2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुरुत्वाकर्षण तरंगें: अंतरिक्ष की अदृश्य शक्ति का चौंकाने वाला विज्ञान और LIGO की ऐतिहासिक खोज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुरुत्वाकर्षण तरंगें: अंतरिक्ष की अदृश्य शक्ति का चौंकाने वाला विज्ञान और LIGO की ऐतिहासिक खोज

सारांश

गुरुत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष-काल में उठने वाली अदृश्य लहरें हैं जिनकी भविष्यवाणी आइंस्टीन ने 100 वर्ष पूर्व की थी। 2015 में LIGO ने 1.3 अरब वर्ष पुराने ब्लैक होल टकराव की तरंगें पकड़कर विज्ञान का इतिहास बदल दिया। यह खोज ब्रह्मांड को समझने का नया द्वार है।

मुख्य बातें

गुरुत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष-काल में उठने वाली अदृश्य लहरें हैं जो प्रकाश की गति से ब्रह्मांड में फैलती हैं।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगभग 100 वर्ष पहले अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत में इनके अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी।
LIGO ने 14 सितंबर 2015 को 1.3 अरब वर्ष पुराने दो ब्लैक होल के टकराव की तरंगें पकड़कर ऐतिहासिक खोज की।
LIGO की 4 किलोमीटर लंबी भुजाएं लेजर तकनीक से प्रोटॉन से हजारों गुना छोटे बदलाव को माप सकती हैं।
इस खोज के लिए LIGO के वैज्ञानिकों को 2017 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
VIRGO, KAGRA और भविष्य में LISA जैसे डिटेक्टर इस शोध को और आगे ले जाएंगे।

नई दिल्ली: गुरुत्वाकर्षण तरंगें (Gravitational Waves) अंतरिक्ष-काल के ताने-बाने में उठने वाली वे अदृश्य लहरें हैं, जो प्रकाश की गति से ब्रह्मांड में फैलती हैं और अपने मार्ग में आने वाली हर वस्तु को सूक्ष्म रूप से सिकोड़ती व फैलाती हैं। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगभग 100 वर्ष पूर्व अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत (General Theory of Relativity) में इनकी भविष्यवाणी की थी, जिसे 2015 में अमेरिका के LIGO डिटेक्टर ने सच साबित कर दिखाया।

गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्या होती हैं

जब ब्रह्मांड में कोई अत्यंत विशाल और भारी पिंड तेज गति से गतिशील होता है, तो वह अपने आसपास के अंतरिक्ष-काल (Space-Time) में हलचल पैदा करता है। यही हलचल गुरुत्वाकर्षण तरंगों के रूप में चारों दिशाओं में फैल जाती है। इसे ठीक उसी तरह समझा जा सकता है जैसे किसी शांत तालाब में पत्थर फेंकने पर पानी की सतह पर गोलाकार लहरें उठती हैं।

ये तरंगें इतनी सूक्ष्म होती हैं कि जब तक वे पृथ्वी तक पहुंचती हैं, उनका प्रभाव एक प्रोटॉन के आकार से भी हजारों गुना छोटा रह जाता है। इसीलिए इन्हें पकड़ना विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था।

गुरुत्वाकर्षण तरंगों के उत्पन्न होने के कारण

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, सबसे शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण तरंगें उन खगोलीय घटनाओं से उत्पन्न होती हैं जहां विशाल पिंड अत्यधिक वेग से टकराते या विलय करते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

दो ब्लैक होल का आपसी विलय — यह सबसे तीव्र गुरुत्वाकर्षण तरंगें उत्पन्न करता है। इसके अलावा दो न्यूट्रॉन स्टार का मर्जर, विशाल तारों का सुपरनोवा विस्फोट भी इन तरंगों का स्रोत बनते हैं। ये घटनाएं ब्रह्मांड में अरबों प्रकाश वर्ष दूर घटती हैं, इसलिए पृथ्वी तक पहुंचते-पहुंचते तरंगें बेहद कमजोर हो जाती हैं।

LIGO की ऐतिहासिक खोज — 2015 का वह क्षण

14 सितंबर 2015 को अमेरिका में स्थित लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जरवेटरी (LIGO) ने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों का प्रत्यक्ष संसूचन किया। यह संकेत 1.3 अरब वर्ष पूर्व दो ब्लैक होल के टकराने से उत्पन्न हुआ था। इस ऐतिहासिक खोज की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2016 में की गई और इसने आइंस्टीन की एक सदी पुरानी भविष्यवाणी को पूरी तरह सत्यापित कर दिया।

इस खोज के लिए LIGO के संस्थापक वैज्ञानिकों को 2017 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया, जो इस खोज के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करता है।

