पंचेन लामा की रिहाई की माँग: अमेरिका ने चीन पर बनाया दबाव, लापता हुए 31 साल

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पंचेन लामा की रिहाई की माँग: अमेरिका ने चीन पर बनाया दबाव, लापता हुए 31 साल

सारांश

31 साल पहले मात्र छह वर्ष की उम्र में गायब किए गए पंचेन लामा गेदुन चोएकी न्यिमा की रिहाई की माँग अमेरिका ने एक बार फिर चीन के सामने रखी है। यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि तिब्बती बौद्ध परंपरा की स्वायत्तता और धार्मिक उत्तराधिकार पर चीनी नियंत्रण के व्यापक सवाल का प्रतीक बन चुका है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने 18 मई 2025 को पंचेन लामा के लापता होने की 31वीं बरसी पर चीन से उनकी तत्काल रिहाई की माँग की।
गेदुन चोएकी न्यिमा को 1995 में मात्र छह वर्ष की आयु में दलाई लामा द्वारा पंचेन लामा घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को हिरासत में ले लिया था।
चीन ने दलाई लामा की घोषणा को खारिज कर ग्यैनकैन नोरबू को सरकारी समर्थन के साथ पंचेन लामा घोषित किया था।
अमेरिका ने तिब्बती बौद्धों के अपने धार्मिक नेता स्वयं चुनने के अधिकार का समर्थन किया और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप की आलोचना की।
पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध परंपरा में दलाई लामा के बाद दूसरा सर्वोच्च आध्यात्मिक पद है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 मई 2025 को तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता पंचेन लामा गेदुन चोएकी न्यिमा के लापता होने की 31वीं बरसी पर चीन से उनकी तत्काल रिहाई की माँग की है। 1995 में मात्र छह वर्ष की आयु में चीनी अधिकारियों द्वारा उन्हें और उनके परिवार को गायब कर दिए जाने के बाद से उनका कोई सार्वजनिक अता-पता नहीं है। यह माँग ऐसे समय में आई है जब तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि दलाई लामा द्वारा गेदुन चोएकी न्यिमा को पंचेन लामा के रूप में मान्यता दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद चीनी प्रशासन उन्हें और उनके परिवार को अपने साथ ले गया। पिगॉट ने कहा, 'चीनी अधिकारियों को तुरंत गेदुन चोएकी न्यिमा और उनके परिवार को रिहा करना चाहिए और तिब्बतियों या चीन में किसी भी अन्य समुदाय को उनके धार्मिक विश्वासों के कारण प्रताड़ित करना बंद करना चाहिए।'

अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान और भाषाई अधिकारों की रक्षा का समर्थन करता है।

चीन का रुख और विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 1995 में चीन ने दलाई लामा की पंचेन लामा संबंधी घोषणा को खारिज कर दिया था और सरकारी समर्थन के साथ ग्यैनकैन नोरबू को वैकल्पिक पंचेन लामा घोषित किया था। तिब्बती बौद्ध समुदाय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस कदम को धार्मिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप मानते हैं। चीन लंबे समय से तिब्बत और वहाँ के बौद्ध संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण बनाए हुए है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना होती रही है।

पंचेन लामा को तिब्बती बौद्ध परंपरा में दलाई लामा के बाद दूसरा सर्वोच्च आध्यात्मिक पद प्राप्त है। यह पद इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि परंपरागत रूप से पंचेन लामा और दलाई लामा एक-दूसरे के उत्तराधिकारी की पहचान में भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका की व्यापक नीतिगत स्थिति

पिगॉट ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि 'तिब्बती बौद्धों को, अन्य सभी धार्मिक समुदायों की तरह ही, दलाई लामा या पंचेन लामा सरीखे आध्यात्मिक गुरुओं को चुनने का अधिकार होना चाहिए — इसमें किसी सरकार या पार्टी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।' यह बयान अमेरिका की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह तिब्बत में चीन की नीतियों और धार्मिक मामलों में उसके हस्तक्षेप की आलोचना करता आया है।

आगे की संभावनाएँ

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध पहले से ही कई मोर्चों पर तनावपूर्ण हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस कूटनीतिक दबाव के केवल बयानबाजी से चीन की नीति में बदलाव संभव नहीं है। तिब्बती समर्थक संगठन लंबे समय से माँग करते आए हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में ठोस कदम उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या वार्षिक बयानबाजी से आगे कोई ठोस कदम उठाया जाएगा — क्योंकि पिछले तीन दशकों में ऐसी माँगों का चीन पर कोई व्यावहारिक असर नहीं पड़ा है। पंचेन लामा का मुद्दा केवल एक व्यक्ति की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है — यह दलाई लामा के उत्तराधिकार पर चीन के नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय अक्सर नज़रअंदाज़ करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि ग्यैनकैन नोरबू की चीन-समर्थित नियुक्ति भविष्य के दलाई लामा की पहचान को प्रभावित करने की दीर्घकालिक रणनीति का अंग है। बिना बहुपक्षीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र स्तर पर ठोस कार्रवाई के, ये बयान प्रतीकात्मक राजनीति से अधिक कुछ नहीं बन पाते।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचेन लामा गेदुन चोएकी न्यिमा कौन हैं और वे क्यों गायब हुए?
गेदुन चोएकी न्यिमा को 1995 में दलाई लामा ने तिब्बती बौद्ध धर्म का पंचेन लामा घोषित किया था। घोषणा के कुछ ही दिनों बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को हिरासत में ले लिया — उस समय वे मात्र छह वर्ष के थे। तब से उनका कोई सार्वजनिक अता-पता नहीं है।
अमेरिका ने चीन से पंचेन लामा की रिहाई की माँग क्यों की?
18 मई 2025 को पंचेन लामा के लापता होने की 31वीं बरसी पर अमेरिकी विदेश विभाग ने यह माँग उठाई। अमेरिका तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता और उनके अपने आध्यात्मिक नेता चुनने के अधिकार का समर्थन करता है, जिसमें वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप को अस्वीकार्य मानता है।
चीन ने पंचेन लामा के मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है?
चीन ने दलाई लामा द्वारा गेदुन चोएकी न्यिमा की पहचान को कभी स्वीकार नहीं किया। 1995 में चीन ने सरकारी समर्थन के साथ ग्यैनकैन नोरबू को वैकल्पिक पंचेन लामा घोषित किया था। चीन तिब्बत के बौद्ध संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखता है।
पंचेन लामा का पद तिब्बती बौद्ध धर्म में इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
पंचेन लामा तिब्बती बौद्ध परंपरा में दलाई लामा के बाद दूसरा सर्वोच्च आध्यात्मिक पद है। परंपरागत रूप से दोनों एक-दूसरे के उत्तराधिकारी की पहचान में भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह पद भविष्य के दलाई लामा के चयन के लिहाज़ से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
क्या अमेरिका की इस माँग का चीन पर कोई असर पड़ेगा?
अब तक के इतिहास को देखें तो चीन ने ऐसी अंतरराष्ट्रीय माँगों को नज़रअंदाज़ किया है। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस बहुपक्षीय कूटनीतिक दबाव के केवल बयानों से चीन की नीति में बदलाव की संभावना कम है।
राष्ट्र प्रेस
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