16 जुलाई 2026
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होर्मुज पर 'ईरानी व्यवस्था' कायम रहेगी, दुश्मन की इच्छा नहीं चलेगी: गालिबाफ; अमेरिका ने दूसरे चरण के हमले शुरू किए

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होर्मुज पर 'ईरानी व्यवस्था' कायम रहेगी, दुश्मन की इच्छा नहीं चलेगी: गालिबाफ; अमेरिका ने दूसरे चरण के हमले शुरू किए

सारांश

होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण को लेकर गालिबाफ का कड़ा रुख और अमेरिकी सेना के दूसरे चरण के हमलों ने 18 जून के शांति एमओयू को गहरे संकट में डाल दिया है। 60 दिनों की वार्ता अवधि अब अनिश्चितता के दौर में है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराता खतरा बढ़ता जा रहा है।

मुख्य बातें

ईरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 16 जुलाई को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में 'ईरानी व्यवस्था' बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है।
गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहेगा।
18 जून को हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान एमओयू में 60 दिनों की वार्ता अवधि थी, जो अब अनिश्चितता में है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के सैन्य हमलों की पुष्टि की।
सेंटकॉम के अनुसार, हमलों का लक्ष्य ईरान की वे सैन्य क्षमताएँ हैं जो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बनती हैं।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 16 जुलाई को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रशासन में 'ईरानी व्यवस्था' को बनाए रखना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है और तेहरान किसी भी 'दुश्मन' को अपनी शर्तें ईरान पर थोपने की इजाज़त नहीं देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के सैन्य हमलों की पुष्टि की है।

गालिबाफ का बयान: युद्ध नहीं, लेकिन तैयारी ज़रूरी

बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में गालिबाफ — जो ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख भी हैं — ने कहा कि अमेरिका हर मौके पर ईरान को नुकसान पहुँचाकर अपने हित साधने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा, 'युद्ध हो या वार्ता, ईरान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों, यथार्थवादी सोच और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर ही कदम उठाने चाहिए।'

गालिबाफ ने यह भी कहा कि ईरान युद्ध का स्वागत नहीं करता, 'लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हमें हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।' उन्होंने ज़ोर दिया कि कूटनीति और सैन्य तैयारी को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

एमओयू पर सवाल: शर्तें न मानी तो समझौता बेमानी

गालिबाफ ने 18 जून को हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एमओयू तभी सार्थक है जब इसकी शर्तों का सम्मान किया जाए — यदि ईरान को इससे कोई लाभ नहीं मिलता, तो उसके लिए इस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं बनता।

गौरतलब है कि इस एमओयू का उद्देश्य लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर जारी संघर्ष को समाप्त करना था। हालाँकि, पिछले कुछ दिनों में ईरानी और अमेरिकी बलों के बीच हुई झड़पों ने इस समझौते को गहरी अनिश्चितता में धकेल दिया है।

अमेरिका के दूसरे चरण के हमले

सेंटकॉम ने गुरुवार तड़के (भारतीय समयानुसार) अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि 'दोपहर 3 बजे ईटी (1900 जीएमटी) अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हमले शुरू किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जाता है।'

क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर

यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे दुनिया के कच्चे तेल का करीब 20% गुजरता है — पर नियंत्रण को लेकर तनाव अपने चरम पर है। किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच वार्ता और सैन्य कार्रवाई का यह समानांतर चलना स्थिति को और जटिल बनाता है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या 60 दिनों की वार्ता अवधि के भीतर दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते तक पहुँच पाते हैं, या क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दोनों पक्षों की 'वार्ता के साथ दबाव' की नीति इस संकट को और लंबा खींच सकती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गालिबाफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या कहा?
ईरान संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रशासन में 'ईरानी व्यवस्था' बनाए रखना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा है और कोई भी दुश्मन ईरान पर अपनी इच्छा नहीं थोप सकता। उन्होंने कूटनीति और सैन्य तैयारी को साथ-साथ चलाने पर ज़ोर दिया।
अमेरिका ने ईरान पर दूसरे चरण के हमले क्यों किए?
सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करती हैं। हमले गुरुवार को दोपहर 3 बजे ईटी (1900 जीएमटी) शुरू हुए।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और यह संकट में क्यों है?
18 जून को हस्ताक्षरित इस शांति समझौता ज्ञापन का उद्देश्य लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करना था और इसमें 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित थी। हालाँकि, पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच झड़पों और अमेरिकी हमलों के बाद यह समझौता गहरी अनिश्चितता में पड़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कच्चे तेल का करीब 20% गुजरता है, इसलिए यहाँ किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ता है। इसीलिए इस क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है।
ईरान और अमेरिका के बीच आगे क्या होने की संभावना है?
गालिबाफ के अनुसार, यदि एमओयू की शर्तों का पालन नहीं होता तो ईरान के लिए इस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं है। 60 दिनों की वार्ता अवधि के भीतर किसी ठोस समझौते की संभावना अब अनिश्चित दिखती है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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