पंचायती राज दिवस पर PM मोदी का संदेश: जनप्रतिनिधियों का राष्ट्रसेवा समर्पण प्रेरणादायक

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पंचायती राज दिवस पर PM मोदी का संदेश: जनप्रतिनिधियों का राष्ट्रसेवा समर्पण प्रेरणादायक

सारांश

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर PM मोदी ने संस्कृत श्लोक के जरिए जनसेवा की भावना को रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने पंचायतों को लोकतंत्र की नींव बताया। 73वें संविधान संशोधन की 32वीं वर्षगांठ पर ग्राम स्वराज के संकल्प को नई ऊर्जा मिली।

Key Takeaways

  • PM नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर देशभर के जनप्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
  • पीएम ने संस्कृत सुभाषितम् साझा किया जिसका अर्थ है — प्रजा का सुख ही जनसेवक का सुख है।
  • केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पंचायतों को लोकतंत्र की आधारभूत इकाई और आत्मनिर्भर भारत की नींव बताया।
  • 73वां संविधान संशोधन 1993 में लागू हुआ था, जिसकी 32वीं वर्षगांठ पर यह दिवस मनाया गया।
  • देश में 2.5 लाख से अधिक पंचायतें कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं के लिए 33%25 से अधिक आरक्षण सुनिश्चित है।
  • उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने ग्राम स्वराज और विकसित भारत के निर्माण में पंचायतों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के जनप्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि जनसेवा तथा राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने एक संस्कृत श्लोक के माध्यम से लोकसेवा की मूल भावना को भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी का संदेश और संस्कृत सुभाषितम्

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "पंचायती राज दिवस के अवसर पर देशभर के जनप्रतिनिधियों का हार्दिक अभिनंदन। जनसेवा के साथ राष्ट्रसेवा के प्रति आप सभी का समर्पण हर किसी को प्रेरित करने वाला है।"

इसके साथ ही उन्होंने 'संस्कृत सुभाषितम्' भी साझा किया: "प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं प्रियं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं प्रियम्॥" इस श्लोक का अर्थ है — "प्रजा के सुख में जनप्रतिनिधि का सुख है, प्रजा के हित में उसका हित है। जनसेवक का अपना कोई प्रिय नहीं, प्रजा का प्रिय ही उसका प्रिय होता है।"

यह श्लोक प्राचीन भारतीय शासन-दर्शन की उस परंपरा को दर्शाता है जिसमें सत्ता को सेवा का माध्यम माना गया है, न कि विशेषाधिकार का।

केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 'एक्स' पर लिखा कि "ग्राम स्वराज की परिकल्पना साकार करने में पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र की सशक्त आधारभूत इकाई हैं।" उन्होंने स्थानीय स्वशासन, जनभागीदारी, पारदर्शिता, डिजिटल सशक्तिकरण, महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि "भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और इन गांवों के समग्र विकास का आधार हमारी पंचायतें हैं।" उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन की सराहना की।

राज्यों के मुख्यमंत्रियों का अभिनंदन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करते हुए सशक्त पंचायतें, आत्मनिर्भर गांव और समृद्ध भारत के निर्माण का यह पावन अवसर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।" उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ कर ग्राम स्तर से ही विकास की नई गाथा लिखें।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "लोकतंत्र की सफलता पंचायतों की मजबूती पर निर्भर करती है।" उन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने और जनता की सीधी भागीदारी से विकसित भारत के निर्माण की बात कही।

पंचायती राज दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1993 में 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ था, जिसने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। यह संशोधन भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को गांव-गांव तक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।

वर्तमान में देशभर में लगभग 2.5 लाख से अधिक पंचायतें कार्यरत हैं और इनमें 33 प्रतिशत से अधिक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कई राज्यों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है, जो महिला नेतृत्व को जमीनी स्तर पर सशक्त बना रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और शिक्षा के प्रसार से जुड़ी है। आगामी समय में पंचायत चुनावों और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के क्रियान्वयन पर सरकार का विशेष ध्यान रहने की संभावना है।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता और प्रशासनिक अधिकार कितने मिले हैं। 73वें संविधान संशोधन के तीन दशक बाद भी अधिकांश पंचायतें केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के 'वितरण तंत्र' बनकर रह गई हैं, न कि स्वतंत्र नीति-निर्माता। PM मोदी का संस्कृत श्लोक प्रेरणादायक है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब पंचायतों को 29 विषयों पर वास्तविक अधिकार और पर्याप्त फंड मिले। महिला आरक्षण की सफलता एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन 'प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व' की समस्या अभी भी कई राज्यों में बड़ी चुनौती बनी हुई है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी दिन 1993 में 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ था, जिसने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया था।
PM मोदी ने पंचायती राज दिवस 2025 पर क्या कहा?
PM मोदी ने 'एक्स' पर देशभर के जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि जनसेवा और राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण हर किसी को प्रेरित करता है। उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया जो लोकसेवा की भावना को व्यक्त करता है।
73वें संविधान संशोधन का पंचायतों पर क्या प्रभाव पड़ा?
73वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता दी और स्थानीय स्वशासन को कानूनी ढांचा प्रदान किया। इससे महिलाओं और अन्य वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्चित हुआ और ग्रामीण विकास में जनभागीदारी बढ़ी।
भारत में कितनी पंचायतें हैं और महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
भारत में वर्तमान में लगभग 2.5 लाख से अधिक पंचायतें कार्यरत हैं। इनमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत से अधिक सीटें आरक्षित हैं, जबकि कई राज्यों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है।
पंचायती राज दिवस पर किन नेताओं ने बधाई दी?
इस अवसर पर PM मोदी के अलावा केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और पंचायतों की भूमिका को सराहा।
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