होर्मुज पर 'ईरानी व्यवस्था' कायम रहेगी, दुश्मन की इच्छा नहीं चलेगी: गालिबाफ; अमेरिका ने दूसरे चरण के हमले शुरू किए
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 16 जुलाई को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रशासन में 'ईरानी व्यवस्था' को बनाए रखना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है और तेहरान किसी भी 'दुश्मन' को अपनी शर्तें ईरान पर थोपने की इजाज़त नहीं देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के सैन्य हमलों की पुष्टि की है।
गालिबाफ का बयान: युद्ध नहीं, लेकिन तैयारी ज़रूरी
बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में गालिबाफ — जो ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख भी हैं — ने कहा कि अमेरिका हर मौके पर ईरान को नुकसान पहुँचाकर अपने हित साधने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा, 'युद्ध हो या वार्ता, ईरान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों, यथार्थवादी सोच और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर ही कदम उठाने चाहिए।'
गालिबाफ ने यह भी कहा कि ईरान युद्ध का स्वागत नहीं करता, 'लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हमें हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।' उन्होंने ज़ोर दिया कि कूटनीति और सैन्य तैयारी को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक है।
एमओयू पर सवाल: शर्तें न मानी तो समझौता बेमानी
गालिबाफ ने 18 जून को हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एमओयू तभी सार्थक है जब इसकी शर्तों का सम्मान किया जाए — यदि ईरान को इससे कोई लाभ नहीं मिलता, तो उसके लिए इस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं बनता।
गौरतलब है कि इस एमओयू का उद्देश्य लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर जारी संघर्ष को समाप्त करना था। हालाँकि, पिछले कुछ दिनों में ईरानी और अमेरिकी बलों के बीच हुई झड़पों ने इस समझौते को गहरी अनिश्चितता में धकेल दिया है।
अमेरिका के दूसरे चरण के हमले
सेंटकॉम ने गुरुवार तड़के (भारतीय समयानुसार) अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि 'दोपहर 3 बजे ईटी (1900 जीएमटी) अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ दूसरे चरण के हमले शुरू किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जाता है।'
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे दुनिया के कच्चे तेल का करीब 20% गुजरता है — पर नियंत्रण को लेकर तनाव अपने चरम पर है। किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच वार्ता और सैन्य कार्रवाई का यह समानांतर चलना स्थिति को और जटिल बनाता है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या 60 दिनों की वार्ता अवधि के भीतर दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते तक पहुँच पाते हैं, या क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा होता है।