यूरोपीय संसद ने चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' की निंदा की, 439 वोटों से प्रस्ताव पास; तिब्बती पहचान पर मंडरा रहा खतरा

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यूरोपीय संसद ने चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' की निंदा की, 439 वोटों से प्रस्ताव पास; तिब्बती पहचान पर मंडरा रहा खतरा

सारांश

यूरोपीय संसद ने 439 वोटों से चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' की निंदा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया — तिब्बती संस्कृति, भाषा और धर्म पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस कानून के खिलाफ EU ने प्रत्यर्पण समझौते निलंबित करने और मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने की माँग की।

Key Takeaways

यूरोपीय संसद ने 1 मई 2026 को 439-52 के बहुमत से चीन के ' एथनिक यूनिटी लॉ ' की निंदा का प्रस्ताव पारित किया। यह कानून 1 जुलाई से लागू होने वाला है और सार्वजनिक स्थानों पर मंडेरिन को स्थानीय भाषाओं पर प्राथमिकता देता है। सीटीए ने 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा , चोत्रुल दोरजे रिनपोछे और पाल्डेन येशी की तत्काल रिहाई की माँग की। EU सदस्य देशों से चीन के साथ प्रत्यर्पण समझौते निलंबित करने की अपील की गई। प्रस्ताव में ' ईयू ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस रेजीम ' लागू करने की माँग शामिल।

यूरोपीय संसद ने 1 मई 2026 को चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' की कड़ी निंदा करते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, जिसमें 439 सांसदों ने समर्थन में मतदान किया। ब्रुसेल्स में पारित यह प्रस्ताव चेतावनी देता है कि 1 जुलाई से लागू होने वाला यह कानून तिब्बती लोगों की सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई पहचान को व्यवस्थित रूप से समाप्त करने का प्रयास है। प्रस्ताव के विरोध में 52 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 71 ने मतदान से दूरी बनाई।

कानून में क्या है और क्यों है विवाद

चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' में राज्य की विचारधारा को थोपने और सभी सार्वजनिक स्थानों पर स्थानीय भाषाओं की जगह मंडेरिन को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। यूरोपीय सांसदों का कहना है कि यह कानून तिब्बती समुदाय की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को मिटाने की सुनियोजित कोशिश है। गौरतलब है कि तिब्बत में भाषाई और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय वर्षों से चिंता जताता रहा है।

राजनीतिक कैदियों की रिहाई की माँग

सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) ने प्रस्ताव में कई प्रमुख राजनीतिक कैदियों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की माँग रखी। इनमें 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा, चोत्रुल दोरजे रिनपोछे और पाल्डेन येशी शामिल हैं, जिनके बारे में लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया कि वह 11वें पंचेन लामा की स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में चीन से लगातार जवाब माँगता रहेगा।

दलाई लामा के उत्तराधिकार पर यूरोपीय संसद का रुख

यूरोपीय सांसदों ने स्पष्ट रूप से कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन पूर्णतः एक धार्मिक मामला है और इसे केवल तिब्बती बौद्ध परंपराओं के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए। सांसदों ने जोर दिया कि इस प्रक्रिया में किसी भी सरकार का हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। यूरोपीय आयोग की मानवतावादी सहायता और संकट प्रबंधन आयुक्त हादजा लाहबीब ने बहस के दौरान कहा कि धर्म और आस्था की स्वतंत्रता, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा तथा धार्मिक समुदायों को अपने मामले स्वयं संभालने का अधिकार मिलना चाहिए।

विदेशों में रह रहे तिब्बतियों की सुरक्षा

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इस कानून का प्रभाव केवल चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्य देशों में रह रहे तिब्बतियों को भी प्रभावित कर सकता है। इसी कारण यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से अपील की गई है कि वे चीन के साथ अपने प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) समझौतों को निलंबित करें। सीटीए ने कहा कि यूरोपीय संसद तिब्बती समुदायों को चीन के प्रभाव से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

प्रतिबंध और आगे की राह

प्रस्ताव में माँग की गई कि यूरोपीय संघ को मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ 'ईयू ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस रेजीम' लागू करना चाहिए। ब्रुसेल्स में दलाई लामा के कार्यालय (तिब्बत कार्यालय) की प्रतिनिधि रिगजिन जेनखांग ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए यूरोपीय संसद का धन्यवाद किया और कहा कि चीन को जवाबदेह ठहराने तथा तिब्बती संस्कृति व धार्मिक विरासत को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ध्यान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यह प्रस्ताव यूरोपीय संघ और चीन के बीच मानवाधिकार को लेकर बढ़ते तनाव का नया अध्याय है।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह केवल कागज़ी निंदा बनकर रह जाएगा। EU और चीन के बीच गहरे व्यापारिक संबंध अक्सर मानवाधिकार एजेंडे को पीछे धकेल देते हैं — यही इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी सीमा है। 'ईयू ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस रेजीम' की माँग तब तक खोखली रहेगी जब तक सदस्य देश एकजुट होकर आर्थिक दबाव बनाने को तैयार न हों। तिब्बत पर अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का इतिहास बताता है कि बिना ठोस कार्रवाई के ये घोषणाएँ बीजिंग की नीतियों पर कोई असर नहीं डालतीं।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

चीन का 'एथनिक यूनिटी लॉ' क्या है?
चीन का 'एथनिक यूनिटी लॉ' एक ऐसा कानून है जो 1 जुलाई से लागू होने वाला है और सभी सार्वजनिक स्थानों पर स्थानीय भाषाओं की जगह मंडेरिन को प्राथमिकता देने तथा राज्य की विचारधारा थोपने का प्रावधान करता है। यूरोपीय संसद ने इसे तिब्बती सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई पहचान को व्यवस्थित रूप से समाप्त करने की कोशिश बताया है।
यूरोपीय संसद में यह प्रस्ताव कितने वोटों से पास हुआ?
यूरोपीय संसद में यह प्रस्ताव 439 सांसदों के समर्थन से पास हुआ, जबकि 52 ने विरोध किया और 71 ने मतदान से दूरी बनाई। यह स्पष्ट बहुमत दर्शाता है कि यूरोपीय संसद तिब्बत के मुद्दे पर एकजुट है।
11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा कौन हैं और उनकी रिहाई की माँग क्यों है?
गेधुन चोएक्यी न्यिमा को 1995 में दलाई लामा द्वारा 11वें पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी गई थी, जिसके कुछ ही दिन बाद चीन ने उन्हें हिरासत में ले लिया। तब से उनकी स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसीलिए यूरोपीय संघ समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी रिहाई की माँग करता रहा है।
EU ने तिब्बतियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने की माँग की है?
EU सदस्य देशों से चीन के साथ प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) समझौते निलंबित करने की अपील की गई है, ताकि विदेशों में रह रहे तिब्बतियों पर दबाव और दमन रोका जा सके। इसके अलावा मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ 'ईयू ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस रेजीम' लागू करने की माँग भी की गई है।
दलाई लामा के उत्तराधिकार पर यूरोपीय संसद का क्या रुख है?
यूरोपीय संसद ने स्पष्ट किया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन पूर्णतः धार्मिक मामला है और इसे केवल तिब्बती बौद्ध परंपराओं के अनुसार तय किया जाना चाहिए। सांसदों ने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी सरकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
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