सिंध के जल अधिकारों पर पीपीपी का विरोध: 130 स्थानों पर रैलियां, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 25 जुलाई को सिंध प्रांत भर में 130 से अधिक स्थानों पर रैलियां निकालीं, जिसमें सिंधु नदी के जल के कथित अवैध मोड़ के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई। पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संघीय सरकार ने सिंध के संवैधानिक जल अधिकारों की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन के तीसरे चरण में पूरे प्रांत के संभागीय मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
सिंध पीपीपी के अध्यक्ष निसार खुहरो के नेतृत्व में आयोजित रैली में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां थामकर 'सिंध के पानी की चोरी बंद करो' जैसे नारे लगाए। पीपीपी के दक्षिण जिला अध्यक्ष जावेद नागोरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने रैली को संबोधित किया।
जल विवाद की जड़ें: 1991 का समझौता
खुहरो ने संघीय सरकार और इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (आईआरएसए) पर 1991 के जल बंटवारा समझौते को निष्पक्ष रूप से लागू न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चश्मा-झेलम लिंक नहर, तौंसा-पंजनद लिंक नहर और जलालपुर नहर के ज़रिए सिंध के हिस्से का पानी दूसरी दिशा में मोड़ा जा रहा है — और यह कानूनी व संवैधानिक आपत्तियों के बावजूद किया जा रहा है। खुहरो के अनुसार, ये लिंक नहरें केवल बाढ़ की आपात स्थिति में उपयोग के लिए बनाई गई थीं, परंतु इन्हें नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है।
सिंध की कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर
खुहरो ने आरोप लगाया कि पानी के इस कथित मोड़ से सिंध की कृषि भूमि बंजर होती जा रही है, फसलें बर्बाद हो रही हैं और प्रांत को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना था कि पंजाब अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी ले रहा है, जबकि सिंध लगातार जल संकट झेल रहा है। उन्होंने कहा, 'जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है, और हम किसी को भी अपने लोगों का भविष्य छीनने नहीं देंगे।'
पार्टी की चेतावनी और आगे की रणनीति
पीपीपी ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन का तीसरा चरण शुरू होगा, जिसमें सिंध के सभी संभागीय मुख्यालयों पर व्यापक जन प्रदर्शन होंगे। जावेद नागोरी ने कहा, 'हमारा खून बह सकता है, लेकिन हम किसी को भी सिंध का पानी छीनने नहीं देंगे। सिंध के वैध जल अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष करेगी।' यह विवाद पाकिस्तान के अंतर-प्रांतीय जल राजनीति में एक नए और तीखे अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।