PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'धरती माता पूरी मानवता को एक परिवार मानती हैं'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'धरती माता पूरी मानवता को एक परिवार मानती हैं'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 19 मई को एक्स पर अथर्ववेद का श्लोक साझा कर संदेश दिया कि धरती माता हर भाषा, हर धर्म के लोगों को एक परिवार की तरह पालती हैं। यह पोस्ट उनकी लगातार चल रही संस्कृत सुभाषित श्रृंखला का हिस्सा है, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल मंच पर जीवंत कर रही है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2026 को एक्स पर अथर्ववेद का श्लोक साझा किया, जिसमें धरती माता की सर्वसमावेशी भावना का वर्णन है।
श्लोक का अर्थ: धरती माता विभिन्न भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक घर के सदस्यों की तरह संरक्षित करती हैं और समृद्धि की हज़ारों धाराएँ बहाती हैं।
18 मई को भी पीएम ने 'जल की एक-एक बूंद से घड़ा भरने' वाला श्लोक साझा किया था — जो निरंतर प्रयास का संदेश देता है।
15 मई के सुभाषित में उन्होंने देशवासियों के सामर्थ्य और बुद्धिमान कर्म की प्रशंसा की थी।
यह श्रृंखला भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के प्रयास का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 19 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए धरती माता की सर्वसमावेशी भावना को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि धरती माता पूरी मानवता को एक परिवार मानती हैं और यह संपूर्ण संसार उनके लिए एक घर की भाँति है, जहाँ हर संस्कृति का अपना महत्व और सम्मान है।

साझा किया गया श्लोक और उसका अर्थ

पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में अथर्ववेद से लिया गया श्लोक उद्धृत किया — 'जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम्। सहस्रं धारा द्रविणस्य मे दुहां ध्रुवेव धेनुरनपस्फुरन्ती॥' इस श्लोक का भाव है कि विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले और अलग-अलग धर्मों एवं परंपराओं को मानने वाले लोगों को यह धरती माता एक ही घर के सदस्यों की तरह संरक्षित करती है। साथ ही, यह पृथ्वी समृद्धि की हज़ारों धाराएँ उसी प्रकार बहाती है, जैसे कोई शांत और स्नेहमयी गाय अपना दूध देती है।

सुभाषितों की श्रृंखला का हिस्सा

गौरतलब है कि यह पोस्ट अकेली नहीं है — प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से लगातार संस्कृत सुभाषित साझा कर रहे हैं। सोमवार, 18 मई को उन्होंने श्लोक — 'जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। सः हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥' — साझा किया था, जिसका अर्थ है कि जिस प्रकार जल की एक-एक बूंद से घड़ा भर जाता है, उसी प्रकार निरंतर छोटे-छोटे प्रयासों से विद्या, धर्म और धन का संचय होता है।

इससे पूर्व 15 मई को पीएम ने श्लोक — 'यथाशक्ति चिकीर्षन्ति यथाशक्ति च कुर्वते। न किञ्चिदवमन्यन्ते नराः पण्डितबुद्धयः॥' — पोस्ट किया था। उन्होंने इसके साथ लिखा था कि देशवासियों के इन्हीं गुणों से भारत आज अपने सामर्थ्य को निरंतर बढ़ा रहा है। इस श्लोक का अर्थ है कि बुद्धिमान व्यक्ति अपनी शक्ति और विवेक पर पूर्ण विश्वास रखते हुए कार्य करते हैं, किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते और न ही किसी को हीन दृष्टि से देखते हैं।

सांस्कृतिक और राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंच पर 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रख रहा है। प्रधानमंत्री का संस्कृत सुभाषितों को नियमित रूप से साझा करना भारतीय सांस्कृतिक विरासत और शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने के उनके प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे क्या

पीएम मोदी की यह सुभाषित श्रृंखला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन रही है। विद्वानों और संस्कृत प्रेमियों ने इन पोस्टों को प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में सराहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के संदेश को भारत की वैश्विक छवि से जोड़ती है। तीन दिनों में तीन अलग-अलग श्लोक — परिश्रम, सामर्थ्य, और अब वसुधा की एकता — यह क्रम सुनियोजित प्रतीत होता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर श्लोक साझा करना और नीतिगत स्तर पर विविधता की रक्षा करना — दोनों अलग-अलग कसौटियाँ हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या यह सांस्कृतिक संवाद ज़मीनी समावेशिता में तब्दील होता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने 19 मई को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
पीएम मोदी ने 'जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम्...' श्लोक साझा किया, जो अथर्ववेद से लिया गया है। इसका अर्थ है कि धरती माता विभिन्न भाषाओं और धर्मों के लोगों को एक घर के सदस्यों की तरह पालती हैं और समृद्धि की हज़ारों धाराएँ बहाती हैं।
पीएम मोदी की संस्कृत सुभाषित श्रृंखला में अब तक कौन-से श्लोक आए हैं?
15 मई को बुद्धिमान कर्म पर श्लोक, 18 मई को जल की बूंदों से घड़ा भरने वाला निरंतर प्रयास का श्लोक, और 19 मई को धरती माता की सर्वसमावेशिता पर श्लोक — इस प्रकार तीन दिनों में तीन सुभाषित साझा किए गए।
'जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं' श्लोक का हिंदी में क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है कि पृथ्वी माता अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले और विभिन्न धर्मों को मानने वाले सभी लोगों को एक ही घर के सदस्यों की तरह संरक्षित करती हैं। साथ ही, वह हमारे लिए समृद्धि की हज़ारों धाराएँ उसी प्रकार बहाती हैं जैसे एक शांत और स्नेहमयी गाय दूध देती है।
पीएम मोदी नियमित रूप से संस्कृत श्लोक क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रयास भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल मंच के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का हिस्सा माना जाता है। यह 'वसुधैव कुटुम्बकम्' जैसी भारतीय अवधारणाओं को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करने की व्यापक रणनीति से भी जुड़ा है।
18 मई को पीएम मोदी ने कौन-सा श्लोक साझा किया था और उसका क्या अर्थ है?
18 मई को पीएम ने 'जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः...' श्लोक साझा किया था। इसका अर्थ है कि जिस प्रकार जल की एक-एक बूंद से घड़ा भर जाता है, उसी प्रकार निरंतर छोटे-छोटे प्रयासों से विद्या, धर्म और धन का धीरे-धीरे संचय होता है।
राष्ट्र प्रेस
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