माइक वॉल्ट्ज का दावा: आर्थिक दबाव से ईरान बातचीत में रियायत देने को मजबूर होगा
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने 10 अगस्त को दावा किया कि बढ़ते आर्थिक दबाव के चलते ईरान अंततः बातचीत की मेज पर रियायतें देने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की आर्थिक रणनीति को ईरानी अर्थव्यवस्था पर 'विनाशकारी प्रभाव' डालने वाला करार दिया।
वॉल्ट्ज के मुख्य दावे
फॉक्स न्यूज से बातचीत में वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरानी वार्ताकार बातचीत के दौरान बार-बार नकदी और आर्थिक संसाधनों तक पहुँच की माँग कर रहे हैं। उनके अनुसार, तेहरान सैन्य बमबारी का सामना करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन आर्थिक दबाव उसके लिए कहीं अधिक कठिन साबित हो रहा है।
वॉल्ट्ज ने यह भी कहा कि ईरान की सबसे बड़ी चिंता उसकी मुद्रा का लगातार कमज़ोर होना और बढ़ती महंगाई है। ईरानी नेतृत्व इस समय जमी हुई संपत्तियों तक पहुँच और नकदी हासिल करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
आर्थिक प्रतिबंधों का संयुक्त असर
वॉल्ट्ज के मुताबिक, आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी का संयुक्त दबाव अंततः ईरान को अपने रुख में बदलाव लाने और अमेरिकी शर्तों के करीब आने के लिए बाध्य कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व को देश की सेना या आम नागरिकों की स्थिति से अधिक चिंता अर्थव्यवस्था के बिगड़ने की है।
उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में ईरानी नेतृत्व रक्षा मंत्री की तुलना में ट्रेजरी सचिव बेसेंट से कहीं अधिक चिंतित है — यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि अमेरिका की आर्थिक कूटनीति सैन्य दबाव से आगे निकल रही है।
डेमोक्रेटिक सीनेटर की चेतावनी
इस बीच, डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने अमेरिका के भीतर की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। एनबीसी न्यूज से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति 'यह युद्ध हार चुके हैं' और यह संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही अमेरिका को नुकसान होगा।
मर्फी ने कहा कि वे युद्ध समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए किसी 'खराब समझौते' का भी समर्थन करने को तैयार हैं। उनके अनुसार, बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो रही और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है।
आम जनता पर असर
सीनेटर मर्फी ने चेताया कि इस संघर्ष से अमेरिका हर बीतते दिन कमज़ोर हो रहा है, जबकि ईरान की स्थिति सापेक्षतः मजबूत होती जा रही है। कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आम नागरिक इसकी सीधी मार झेल रहे हैं। यह विभाजित अमेरिकी राजनीतिक दृष्टिकोण दर्शाता है कि वाशिंगटन में ईरान नीति पर सर्वसम्मति नहीं है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर सीधा असर पड़ता है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और होर्मुज की स्थिति पर दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी।