तीस्ता परियोजना से सिंधु जल संधि तक: विदेश मंत्रालय ने 3 जुलाई को स्पष्ट किया भारत का रुख
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को एक साथ कई अहम विदेश नीति मुद्दों पर भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की — जिनमें बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना, पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (IWT) का निलंबन, विदेशों में कांसुलर सेवाओं की स्थिति और अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा शामिल है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में ये बातें कहीं।
तीस्ता परियोजना पर भारत का रुख
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत पहले ही बांग्लादेश को अपनी स्थिति से अवगत करा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं के लिए भारत की सहायता दोनों देशों के बीच तय रोडमैप के अनुसार दी जाती है और इसकी नियमित समीक्षा होती रहती है। जायसवाल ने कहा, 'अब इस मुद्दे से जुड़े सभी नए घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए भारत आगे अपनी रणनीति तय करेगा।' गौरतलब है कि तीस्ता जल-बँटवारे का मुद्दा वर्षों से भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु रहा है।
सिंधु जल संधि: पाकिस्तान पर सख्त शर्त
1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को लेकर प्रवक्ता ने दोहराया कि यह संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेगी। उन्होंने कहा कि यह तब तक लागू नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और स्थायी तरीके से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही गहरे तनाव में हैं और सिंधु जल संधि का निलंबन नई दिल्ली की कड़ी कूटनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
कांसुलर सेवाएँ: दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश का इंतजार
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया, कुवैत और यूएई में भारतीय मिशन फिलहाल सीमित कांसुलर सेवाएँ दे रहे हैं। इन देशों में कांसुलर सेवाओं में सहयोग करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी का काम रोक दिया गया है, क्योंकि यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार न्यायालय के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रही है।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हमलों की निंदा
जायसवाल ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत ने अफगानिस्तान की अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपना मजबूत समर्थन दोहराया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत का मानवीय सहायता सहयोग जारी है और वह अफगानिस्तान में विकास परियोजनाएँ भी चला रहा है, जिनसे वहाँ के लोगों के जीवन में सुधार हो सके।
आगे क्या
भारत की ये स्पष्टवादी घोषणाएँ संकेत देती हैं कि नई दिल्ली अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में शर्त-आधारित कूटनीति की नीति पर चल रही है। तीस्ता परियोजना पर नए घटनाक्रमों की समीक्षा और सिंधु जल संधि के निलंबन की समीक्षा आने वाले महीनों में भारत की विदेश नीति की दिशा तय करेगी।