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बिम्सटेक सुरक्षा बैठक में डोभाल बोले — 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' विजन का प्रतीक है यह मंच

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बिम्सटेक सुरक्षा बैठक में डोभाल बोले — 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' विजन का प्रतीक है यह मंच

सारांश

बिम्सटेक की 5वीं सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में NSA डोभाल ने भारत की तीन प्रमुख विदेश नीतियों — 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' विजन — को एक साथ पिरोया। 1.7 अरब की आबादी और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले इस मंच को भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा की धुरी बताया।

मुख्य बातें

NSA अजीत डोभाल ने 16 जुलाई को नई दिल्ली में बिम्सटेक सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक को संबोधित किया।
डोभाल ने बिम्सटेक को भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' , 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'महासागर' विजन का प्रतिनिधि मंच बताया।
बिम्सटेक सदस्य देशों की कुल आबादी 1.7 अरब (विश्व की 22% ) और संयुक्त अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर ।
आतंकवाद , साइबर खतरों , समुद्री सुरक्षा और संगठित अपराध पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के बीच क्षेत्रीय सहयोग को अनिवार्य बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 16 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह मंच भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति, 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'महासागर' विजन का सजीव प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विजन क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति पर टिका है।

भारत की नीतियों का प्रतिबिंब

डोभाल ने अपने संबोधन में कहा, "भारत के लिए बिम्सटेक 'नेबरहुड फर्स्ट' की हमारी सोच, 'एक्ट ईस्ट' नीति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और 'महासागर' विजन का प्रतिनिधित्व करता है।" उन्होंने जोर दिया कि इस मंच का उद्देश्य सभी सदस्य देशों के लिए साझा समृद्धि और लचीलेपन के साथ एक बेहतर भविष्य गढ़ना है।

गौरतलब है कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, जबकि 'एक्ट ईस्ट' नीति दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक जुड़ाव को बढ़ावा देती है।

वैश्विक चुनौतियों का संदर्भ

एनएसए ने कहा, "हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब दुनिया संघर्षों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। तेज तकनीकी प्रगति के कारण बहु-आयामी सुरक्षा चुनौतियाँ और गंभीर हो गई हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण हमारे सभी देशों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।" उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में सहयोग बढ़ाना, आपसी हितों के लिए निर्णायक कदम उठाना और साझा चुनौतियों का समाधान निकालना बेहद ज़रूरी है।

बिम्सटेक की आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत

डोभाल ने बताया कि बिम्सटेक हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण और गतिशील भागों को एकजुट करता है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की कुल आबादी 1.7 अरब है, जो विश्व की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या है, और इन देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था करीब 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की खाड़ी न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से भी सदस्य देशों को जोड़ती है।

सुरक्षा सहयोग के दीर्घकालिक लक्ष्य

डोभाल ने रेखांकित किया कि बिम्सटेक देशों ने आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर खतरों और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने में आपसी सहयोग को पहले से मजबूत किया है। उन्होंने कहा, "बिम्सटेक के क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क (कनेक्टिविटी), क्षमता निर्माण और आर्थिक सुरक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्य हमारी सामूहिक कोशिशों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।" यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचों की प्रासंगिकता बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' — तीनों नीतियों को एक ही मंच पर केंद्रित करना यह दर्शाता है कि भारत बिम्सटेक को SAARC के विकल्प के रूप में गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है, जो पाकिस्तान की वजह से वर्षों से ठप पड़ा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि बिम्सटेक की संस्थागत क्षमता और क्रियान्वयन तंत्र अभी भी कमज़ोर है — घोषणाएँ महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन ज़मीनी परिणाम सीमित रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या यह मंच साइबर सुरक्षा और समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में बाध्यकारी सहयोग ढाँचा विकसित कर पाता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिम्सटेक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक क्या है?
यह बिम्सटेक सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं उच्चस्तरीय बैठक है, जो 16 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क, साइबर खतरों और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति का बिम्सटेक से क्या संबंध है?
'नेबरहुड फर्स्ट' नीति पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देती है, जबकि 'एक्ट ईस्ट' दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव को बढ़ावा देती है। NSA डोभाल के अनुसार, बिम्सटेक इन दोनों नीतियों के साथ-साथ 'महासागर' विजन को एक साथ साकार करने का मंच है।
बिम्सटेक देशों की आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत कितनी है?
बिम्सटेक सदस्य देशों की कुल आबादी 1.7 अरब है, जो विश्व की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या है। इन देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था करीब 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की है।
बिम्सटेक किन सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करता है?
डोभाल के अनुसार, बिम्सटेक देश आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर खतरों और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। भविष्य की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी सामूहिक तैयारी पर जोर दिया गया।
बंगाल की खाड़ी का बिम्सटेक में क्या महत्व है?
बंगाल की खाड़ी बिम्सटेक सदस्य देशों को न केवल भौगोलिक रूप से जोड़ती है, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से भी। डोभाल ने इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को बिम्सटेक के मजबूत सहयोग की नींव बताया।
राष्ट्र प्रेस
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