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सिंधु जल संधि निलंबन पर भाजपा का समर्थन: 'जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, यहाँ के लोगों को मिले'

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सिंधु जल संधि निलंबन पर भाजपा का समर्थन: 'जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, यहाँ के लोगों को मिले'

सारांश

सिंधु जल संधि के निलंबन पर भाजपा ने एकजुट होकर कहा — पाकिस्तान को पानी देना और आतंकवाद सहना एक साथ नहीं चलेगा। CM उमर अब्दुल्ला के समर्थन के बाद भाजपा ने इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों के हक की लड़ाई बताया, जबकि राज्य दर्जे के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरा।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, यहाँ के नागरिकों को मिलना चाहिए।
CM उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल संधि निलंबन और राज्य दर्जा बहाली दोनों का समर्थन किया।
भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर घोषणापत्र के वादे पूरे न करने का आरोप लगाया।
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा — 'जो खून बहाए, उसे पानी नहीं दिया जा सकता।' PM मोदी पहले ही कह चुके हैं कि 'पानी और खून दोनों एक साथ नहीं बहेंगे।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 9 जुलाई को सिंधु जल संधि के निलंबन का खुलकर समर्थन किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर का पानी पाकिस्तान को नहीं, बल्कि यहाँ के नागरिकों को मिलना चाहिए। यह प्रतिक्रिया जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने और सिंधु जल संधि को निलंबित करने का समर्थन किया था।

भाजपा प्रवक्ता का कड़ा रुख

भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को सिंधु जल संधि के निलंबन का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र का पानी यहाँ के लोगों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान एक ओर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी भेजकर निर्दोष नागरिकों की जान ले रहा है और दूसरी ओर भारत से पानी भी प्राप्त कर रहा है।

ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'पानी और खून दोनों एक साथ नहीं बह सकते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भेजा जाने वाला पानी पूरी तरह बंद होना चाहिए और वह जल संसाधन जम्मू-कश्मीर के लोगों के विकास में लगना चाहिए।

भाजपा अध्यक्ष की राज्य दर्जे पर तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस लगभग दो वर्षों से सत्ता में है, लेकिन उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे पूरे नहीं किए। शर्मा ने कहा कि जनता अब नेशनल कॉन्फ्रेंस की कार्यशैली को भली-भाँति समझ चुकी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि उचित समय आने पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि भाजपा राज्य दर्जे के मामले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरने का अवसर भुना रही है।

नकवी का 'खून और पानी' पर बयान

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने सिंधु जल संधि पर उमर अब्दुल्ला के बयान का स्वागत करते हुए कहा, 'आप खून बहाओ, हम पानी पिलाएँ — यह नहीं चलेगा।' उन्होंने कहा कि जो देश भारत के नागरिकों, सैनिकों और निर्दोष लोगों का खून बहाने में संकोच नहीं करता, उसे पानी देना उचित नहीं है। नकवी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के व्यवहार के मद्देनज़र सरकार उचित और कड़ा जवाब दे रही है।

व्यापक संदर्भ: सिंधु जल संधि क्यों चर्चा में है

गौरतलब है कि सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी, जिसके तहत सिंधु नदी प्रणाली के जल का बँटवारा तय किया गया था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हैं और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का यह बयान उल्लेखनीय है, क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस परंपरागत रूप से केंद्र सरकार की कुछ नीतियों की आलोचक रही है। इस बार उनका रुख भाजपा के रुख से मेल खाता दिखता है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं।

आगे क्या होगा

सिंधु जल संधि के निलंबन का दीर्घकालिक असर जम्मू-कश्मीर की सिंचाई परियोजनाओं, पनबिजली उत्पादन और कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि वह जल पुनर्वितरण की विस्तृत रूपरेखा जारी करे, ताकि स्थानीय लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब उसी केंद्र की सबसे विवादास्पद कूटनीतिक चाल के साथ खड़ा दिख रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि संधि निलंबन का लाभ जम्मू-कश्मीर के किसानों और आम नागरिकों तक कैसे और कब पहुँचेगा — इसका कोई ठोस रोडमैप अभी सामने नहीं आया है। भाजपा का 'पानी बनाम आतंकवाद' का फ्रेम राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन जल पुनर्वितरण की तकनीकी और कानूनी जटिलताएँ इस बयानबाजी से कहीं अधिक गहरी हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल संधि क्या है और इसे क्यों निलंबित किया गया?
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बँटवारा समझौता है, जो सिंधु नदी प्रणाली के उपयोग को नियंत्रित करता है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया, जिसे अब भाजपा और CM उमर अब्दुल्ला दोनों का समर्थन मिल रहा है।
भाजपा ने सिंधु जल संधि निलंबन का समर्थन क्यों किया?
भाजपा का तर्क है कि पाकिस्तान एक ओर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी भेजता है और दूसरी ओर भारत से जल-संधि का लाभ उठाता है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पानी यहाँ के लोगों के विकास में लगना चाहिए, न कि पाकिस्तान को जाना चाहिए।
CM उमर अब्दुल्ला ने राज्य दर्जे पर क्या कहा और भाजपा की क्या प्रतिक्रिया रही?
CM उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने की माँग दोहराई। भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने इस पर कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस दो वर्षों में अपने घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं कर पाई और PM मोदी पहले ही कह चुके हैं कि उचित समय पर राज्य दर्जा दिया जाएगा।
मुख्तार अब्बास नकवी ने सिंधु जल संधि पर क्या कहा?
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो देश भारत के नागरिकों और सैनिकों का खून बहाता है, उसे पानी देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पाकिस्तान के व्यवहार का उचित और कड़ा जवाब दे रही है।
सिंधु जल संधि निलंबन से जम्मू-कश्मीर को क्या फायदा हो सकता है?
कथित तौर पर संधि निलंबन से जम्मू-कश्मीर में सिंचाई परियोजनाओं, पनबिजली उत्पादन और कृषि के लिए अधिक जल उपलब्ध हो सकता है। हालाँकि, जल पुनर्वितरण की विस्तृत रूपरेखा अभी केंद्र सरकार की ओर से जारी होनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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