'लज्जा' के 25 साल: जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर साझा किया खास मोंटाज, नारी सशक्तीकरण की यह फिल्म आज भी प्रासंगिक
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म 'लज्जा' ने 31 अगस्त 2026 को अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए। 2001 में प्रदर्शित यह फिल्म महिलाओं के शोषण, घरेलू हिंसा और नारी सशक्तीकरण को केंद्र में रखकर बनाई गई थी, और आज भी इसकी कहानी उतनी ही प्रासंगिक मानी जाती है। रजत जयंती के इस अवसर पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर फिल्म के दृश्यों का एक मोंटाज वीडियो साझा किया।
जैकी श्रॉफ ने दी श्रद्धांजलि
अभिनेता जैकी श्रॉफ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में फिल्म के चुनिंदा दृश्यों का एक मोंटाज वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'फिल्म लज्जा ने अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं।' फिल्म में उन्होंने रघुनाथ (रघु) का किरदार निभाया था — एक प्रवासी भारतीय (NRI) पति, जो बाहर से संभ्रांत दिखता है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे अपनी पत्नी के प्रति अभद्र व्यवहार और बेवफाई करता है।
फिल्म की कहानी और संदेश
फिल्म की मुख्य कहानी वैदेही (मनीषा कोइराला) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो पति रघु के अत्याचार से तंग आकर गर्भावस्था के दौरान अमेरिका छोड़ भारत लौट आती है। इस यात्रा में वह तीन अन्य महिलाओं से मिलती है — मैथिली (महिमा चौधरी), जानकी (माधुरी दीक्षित) और रामदुलारी (रेखा) — जो अलग-अलग पृष्ठभूमि से आती हैं, लेकिन पितृसत्तात्मक समाज और घरेलू हिंसा की एक जैसी पीड़ा झेलती हैं।
यह ऐसे समय में आई थी जब हिंदी सिनेमा में महिला-केंद्रित आख्यान दुर्लभ थे। फिल्म ने न केवल शोषण को बेबाकी से दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि ये महिलाएं हार मानने के बजाय अपने अधिकारों के लिए डटकर खड़ी होती हैं।
स्टार-स्टडेड कलाकार मंडली
फिल्म की कास्ट उस दौर की सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। मनीषा कोइराला, माधुरी दीक्षित, रेखा और महिमा चौधरी के साथ-साथ अजय देवगन (राजू), अनिल कपूर (बुल्ला) और जैकी श्रॉफ (रघु) ने अपने किरदारों को गहराई से जिया। निर्देशक ने कहानी की माँग के अनुसार हर कलाकार का चयन सोच-समझकर किया था, जो परदे पर साफ़ नज़र आता है।
संगीत की विरासत
फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके संगीत को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था। गौरतलब है कि 'लज्जा' के गीत आज भी सुने और याद किए जाते हैं, जो इस फिल्म की सांस्कृतिक छाप की गहराई को दर्शाता है।
25 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है 'लज्जा'
यह फिल्म समाज में महिलाओं की स्थिति, उनके साथ होने वाले शोषण और उनसे जुड़े अन्याय को गहराई से उजागर करती है। आलोचकों का कहना है कि ढाई दशक बाद भी जिन सवालों को 'लज्जा' ने उठाया था — घरेलू हिंसा, बराबरी और सम्मान — वे आज भी अनुत्तरित हैं। यही इस फिल्म को महज एक मनोरंजक कृति से आगे ले जाकर एक सामाजिक दस्तावेज़ बनाता है।