25 जुलाई 2026
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सिंध के जल अधिकारों पर पीपीपी का विरोध: 130 स्थानों पर रैलियां, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

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सिंध के जल अधिकारों पर पीपीपी का विरोध: 130 स्थानों पर रैलियां, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

सारांश

पाकिस्तान में सिंध प्रांत की सत्तारूढ़ पीपीपी ने 130 स्थानों पर रैलियां निकालकर सिंधु नदी के जल की कथित 'चोरी' के खिलाफ मोर्चा खोला। 1991 के जल समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पार्टी ने आंदोलन के तीसरे चरण की चेतावनी दी — यह पाकिस्तान की अंतर-प्रांतीय जल राजनीति में नया तनाव है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 25 जुलाई को सिंध प्रांत के 130 से अधिक स्थानों पर सिंधु नदी जल विवाद को लेकर रैलियां आयोजित कीं।
सिंध पीपीपी अध्यक्ष निसार खुहरो ने आईआरएसए और संघीय सरकार पर 1991 के जल बंटवारा समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया।
पार्टी का आरोप है कि चश्मा-झेलम , तौंसा-पंजनद और जलालपुर नहरों के ज़रिए सिंध का पानी अवैध रूप से मोड़ा जा रहा है।
मांगें न मानने पर आंदोलन के तीसरे चरण की चेतावनी — सभी संभागीय मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन होंगे।
पीपीपी नेताओं के अनुसार, जल संकट से सिंध की कृषि भूमि बंजर हो रही है और प्रांत को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 25 जुलाई को सिंध प्रांत भर में 130 से अधिक स्थानों पर रैलियां निकालीं, जिसमें सिंधु नदी के जल के कथित अवैध मोड़ के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई। पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संघीय सरकार ने सिंध के संवैधानिक जल अधिकारों की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन के तीसरे चरण में पूरे प्रांत के संभागीय मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

मुख्य घटनाक्रम

सिंध पीपीपी के अध्यक्ष निसार खुहरो के नेतृत्व में आयोजित रैली में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां थामकर 'सिंध के पानी की चोरी बंद करो' जैसे नारे लगाए। पीपीपी के दक्षिण जिला अध्यक्ष जावेद नागोरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने रैली को संबोधित किया।

जल विवाद की जड़ें: 1991 का समझौता

खुहरो ने संघीय सरकार और इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (आईआरएसए) पर 1991 के जल बंटवारा समझौते को निष्पक्ष रूप से लागू न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चश्मा-झेलम लिंक नहर, तौंसा-पंजनद लिंक नहर और जलालपुर नहर के ज़रिए सिंध के हिस्से का पानी दूसरी दिशा में मोड़ा जा रहा है — और यह कानूनी व संवैधानिक आपत्तियों के बावजूद किया जा रहा है। खुहरो के अनुसार, ये लिंक नहरें केवल बाढ़ की आपात स्थिति में उपयोग के लिए बनाई गई थीं, परंतु इन्हें नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है।

सिंध की कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

खुहरो ने आरोप लगाया कि पानी के इस कथित मोड़ से सिंध की कृषि भूमि बंजर होती जा रही है, फसलें बर्बाद हो रही हैं और प्रांत को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना था कि पंजाब अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी ले रहा है, जबकि सिंध लगातार जल संकट झेल रहा है। उन्होंने कहा, 'जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है, और हम किसी को भी अपने लोगों का भविष्य छीनने नहीं देंगे।'

पार्टी की चेतावनी और आगे की रणनीति

पीपीपी ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन का तीसरा चरण शुरू होगा, जिसमें सिंध के सभी संभागीय मुख्यालयों पर व्यापक जन प्रदर्शन होंगे। जावेद नागोरी ने कहा, 'हमारा खून बह सकता है, लेकिन हम किसी को भी सिंध का पानी छीनने नहीं देंगे। सिंध के वैध जल अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष करेगी।' यह विवाद पाकिस्तान के अंतर-प्रांतीय जल राजनीति में एक नए और तीखे अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी प्रांतीय हितों के नाम पर संघीय सरकार पर दबाव बना रही है — यह दोहरी भूमिका उसकी रणनीतिक जटिलता को उजागर करती है। 1991 का जल समझौता तीन दशकों से विवादों में रहा है, और आईआरएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल नए नहीं हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन ठोस संवैधानिक सुधार की दिशा में जाएगा, या केवल चुनावी लामबंदी का औज़ार बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंध जल विवाद क्या है और पीपीपी क्यों विरोध कर रही है?
सिंध का आरोप है कि सिंधु नदी के पानी में उसके संवैधानिक हिस्से से उसे वंचित किया जा रहा है और पानी लिंक नहरों के ज़रिए ऊपरी प्रांतों की ओर मोड़ा जा रहा है। पीपीपी ने 1991 के जल बंटवारा समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 25 जुलाई को प्रांत भर में रैलियां निकालीं।
1991 का जल बंटवारा समझौता क्या है?
1991 में पाकिस्तान के चारों प्रांतों के बीच हुए इस समझौते के तहत सिंधु नदी के जल का प्रांतवार आवंटन तय किया गया था। सिंध पीपीपी का आरोप है कि इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (आईआरएसए) इस समझौते को निष्पक्ष रूप से लागू नहीं कर रही और सिंध को उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा।
कौन-सी नहरों पर सिंध को आपत्ति है?
पीपीपी नेता निसार खुहरो के अनुसार, चश्मा-झेलम लिंक नहर, तौंसा-पंजनद लिंक नहर और जलालपुर नहर के ज़रिए सिंध का पानी मोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि ये नहरें केवल बाढ़ की आपात स्थिति में उपयोग के लिए थीं, परंतु इन्हें नियमित रूप से चलाया जा रहा है।
पीपीपी आंदोलन का अगला चरण क्या होगा?
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन के तीसरे चरण में सिंध के सभी संभागीय मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर जन प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। 25 जुलाई की रैलियां इस आंदोलन के दूसरे चरण का हिस्सा थीं।
सिंध की कृषि पर जल संकट का क्या असर हो रहा है?
पीपीपी नेताओं के अनुसार, पानी की कमी से सिंध की कृषि भूमि बंजर हो रही है, फसलें प्रभावित हो रही हैं और प्रांत को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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