जैकी श्रॉफ ने नंदा और फारूक शेख को याद किया, इंस्टाग्राम पर साझा की पुरानी यादें
सारांश
Key Takeaways
- जैकी श्रॉफ ने नंदा और फारूक शेख को याद किया।
- नंदा का फिल्मी करियर लगभग 30 वर्षों तक चला।
- फारूक शेख ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की।
- दोनों कलाकारों की यादें आज भी लोगों के दिलों में बसी हैं।
- इंस्टाग्राम पर साझा की गई पुरानी यादें दर्शकों को प्रेरित करती हैं।
मुंबई, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसे कलाकार होते हैं, जिनका योगदान हर पीढ़ी के दिल में बसता है। यह यादें खास अवसरों पर फिर से जीवंत हो उठती हैं। इसी क्रम में अभिनेता जैकी श्रॉफ ने हिंदी सिनेमा के दो महान कलाकारों को विशेष तरीके से याद किया। उन्होंने अभिनेत्री नंदा की पुण्यतिथि और फारूख शेख की जयंती के अवसर पर पुरानी यादों की झलक इंस्टाग्राम पर साझा की।
जैकी श्रॉफ ने अभिनेत्री नंदा को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें नंदा की कई पुरानी तस्वीरें शामिल थीं। इस वीडियो में उन्होंने फिल्म 'जब जब फूल खिले' का प्रसिद्ध गाना 'ये समा समा है प्यार का' का उपयोग किया। जैकी ने कैप्शन में लिखा, 'नंदा को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहा हूं।'
ज्ञात हो कि नंदा का फिल्मी सफर लगभग ३० वर्षों तक चला, जिसमें उन्होंने कई यादगार फिल्मों में अभिनय किया। नंदा ने 'परिणीता', 'प्रायश्चित', 'कौन कातिल', 'असलियत', 'नया नशा', 'छोटी बहन', 'हम दोनों', 'आहिस्ता आहिस्ता', 'प्रेमरोग', 'मजदूर', 'भाभी' और 'गुमनाम' जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। उनकी अंतिम फिल्म 'मजदूर' थी, जिसमें कई बड़े सितारे शामिल थे। २०१४ में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
इसके बाद, जैकी श्रॉफ ने अभिनेता फारूख शेख को उनके जन्मदिन पर याद किया। उन्होंने उनकी एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपने खास अंदाज में दिखाई दे रहे थे। इस तस्वीर के साथ उन्होंने फिल्म 'बाजार' का गाना 'फिर छिड़ी रात' का उपयोग किया।
फारूक शेख हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी सादगी और बेहतरीन अभिनय से एक विशिष्ट पहचान बनाई। फारूख ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की और १९७३ में 'गर्म हवा' से फिल्मों में कदम रखा। उन्होंने सत्यजीत रे, साई परांजपे और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे दिग्गजों के साथ कार्य किया और 'चश्मे बद्दूर', 'बाजार' और 'उमराव जान' जैसी फिल्मों से पहचान बनाई। वह टीवी और थिएटर में भी सक्रिय रहे और अपने सहज अभिनय के लिए प्रसिद्ध रहे। २०१३ में दुबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।