ईरान-अमेरिका तनाव: इजरायली नेता इनात विल्फ बोलीं — होर्मुज पर ईरानी रुख बदले बिना कोई समझौता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच इजरायल की राष्ट्रीय संसद नेसेट की पूर्व सदस्य और ओज पार्टी की अध्यक्ष डॉ. इनात विल्फ ने 18 जुलाई को नई दिल्ली में इस संघर्ष की गहराई और उसके भू-राजनीतिक परिणामों पर अपने विचार साझा किए। उनका स्पष्ट मत है कि जब तक ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की अपनी नीति नहीं छोड़ता, कोई भी कूटनीतिक समझौता संभव नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपने सैन्य हमले जारी रखता है, तो ईरान का 'आक्रामक और विनाशकारी रूप' सामने आएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की आशंका अपने चरम पर है।
अमेरिकी नीति पर विल्फ का आकलन
डॉ. विल्फ ने कहा, 'हालात का अंदाजा लगाना मुश्किल है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बारे में हम एक बात जानते हैं कि जब वह कहते हैं कि सभी विकल्प मौजूद हैं, तो उनका असल में यही मतलब होता है। उनके लिए, सेना और कूटनीतिक विकल्प एक ही कंटिन्यूटी का हिस्सा हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका पहले ही ईरान में सत्ता परिवर्तन की नीति से पीछे हट चुका है और परमाणु मुद्दे पर भी अपना दृष्टिकोण बदल चुका है।
होर्मुज स्ट्रेट: समझौते की सबसे बड़ी बाधा
डॉ. विल्फ के अनुसार, ईरान-अमेरिका वार्ता की सफलता मुख्यतः ईरानी सरकार की लचीलेपन की क्षमता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, 'ईरानी नेतृत्व अपनी सत्ता के अस्तित्व को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने से गहराई से जुड़ा हुआ मानता है। उनके पास आय के बेहद सीमित स्रोत हैं। वे युद्ध से पहले ही एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे और वे अपने ही नागरिकों से भी भयभीत हैं।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि आईआरजीसी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए होर्मुज पर नियंत्रण एक अस्तित्व का प्रश्न है, जबकि अमेरिका के लिए यह एक 'रेड लाइन' है। उनके शब्दों में, 'जब तक सरकार अपने बचाव को स्ट्रेट को नियंत्रित करने के विचार से अलग नहीं करती, कोई कूटनीतिक समझौता संभव नहीं दिखता।'
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अनिश्चितता
ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति पर डॉ. विल्फ ने कहा कि इस विषय में पूरी पारदर्शिता का अभाव है। उनके अनुसार, 'यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के पास अभी भी परमाणु सामग्री मौजूद है या नहीं, क्या उसकी उस तक पहुँच है, क्या वह उसका उपयोग कर सकता है और उसका परमाणु कार्यक्रम वास्तव में कितना पीछे गया है।' यह अस्पष्टता, उनके मत में, संभवतः जानबूझकर बनाए रखी गई है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री कानून पर खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के व्यापक निहितार्थों पर डॉ. विल्फ ने चेताया कि आईआरजीसी को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण देने वाला कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उनके अनुसार ऐसा कोई भी कदम 'न सिर्फ दशकों बल्कि मुक्त व्यापार और सामान के स्वतंत्र प्रवाह को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने में सदियों की प्रगति को कमजोर करेगा।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इस विवाद का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और ईरानी नेतृत्व के अगले कदम पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।