बंगाल में ऐतिहासिक मतदान: रामकृपाल यादव बोले — 91.78%25 वोटिंग बदलाव का संकेत
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 91.78 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया।
- तमिलनाडु में भी 84.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जो असाधारण रूप से उच्च है।
- BJP नेता रामकृपाल यादव ने रिकॉर्ड वोटिंग को सत्ता परिवर्तन का संकेत बताया।
- BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि ममता बनर्जी और TMC के खिलाफ जनाक्रोश मतदान केंद्रों पर दिखा।
- BJP विधायक केदारनाथ गुप्ता ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाते हुए चुनाव बाद कार्रवाई की चेतावनी दी।
- केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण इस बार मतदान प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही।
पटना, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 91.78 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत के ऐतिहासिक मतदान ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने इस असाधारण मतदान प्रतिशत को "बदलाव का ऐतिहासिक संकेत" करार दिया है। उनके अनुसार, दोनों राज्यों की जनता मौजूदा सरकारों के खिलाफ अपना गुस्सा मतपेटी के जरिए व्यक्त कर रही है।
रामकृपाल यादव का बड़ा बयान — जनता सत्ता परिवर्तन के मूड में
रामकृपाल यादव ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मतदान यह साबित करता है कि लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब जनता घरों से निकलकर इतनी भारी संख्या में वोट डालती है, तो उसके पीछे एक निश्चित संदेश होता है — और वह संदेश है सत्ता परिवर्तन।
यादव ने कहा, "लोकतंत्र में सरकार बदलने का सबसे शक्तिशाली हथियार चुनाव ही है। इस बार जनता उसी हथियार का उपयोग पूरी ताकत से कर रही है।" उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे और दोनों राज्यों में नई सरकारों का गठन होगा।
शांतिपूर्ण मतदान — भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत
यादव ने गुरुवार, 24 अप्रैल को हुए मतदान की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इस बार चुनाव प्रक्रिया असाधारण रूप से शांतिपूर्ण रही। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जहां चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है, वहां इतने शांत माहौल में मतदान होना खुद में एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती ने यह सुनिश्चित किया कि हर मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। यह शांति स्वयं बताती है कि भाजपा राज्य में स्थिरता और सुशासन स्थापित करने में सक्षम है।
संजय सरावगी — ममता सरकार के खिलाफ जनाक्रोश स्पष्ट
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी पश्चिम बंगाल की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रति जनता का आक्रोश मतदान केंद्रों पर साफ दिखाई दिया।
सरावगी के अनुसार, लोग बड़ी संख्या में घरों से निकले और मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगाईं — यही रिकॉर्ड वोटिंग का कारण बना। उन्होंने इसे टीएमसी सरकार के खिलाफ जनादेश की शुरुआत बताया।
टीएमसी पर हमले का आरोप — भाजपा विधायक केदारनाथ गुप्ता की कड़ी चेतावनी
भाजपा विधायक केदारनाथ गुप्ता ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर भाजपा उम्मीदवारों पर कथित हमले के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की "गुंडागर्दी" किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गुप्ता ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसी घटनाओं का अंत हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण अराजक तत्व ज्यादा उत्पात नहीं मचा पाए।
ऐतिहासिक संदर्भ — बंगाल में चुनावी हिंसा का पुराना दाग
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास दशकों पुराना है। 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा में सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं पर कथित हमले हुए थे, जिसकी जांच कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई कर रही है। इस पृष्ठभूमि में इस बार का अपेक्षाकृत शांत मतदान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि 91.78 प्रतिशत मतदान — जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है — सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि परंपरागत रूप से उच्च मतदान प्रतिशत सत्ता-विरोधी लहर का संकेत माना जाता है।
आने वाले दिनों में शेष चरणों के मतदान और अंततः परिणाम यह तय करेंगे कि यह रिकॉर्ड मतदान वाकई सत्ता परिवर्तन का संकेत था या महज उत्साहजनक भागीदारी। सभी की निगाहें अब मतगणना पर टिकी हैं।