पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज्जिनों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज्जिनों के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की।
- अब उन्हें 2000 रुपए का मानदेय मिलेगा।
- योजना में गरीब और आदिवासी पुजारियों को सहायता मिलती है।
- यह कदम चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
- सभी नए आवेदन स्वीकृत किए गए हैं।
कोलकाता, १५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को राज्य के पुजारियों और मुअज्जिनों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने यह बताया कि राज्य सरकार ने उनके मासिक मानदेय में ५०० रुपए की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। अब उन्हें हर महीने २,००० रुपए का मानदेय प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने इस सूचना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से साझा किया। सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी ने लिखा, "यह घोषणा करते हुए मुझे खुशी हो रही है कि हमारे पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में ५०० रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। इस संशोधन के साथ, उन्हें अब हर महीने २,००० रुपए मिलेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "साथ ही, पुरोहितों और मुअज्जिनों द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी नए आवेदन भी राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किए गए हैं। हमें गर्व है कि हम एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ हर समुदाय और परंपरा को मान्यता और समर्थन मिलता है। हमारा प्रयास है कि हमारी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संरक्षकों को वह पहचान और सहयोग मिले, जिसके वे हकदार हैं।"
वास्तव में, पश्चिम बंगाल सरकार पुजारियों और इमाम/मुअज्जिनों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर धार्मिक कार्यकर्ताओं को मासिक सहायता और आवास संबंधी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
पुजारियों के लिए राज्य सरकार ने सितंबर २०२० में सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के माध्यम से एक योजना शुरू की थी, जिसे 'राज्य पुरोहित कल्याण प्रकल्प' कहा जाता है। इस योजना के तहत गरीब ब्राह्मण पुजारियों के साथ-साथ आदिवासी पुजारियों और अन्य समुदायों के धार्मिक कर्मियों को भी सहायता दी जाती है। इसमें ईसाई, जैन और बौद्ध समुदाय के पुजारी भी शामिल हैं।
इस योजना के अंतर्गत शुरू में पुजारियों को हर महीने १,००० रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। बाद में, २०२३ में इसमें ५०० रुपए की बढ़ोतरी की गई और मानदेय १,५०० रुपए प्रति माह कर दिया गया। अब एक बार फिर ५०० रुपए की बढ़ोतरी के बाद यह राशि बढ़ाकर २,००० रुपए प्रति माह कर दी गई है।