भारत के युवा साहस और आत्मविश्वास से पराक्रम का नया अध्याय लिख रहे हैं: पीएम मोदी
सारांश
Key Takeaways
- वीरता और पराक्रम कठिनाइयों को पार करने की कुंजी हैं।
- भारत के युवाओं का साहस प्रेरणादायक है।
- आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति हर चुनौती को स्वीकार कर सकता है।
- संस्कृत सुभाषित जीवन में साहस की आवश्यकता को दर्शाता है।
- प्रेरणा से भरे युवा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौर्य की अहमियत और एक वीर व्यक्ति के सम्पूर्ण विश्व पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव को उजागर करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया है। उन्होंने कहा कि वीरता और पराक्रम ही वह अनमोल संपत्ति हैं, जिनके सहारे हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इस दिशा में प्रेरणा का कार्य करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "वीरता और पराक्रम वह संपत्ति है, जिससे हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इसी का प्रेरणास्त्रोत है।"
उन्होंने संस्कृत में एक सुभाषित साझा करते हुए लिखा, "एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्। क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा।"
इस सुभाषित में कहा गया है, "सूर्य जिस प्रकार अपनी प्रखर और विस्तृत ज्योति से सम्पूर्ण पृथ्वी को रोशन करता है, उसी प्रकार एक वीर अपने पराक्रम से सम्पूर्ण पृथ्वी को प्रभावित करता है।"
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को संस्कृत में एक सुभाषितम का पाठ किया, जिसमें जीवन की सबसे कठिन बाधाओं को पार करने में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के महत्व का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि साहस और दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है।
प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "जो व्यक्ति साहस और संकल्प से भरा हो, उसके लिए जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के माध्यम से हम कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम्। तस्मात् सिंहमिवोदारमात्मानं वीक्ष्य सम्पतेत्॥"
इस संस्कृत सुभाषित में कहा गया, "जिस प्रकार एक शेर में हजार हाथियों को हराने की शक्ति होती है, उसी प्रकार एक व्यक्ति को शेर की तरह निडरता, साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति के साथ नेक कार्यों में संलग्न होना चाहिए।"