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पाकिस्तान का जल संकट: सिंधु जल संधि नहीं, भूजल दोहन और कुप्रबंधन है असली वजह — रिपोर्ट

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पाकिस्तान का जल संकट: सिंधु जल संधि नहीं, भूजल दोहन और कुप्रबंधन है असली वजह — रिपोर्ट

सारांश

पाकिस्तान का जल संकट भारत की देन नहीं — यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि IWMI के आकलन के अनुसार 60% सिंचाई जल बर्बाद होता है और 95% मीठा पानी कृषि में जाता है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित कर दी है।

मुख्य बातें

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान का जल संकट सिंधु जल संधि नहीं, बल्कि आंतरिक कुप्रबंधन और भूजल दोहन के कारण है।
IWMI (2024–2026) के आकलन के अनुसार पाकिस्तान का 95% मीठा पानी कृषि में खर्च होता है और 60% सिंचाई जल बर्बाद हो जाता है।
लाहौर और पंजाब प्रांत में पानी की किल्लत गहराती जा रही है; सिंचाई व्यवस्था को दुनिया की सबसे खराब व्यवस्थाओं में गिना जाता है।
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सेमिनार आयोजित कर IWT को क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के रूप में पेश करने की कोशिश की।
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित कर दी और भविष्य का सहयोग पाकिस्तान के आतंकवाद-विरोधी कदमों पर निर्भर बताया।

पाकिस्तान में जल संकट की जड़ें सिंधु जल संधि में नहीं, बल्कि देश की अपनी खस्ताहाल सिंचाई व्यवस्था, अंधाधुंध भूजल दोहन और दशकों के कुप्रबंधन में हैं। यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर और पंजाब प्रांत के कई इलाकों में पानी की किल्लत गहराती जा रही है, फिर भी इस्लामाबाद अपनी आंतरिक विफलताओं को सुधारने के बजाय इसका ठीकरा भारत पर फोड़ता रहा है।

सिंचाई व्यवस्था की बदहाली

रिपोर्ट में इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI) के 2024–2026 के आकलनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पाकिस्तान के कुल मीठे पानी का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा कृषि में खर्च होता है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत सिंचाई का पानी नहरों के रिसाव और पुरानी तकनीकों की वजह से बर्बाद हो जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था दुनिया की सबसे खराब व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। खेतों तक पानी पहुँचाने के अप्रचलित तरीके और रखरखाव की उपेक्षा ने स्थिति को और विकट बना दिया है।

सेमिनार की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव की कोशिश

हाल ही में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद के जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया, जिसका विषय था — 'सिंधु जल संधि: शांति और क्षेत्रीय स्थिरता का एक साधन।' यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेमिनार का उद्देश्य सिंधु जल संधि (IWT) के मुद्दे को एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के रूप में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग करना था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह उसी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसका उपयोग पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को 'परमाणु खतरे वाले क्षेत्र' के रूप में पेश करने में करता रहा है — यानी आंतरिक विफलता को बाहरी संकट का रूप देना।

भारत की 'सद्भावना' और संधि का इतिहास

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को सीमा पार नदी सहयोग का एक सफल उदाहरण बताता है, लेकिन 1960 से अब तक इसका जारी रहना काफी हद तक इसलिए संभव हुआ क्योंकि ऊपरी क्षेत्र के देश के रूप में भारत ने लगातार 'सद्भावना और उदारता' का परिचय दिया। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि यदि पाकिस्तान ऊपरी क्षेत्र में होता, तो यह मानना कठिन होता कि वह जल स्रोतों का उपयोग भारत पर दबाव बनाने के लिए नहीं करता।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने कई बार सिंधु जल संधि की भावना का उल्लंघन किया — जिसमें 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1999 का कारगिल संघर्ष और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना शामिल है।

पहलगाम हमले के बाद भारत का कड़ा रुख

रिपोर्ट में संसद हमले (दिसंबर 2001), मुंबई आतंकी हमले (नवंबर 2008), पुलवामा हमले (फरवरी 2019) और पहलगाम आतंकी हमले (अप्रैल 2025) सहित कई आतंकी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित कर दिया। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में इस संधि पर सहयोग पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद समाप्त करने के ठोस कदमों पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल भारत से नहीं, इस्लामाबाद की नीति-निर्माण क्षमता से पूछा जाना चाहिए। पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा संधि स्थगित किए जाने से पाकिस्तान के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी हुई है — लेकिन इसका समाधान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोर मचाने में नहीं, सिंचाई सुधार और आतंकवाद पर विश्वसनीय कार्रवाई में है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के जल संकट की असली वजह क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान का जल संकट सिंधु जल संधि के कारण नहीं, बल्कि अंधाधुंध भूजल दोहन, खराब सिंचाई व्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण है। IWMI के 2024–2026 के आकलन के अनुसार देश का 60% सिंचाई जल नहरों के रिसाव और पुरानी तकनीकों की वजह से बर्बाद हो जाता है।
सिंधु जल संधि को भारत ने क्यों स्थगित किया?
अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस संधि पर सहयोग पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद समाप्त करने के ठोस कदमों पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान में कितना सिंचाई जल बर्बाद होता है?
IWMI के 2024–2026 के आकलन के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग 60% सिंचाई का पानी नहरों के रिसाव और खेतों तक पानी पहुँचाने के पुराने तरीकों की वजह से बर्बाद हो जाता है। इसके अलावा, देश के कुल मीठे पानी का 95% हिस्सा कृषि में खर्च होता है।
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में कौन-सा सेमिनार आयोजित किया और उसका उद्देश्य क्या था?
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद के जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में 'सिंधु जल संधि: शांति और क्षेत्रीय स्थिरता का एक साधन' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया। रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य IWT के मुद्दे को क्षेत्रीय सुरक्षा संकट के रूप में पेश कर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग करना था।
क्या पाकिस्तान ने पहले सिंधु जल संधि की भावना का उल्लंघन किया है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों, 1999 के कारगिल संघर्ष और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर कई बार सिंधु जल संधि की भावना का उल्लंघन किया। संसद हमला (2001), मुंबई हमला (2008), पुलवामा हमला (2019) और पहलगाम हमला (2025) भी इस सूची में शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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