22 जुलाई 2026
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क्वेटा जल संकट: छह महीने से नल सूखे, बलूचिस्तान का सिंध पर पानी चोरी का आरोप

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क्वेटा जल संकट: छह महीने से नल सूखे, बलूचिस्तान का सिंध पर पानी चोरी का आरोप

सारांश

क्वेटा के लाखों निवासी छह महीने से नल के पानी को तरस रहे हैं — और अब बलूचिस्तान के मंत्री सुक्कुर बैराज पर सड़क पर उतर आए हैं। आरोप है कि सिंध, 1991 के जल समझौते के तहत बलूचिस्तान का हक़ बनने वाला पानी मोड़ रहा है। यह अंतर-प्रांतीय तनाव पाकिस्तान के गहराते जल संकट का नया चेहरा है।

मुख्य बातें

क्वेटा के कई इलाकों में छह महीनों से नल का पानी नहीं; WASA की आपूर्ति बड़े हिस्से में ठप।
सरिएब, सिरकी रोड, जिन्ना टाउन सहित आठ इलाकों के निवासी सबसे ज़्यादा प्रभावित; बुजुर्ग और बच्चे पानी के लिए पैदल दूरी तय करने को मजबूर।
18 जुलाई को बलूचिस्तान के तीन मंत्री सुक्कुर बैराज पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल; सिंध पर पानी मोड़ने का आरोप।
मंत्री मोहम्मद सादिक उमरानी ने कहा — खिरथर नहर से 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से 6,700 क्यूसेक पानी का पूरा आवंटन नहीं मिल रहा।
मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने सिंध से बातचीत के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की।
सिंध सिंचाई विभाग का दावा — बलूचिस्तान को आवंटन से अधिक पानी मिल रहा; बलूचिस्तान ने इसे खारिज किया।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा इस समय गंभीर जल संकट की चपेट में है। 22 जुलाई को स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शहर में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है और वॉटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (WASA) की सरकारी जलापूर्ति कई इलाकों में पूरी तरह ठप हो गई है या नाममात्र रह गई है। इसी बीच, 18 जुलाई को सिंध और बलूचिस्तान के बीच जल बँटवारे को लेकर विवाद और गहरा गया, जब बलूचिस्तान के तीन मंत्री सुक्कुर बैराज पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

कौन-से इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित

रिपोर्टों के अनुसार, सरिएब, सिरकी रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरनी रोड, सैटेलाइट टाउन, सब्जल रोड और खयाबान-ए-आगा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के निवासी पानी की भीषण कमी से जूझ रहे हैं। हालात इतने विकट हैं कि बुजुर्ग, महिलाएँ और छोटे बच्चे तक पानी लाने के लिए पैदल लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि उनके घरों में पिछले छह महीनों से नल का पानी नहीं आया है। इसके बावजूद वे नियमित रूप से WASA के बिल चुकाते रहे हैं। बार-बार शिकायत करने पर भी अधिकारियों की तरफ से केवल आश्वासन मिलता रहा, समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।

सिंध पर पानी मोड़ने का आरोप

बलूचिस्तान के मंत्रियों ने सुक्कुर बैराज पर आयोजित प्रदर्शन में आरोप लगाया कि सिंध सरकार बलूचिस्तान के हिस्से का पानी कथित तौर पर मोड़ रही है। उन्होंने माँग की कि सिंध में बिना अनुमति बनाए गए रास्तों के ज़रिए हो रही कथित जल-चोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। लरकाना डिवीजन के किसानों ने भी इस प्रदर्शन में बलूचिस्तान के किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाया।

1991 के जल समझौते का हवाला

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बलूचिस्तान के मंत्री मोहम्मद सादिक उमरानी ने कहा कि 1991 के जल समझौते के तहत बलूचिस्तान को उसका पूरा हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रांत को खिरथर नहर से मिलने वाले 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से मिलने वाले 6,700 क्यूसेक पानी का पूरा आवंटन नहीं मिल रहा। उमरानी ने चेताया कि पानी की कमी के कारण बलूचिस्तान के किसान फसल बुवाई के सबसे अहम मौसम में सिंचाई नहीं कर पा रहे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

वहीं, मंत्री सलीम अहमद खोसो ने कहा कि सिंध सिंचाई विभाग के अधिकारी दावा करते हैं कि बलूचिस्तान को उसके आवंटन से अधिक पानी मिल रहा है, लेकिन बलूचिस्तान की समिति ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। खोसो ने कहा कि जमीनी हालात इस दावे की पोल खोलते हैं और प्रांत इस समस्या का स्थायी समाधान चाहता है ताकि हर साल सड़कों पर उतरने की नौबत न आए।

सरकारी स्तर पर पहल

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सिंध सरकार से बातचीत हेतु एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति में मंत्री मोहम्मद सादिक उमरानी, सलीम अहमद खोसो और मोहम्मद खान लेहरी शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के कई प्रांत जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी के दबाव में पानी की कमी से जूझ रहे हैं, और अंतर-प्रांतीय जल विवाद लगातार पेचीदा होते जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

गठित समिति और सिंध सरकार के बीच वार्ता के नतीजे पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं। यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो बुवाई के मौसम में देरी से बलूचिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। क्वेटा में WASA की जलापूर्ति बहाल करना भी प्रशासन के लिए तत्काल चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जवाबदेही किसकी है — प्रांत की, केंद्र की, या उस समझौते की जिसे लागू करने का कोई विश्वसनीय ढाँचा ही नहीं है? बलूचिस्तान और सिंध के बीच यह विवाद पाकिस्तान के व्यापक संघीय संकट का प्रतिबिंब है, जहाँ संसाधन बँटवारे की हर बातचीत राजनीतिक दाँव-पेच में उलझ जाती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वेटा में जल संकट कितना गंभीर है?
क्वेटा के कई इलाकों में पिछले छह महीनों से नल का पानी पूरी तरह बंद है। WASA की सरकारी आपूर्ति या तो ठप हो गई है या नाममात्र रह गई है, और निवासी — जिनमें बुजुर्ग व बच्चे भी शामिल हैं — पानी के लिए पैदल लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।
बलूचिस्तान और सिंध के बीच पानी का विवाद क्या है?
बलूचिस्तान का आरोप है कि सिंध, 1991 के जल समझौते के तहत बलूचिस्तान को मिलने वाला पानी कथित तौर पर मोड़ रहा है। खिरथर नहर से 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से 6,700 क्यूसेक पानी का पूरा आवंटन नहीं मिल रहा। सिंध सिंचाई विभाग इस आरोप को खारिज करता है।
1991 का जल समझौता क्या है?
1991 का जल समझौता पाकिस्तान के प्रांतों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बँटवारे को तय करने वाला समझौता है। इसके तहत प्रत्येक प्रांत को एक निश्चित मात्रा में पानी आवंटित किया गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर अंतर-प्रांतीय विवाद लगातार बने रहते हैं।
बलूचिस्तान सरकार ने इस संकट पर क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने सिंध सरकार से बातचीत के लिए मंत्रियों मोहम्मद सादिक उमरानी, सलीम अहमद खोसो और मोहम्मद खान लेहरी की तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति स्थायी समाधान की माँग कर रही है ताकि हर साल विरोध प्रदर्शन की नौबत न आए।
इस जल संकट का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
बलूचिस्तान के किसान फसल बुवाई के सबसे अहम मौसम में सिंचाई नहीं कर पा रहे, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। लरकाना डिवीजन के किसान भी इस संकट से प्रभावित हैं और उन्होंने बलूचिस्तान के किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन किया।
राष्ट्र प्रेस
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