22 जुलाई 2026
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सिंध जल संकट: पंजाब पर तय हिस्से से 21% अधिक पानी लेने का आरोप, खरीफ फसलें खतरे में

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सिंध जल संकट: पंजाब पर तय हिस्से से 21% अधिक पानी लेने का आरोप, खरीफ फसलें खतरे में

सारांश

पाकिस्तान में सिंध और पंजाब के बीच पानी की जंग फिर छिड़ी है। सिंध की नहरों में 82% तक की कमी, पंजाब पर 21% अधिक पानी लेने का आरोप, और 55 लाख टन चावल उत्पादन दाँव पर — यह संकट 1991 के जल समझौते की बुनियादी विफलता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सिंध सिंचाई विभाग के अनुसार दादू कैनाल में 82% , NWC में 64.1% और राइस कैनाल में 38% पानी की कमी दर्ज।
पंजाब को 44,000 क्यूसेक आवंटित, लेकिन कथित तौर पर 53,394 क्यूसेक — यानी 21% अधिक — उपयोग कर रहा है।
सिंध सरकार की 1,30,000 क्यूसेक माँग के विरुद्ध केवल 1,00,000 क्यूसेक उपलब्ध।
PPP नेता निसार अहमद खुखरो ने चेतावनी दी — सिंध का 55 लाख टन चावल उत्पादन और 1.4 अरब डॉलर का निर्यात खतरे में।
अप्रैल 2025 में चोलिस्तान नहर परियोजना के विरोध में 10 दिन तक कराची-उत्तर राजमार्ग अवरुद्ध रहे थे।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में खरीफ सीजन 2025 के दौरान गंभीर जल संकट गहरा गया है। सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़ों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रांत को उसकी माँग से कहीं कम पानी मिल रहा है, जबकि पंजाब प्रांत पर आरोप है कि वह अपने निर्धारित हिस्से से लगभग 21 प्रतिशत अधिक पानी उपयोग कर रहा है। यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब पाकिस्तान पहले से ही जलवायु परिवर्तन, सिकुड़ते जल संसाधनों और कृषि संकट की चपेट में है।

नहरों में पानी की भारी कमी

सुक्कुर बैराज की राइट बैंक नहर प्रणाली में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से गिरा है। सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नॉर्थ वेस्ट कैनाल (NWC) में 64.1 प्रतिशत, राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत पानी की कमी दर्ज की गई है। इससे लरकाना, कंबर-शहदादकोट, दादू, शिकारपुर और बलूचिस्तान के कई कृषि क्षेत्र सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

किसानों का कहना है कि नहरों के अंतिम छोर तक पानी न पहुँचने के कारण कई क्षेत्रों में अभी तक धान की नर्सरी तैयार नहीं हो सकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को अपूरणीय नुकसान होने की आशंका है।

पंजाब पर अधिक पानी लेने का आरोप

रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब को 44,000 क्यूसेक पानी आवंटित है, लेकिन वह 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है — जो तय हिस्से से 21 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह तौंसा बैराज पर भी निर्धारित मात्रा से अधिक पानी निकाले जाने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, चश्मा बैराज में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जो संकेत देता है कि ऊपरी क्षेत्रों में पानी जमा हो रहा है जबकि निचले इलाकों में कमी बढ़ती जा रही है।

सिंध सरकार ने 1,30,000 क्यूसेक पानी की माँग की थी, लेकिन उसे केवल 1,00,000 क्यूसेक ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

आर्थिक असर और राजनीतिक चेतावनी

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के सिंध अध्यक्ष निसार अहमद खुखरो ने चेतावनी दी है कि खरीफ सीजन में सिंध के हिस्से का पानी कम करना प्रांत की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट करेगा। उन्होंने कहा कि सिंध हर साल 55 लाख टन चावल का उत्पादन करता है और लगभग 1.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यह आँकड़ा बताता है कि जल संकट केवल प्रांतीय मसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और विदेशी मुद्रा आय का सवाल भी है।

1991 जल समझौते पर उठे सवाल

यह विवाद पाकिस्तान के 1991 जल बंटवारा समझौते की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में इसी मुद्दे पर पाकिस्तान लगभग दस दिनों तक आंशिक रूप से ठप रहा था। कराची से उत्तर की ओर माल ढुलाई पूरी तरह बंद हो गई थी, जब सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान के चोलिस्तान रेगिस्तान में सिंचाई के लिए छह नहरें बनाने की परियोजना का ऐलान किया था। दक्षिणी सिंध में व्यापक प्रदर्शनों के बाद सरकार को अंततः झुकना पड़ा था।

जल संसाधनों के असमान वितरण से प्रांतों के बीच राजनीतिक तनाव और गहरा होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक 1991 समझौते को नए जलवायु वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं ढाला जाता, यह संकट हर खरीफ सीजन में दोहराता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 1991 जल समझौते की संरचनात्मक कमज़ोरियों का स्वाभाविक परिणाम है — एक समझौता जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी की वास्तविकताओं को समायोजित करने में विफल रहा है। अप्रैल 2025 में चोलिस्तान नहर विवाद में सरकार का झुकना दिखाता है कि दबाव में नीतियाँ बदलती हैं, लेकिन स्थायी तंत्र नहीं बनता। जब तक पानी के वास्तविक प्रवाह की स्वतंत्र निगरानी और कानूनी प्रवर्तन नहीं होगा, हर खरीफ सीजन यही आरोप-प्रत्यारोप दोहराएगा — और सिंध के किसान हर बार कीमत चुकाएंगे।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंध में जल संकट की मुख्य वजह क्या है?
सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रांत की प्रमुख नहरों में 38% से 82% तक पानी की कमी है। अधिकारियों और किसानों का आरोप है कि पंजाब अपने निर्धारित 44,000 क्यूसेक के बजाय 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो तय हिस्से से 21% अधिक है।
इस जल संकट से सिंध की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
PPP नेता निसार अहमद खुखरो के अनुसार, सिंध सालाना 55 लाख टन चावल उत्पादन करता है और लगभग 1.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है। पानी की कमी से धान की नर्सरी तैयार नहीं हो पा रही, जिससे इस साल का उत्पादन और निर्यात आय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
पाकिस्तान का 1991 जल बंटवारा समझौता क्या है और यह विवाद क्यों है?
1991 में पाकिस्तान के चारों प्रांतों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे का यह समझौता हुआ था। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता जलवायु परिवर्तन और बढ़ती कृषि माँग के अनुरूप नहीं है, और इसके क्रियान्वयन की कोई स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था नहीं है।
अप्रैल 2025 में पाकिस्तान में पानी को लेकर क्या हुआ था?
अप्रैल 2025 में सरकार ने चोलिस्तान रेगिस्तान में सिंचाई के लिए छह नहरें बनाने की परियोजना का ऐलान किया था। इसके विरोध में दक्षिणी सिंध में प्रदर्शन शुरू हुए और कराची से उत्तर की ओर जाने वाले सभी राजमार्ग लगभग दस दिनों तक अवरुद्ध रहे, जिसके बाद सरकार को परियोजना रोकनी पड़ी।
सुक्कुर बैराज की नहरों में कितनी पानी की कमी है?
सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नॉर्थ वेस्ट कैनाल (NWC) में 64.1%, राइस कैनाल में 38% और दादू कैनाल में 82% पानी की कमी है। इससे लरकाना, कंबर-शहदादकोट, दादू, शिकारपुर और बलूचिस्तान के कई कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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