सिंधु जल संधि निलंबन पर भाजपा का समर्थन: 'जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, यहाँ के लोगों को मिले'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 9 जुलाई को सिंधु जल संधि के निलंबन का खुलकर समर्थन किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, बल्कि यहाँ के नागरिकों को मिलना चाहिए। यह प्रतिक्रिया जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने और सिंधु जल संधि को निलंबित करने का समर्थन किया था।
भाजपा प्रवक्ता का कड़ा रुख
भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को सिंधु जल संधि के निलंबन का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र का पानी यहाँ के लोगों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान एक ओर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी भेजकर निर्दोष नागरिकों की जान ले रहा है और दूसरी ओर भारत से पानी भी प्राप्त कर रहा है।
ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'पानी और खून दोनों एक साथ नहीं बह सकते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भेजा जाने वाला पानी पूरी तरह बंद होना चाहिए और वह जल संसाधन जम्मू-कश्मीर के लोगों के विकास में लगना चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष की राज्य दर्जे पर तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस लगभग दो वर्षों से सत्ता में है, लेकिन उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे पूरे नहीं किए। शर्मा ने कहा कि जनता अब नेशनल कॉन्फ्रेंस की कार्यशैली को भली-भाँति समझ चुकी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि उचित समय आने पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि भाजपा राज्य दर्जे के मामले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरने का अवसर भुना रही है।
नकवी का 'खून और पानी' पर बयान
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने सिंधु जल संधि पर उमर अब्दुल्ला के बयान का स्वागत करते हुए कहा, 'आप खून बहाओ, हम पानी पिलाएँ — यह नहीं चलेगा।' उन्होंने कहा कि जो देश भारत के नागरिकों, सैनिकों और निर्दोष लोगों का खून बहाने में संकोच नहीं करता, उसे पानी देना उचित नहीं है। नकवी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के व्यवहार के मद्देनज़र सरकार उचित और कड़ा जवाब दे रही है।
व्यापक संदर्भ: सिंधु जल संधि क्यों चर्चा में है
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी, जिसके तहत सिंधु नदी प्रणाली के जल का बँटवारा तय किया गया था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हैं और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का यह बयान उल्लेखनीय है, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस परंपरागत रूप से केंद्र सरकार की कुछ नीतियों की आलोचक रही है। इस बार उनका रुख भाजपा के रुख से मेल खाता दिखता है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं।
आगे क्या होगा
सिंधु जल संधि के निलंबन का दीर्घकालिक असर जम्मू-कश्मीर की सिंचाई परियोजनाओं, पनबिजली उत्पादन और कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि वह जल पुनर्वितरण की विस्तृत रूपरेखा जारी करे, ताकि स्थानीय लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।