सिंधु जल संधि पर जदयू नेता राजीव रंजन बोले — पाकिस्तान की सांसें थम रही हैं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिड़गिड़ा रहा
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन ने 9 जुलाई को पटना में सिंधु जल संधि के निलंबन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान पहले हतप्रभ था, अब उसकी सांसें थम रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम नरसंहार के बाद भारत ने जो बड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं, उनका सीधा असर पाकिस्तान की कृषि, सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान पर असर
राजीव रंजन ने कहा कि पाकिस्तान को अब कृषि और जल आपूर्ति के मोर्चे पर गंभीर मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, 'इसीलिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने पाकिस्तान गिड़गिड़ा रहा है।' गौरतलब है कि भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था, जो दशकों से दोनों देशों के बीच जल-बँटवारे का आधार रही है।
उमर अब्दुल्ला के रुख को सराहा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान को सकारात्मक बताते हुए राजीव रंजन ने कहा, 'उमर अब्दुल्ला की ओर से बिल्कुल साफ और सही अर्थों में कहा गया है।' उन्होंने कहा कि संधि के निलंबन के बाद नई व्यवस्था में कश्मीर के किसानों को अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, और इसीलिए यह एक सकारात्मक राजनीतिक स्टैंड है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़के संघर्ष पर राजीव रंजन ने इसे 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ से हमले किए गए और बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गुणात्मक बदलाव आना शुरू हो गया है। उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने और समझौते की शर्तों का सम्मान करने की अपील की।
PM मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा से बड़ी उम्मीदें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर राजीव रंजन ने कहा कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और यूरेनियम संवर्धन जैसे क्षेत्रों में भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल कर सकते हैं। उनके अनुसार इस यात्रा से कुछ बड़े ऐलान संभव हैं, जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को खासा फायदा हो सकता है।
ममता बनर्जी और बंगाल की राजनीति
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी के कार्यक्रम में अंडे फेंके जाने की घटना पर राजीव रंजन ने कहा कि लोगों में नाराजगी स्वाभाविक है, क्योंकि उनके शासनकाल में विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ उत्पीड़न, हत्याएं और आगजनी की घटनाएं हुईं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की अराजकता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। ममता द्वारा अपने ही TMC कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने पर उन्होंने तंज कसा कि जो नेता पार्टी को जागीर की तरह चलाते हैं, जनता उन्हें किनारे लगाने का फैसला कर लेती है। बंगाल एनकाउंटर पर उन्होंने कहा कि आरजी कर और संदेशखाली की घटनाओं के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कठोर कदमों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। आने वाले दिनों में सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की संभावना है।