होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की कड़ी चेतावनी: 'हमला करोगे तो जवाब मिलेगा', गालिबाफ ने अमेरिका को दी सीधी धमकी
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 9 जुलाई को अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट का संचालन ईरान की शर्तों पर होगा, न कि अमेरिकी दबाव या धमकियों के आधार पर। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी ईरान पर सैन्य हमले जारी रखे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा हो गया।
गालिबाफ का एक्स पर सीधा संदेश
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अमेरिका को अब तक यह समझ लेना चाहिए था कि धमकाने और अपने वादे तोड़ने की कीमत अब बिना चुकाए नहीं बची जा सकती। साफ शब्दों में कहूं तो अगर आप हमला करेंगे तो जवाब भी मिलेगा। बेवजह हाथ-पैर मत मारिए, वरना आप और ज़्यादा मुश्किल में फंसेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट तभी खुलेगा जब उसकी व्यवस्था ईरान के अनुसार होगी।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और केंद्रीय कमांड का बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार को एक्स पर लिखा कि 'अमेरिका, एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर रहे वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक चालक दल के खिलाफ हालिया अनुचित आक्रामक कार्रवाई के लिए ईरान को जवाबदेह ठहरा रहा है।' कमांड के अनुसार, बुधवार को अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत पूरे मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में गश्त कर रहे थे।
ट्रंप का रुख: संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान पर किए गए अमेरिकी सैन्य हमलों का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि तेहरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए माँगे गए अस्थायी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। ट्रंप ने संकेत दिया कि मौजूदा कूटनीतिक प्रक्रिया लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कुछ समय के लिए सैन्य कार्रवाई रोकी थी, लेकिन ईरान ने इसके बाद फिर से आक्रामक कदम उठाने शुरू कर दिए।
होर्मुज स्ट्रेट का सामरिक महत्व
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब मंगलवार रात से बुधवार तक दोनों देशों के बीच नए सैन्य टकराव की खबरें सामने आईं।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों के कड़े रुख को देखते हुए कूटनीतिक हल की संभावना फिलहाल कम दिखती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर इसका असर पड़ेगा और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार किस दिशा में जाएँगे।