LIGO कैसे करता है काम

LIGO में L-आकार की दो भुजाएं होती हैं, जिनमें से प्रत्येक की लंबाई 4 किलोमीटर (लगभग 2.5 मील) है। जब कोई गुरुत्वाकर्षण तरंग इनसे होकर गुजरती है, तो ये भुजाएं अत्यंत सूक्ष्म रूप से सिकुड़ती और फैलती हैं।

LIGO इस बदलाव को लेजर किरणों, अत्यंत संवेदनशील दर्पणों और उन्नत उपकरणों की सहायता से मापता है। यह बदलाव एक प्रोटॉन के व्यास से भी हजारों गुना छोटा होता है — फिर भी LIGO इसे सटीकता से पहचान लेता है। यह आधुनिक विज्ञान की सबसे उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धियों में से एक है।

ब्रह्मांड को समझने का नया द्वार

LIGO से पहले वैज्ञानिक ब्रह्मांड का अध्ययन केवल प्रकाश तरंगों और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण के माध्यम से करते थे। गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज ने ब्रह्मांड को देखने का एक बिल्कुल नया आयाम खोल दिया है। इससे ब्लैक होल, न्यूट्रॉन स्टार और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में ऐसी जानकारियां मिल रही हैं जो पहले संभव नहीं थीं।

वर्तमान में LIGO के अलावा यूरोप में VIRGO और जापान में KAGRA जैसे अत्याधुनिक डिटेक्टर भी इन तरंगों का अध्ययन कर रहे हैं। भविष्य में अंतरिक्ष-आधारित डिटेक्टर LISA (Laser Interferometer Space Antenna) को भी स्थापित करने की योजना है, जो और भी सूक्ष्म तरंगों को पकड़ सकेगा।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दशकों में गुरुत्वाकर्षण तरंग खगोलशास्त्र (Gravitational Wave Astronomy) न केवल ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को सुलझाएगा, बल्कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसी अनसुलझी पहेलियों पर भी नई रोशनी डालेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह मानव जिज्ञासा की सबसे बड़ी जीत है। जब LIGO ने 2015 में वह संकेत पकड़ा जो 1.3 अरब वर्ष पहले उत्पन्न हुआ था, तो विज्ञान ने समय की सीमाओं को लांघ दिया। विडंबना यह है कि भारत जैसे देश में, जहां आर्यभट्ट से लेकर चंद्रशेखर तक की वैज्ञानिक परंपरा रही है, LIGO-India परियोजना अभी भी पूरी तरह साकार होने की प्रतीक्षा में है। यदि भारत इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी और तेज करे, तो वह न केवल वैश्विक विज्ञान में अग्रणी बन सकता है बल्कि अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों को भी प्रेरित कर सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्या होती हैं और ये कैसे बनती हैं?
गुरुत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष-काल के ताने-बाने में उठने वाली लहरें हैं जो तब बनती हैं जब दो विशाल पिंड जैसे ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार आपस में टकराते या विलय करते हैं। ये प्रकाश की गति से ब्रह्मांड में फैलती हैं और अपने मार्ग में वस्तुओं को सूक्ष्म रूप से सिकोड़ती-फैलाती हैं।
LIGO ने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगें कब पकड़ीं?
LIGO ने 14 सितंबर 2015 को पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों का प्रत्यक्ष संसूचन किया था। यह संकेत 1.3 अरब वर्ष पूर्व दो ब्लैक होल के टकराने से उत्पन्न हुआ था और इसकी आधिकारिक घोषणा फरवरी 2016 में की गई।
आइंस्टीन ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी कब की थी?
अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगभग 100 वर्ष पहले अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत (General Theory of Relativity) में गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी। 2015 में LIGO की खोज ने इस भविष्यवाणी को पूरी तरह सत्यापित कर दिया।
गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना इतना कठिन क्यों है?
ये तरंगें अरबों प्रकाश वर्ष की यात्रा के बाद पृथ्वी पर पहुंचते-पहुंचते इतनी कमजोर हो जाती हैं कि इनका प्रभाव एक प्रोटॉन के आकार से भी हजारों गुना छोटा होता है। LIGO जैसे अत्यंत संवेदनशील लेजर उपकरणों से ही इन्हें मापना संभव हो पाया है।
गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज से विज्ञान को क्या फायदा हुआ?
इस खोज ने ब्रह्मांड को समझने का एक बिल्कुल नया तरीका दिया है। अब वैज्ञानिक ब्लैक होल, न्यूट्रॉन स्टार और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में ऐसी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं जो केवल प्रकाश तरंगों से संभव नहीं थीं। भविष्य में यह डार्क मैटर जैसे रहस्यों को सुलझाने में भी मदद कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले