह सीएम शुवेंदु अधिकारी द्वारा उठाया गया अत्यंत सकारात्मक कदम है। उन्होंने इसे राज्य में धर्मनिरपेक्ष शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
पूर्व सरकार पर आरोप
श्रीनिवास ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के बजट आवंटन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले अंतरिम बजट में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए केवल ₹155 करोड़ आवंटित किए गए थे, जबकि इमामों, मदरसों और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए ₹5,700 करोड़ आवंटित किए गए थे। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा पूर्ववर्ती सरकार की तथाकथित प्रो-माइनॉरिटी मंशा को उजागर करता है।
पार्क सर्कस पत्थरबाजी पर बयान
कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में हुई पत्थरबाजी की घटना के संदर्भ में सीएम शुवेंदु के बयान का समर्थन करते हुए श्रीनिवास ने कहा कि जिस प्रकार कश्मीर में पत्थरबाजी समाप्त हुई, उसी प्रकार पश्चिम बंगाल में भी यह बंद होगी। उन्होंने ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन को 'अराजक' बताते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कथित घुसपैठियों, अवैध रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों ने सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण किया, यहाँ तक कि हावड़ा स्टेशन का स्वरूप भी बदल गया था।
सड़कों पर नमाज का मुद्दा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सार्वजनिक सड़कों पर नमाज को लेकर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए श्रीनिवास ने कहा कि बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक सड़कों पर नमाज से यातायात बाधित होता है और अन्य धर्मों के लोगों को असुविधा होती है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से वक्फ भूमि का उपयोग करने का आग्रह किया।
राजनीतिक परिदृश्य
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से नई सरकार की नीतियाँ राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का केंद्र बन रही हैं। गौरतलब है कि धार्मिक भत्तों का मुद्दा वर्षों से विवादास्पद रहा है और इस फैसले पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ आने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।