16 जुलाई 2026
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सोनू निगम की जगन्नाथ रथयात्रा में पहली हाज़िरी, बोले — 'सालों का सपना आज पूरा हुआ'

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सोनू निगम की जगन्नाथ रथयात्रा में पहली हाज़िरी, बोले — 'सालों का सपना आज पूरा हुआ'

सारांश

सालों तक भगवान जगन्नाथ के भजन गाने वाले सोनू निगम ने पहली बार पुरी में रथयात्रा के सजीव दर्शन किए और भावुक हो उठे। 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह यात्रा आस्था और समरसता का अनूठा संगम बनी।

मुख्य बातें

गायक सोनू निगम ने 16 जुलाई 2025 को पुरी में पहली बार जगन्नाथ रथयात्रा के सजीव दर्शन किए।
भगवान जगन्नाथ आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को बलभद्र और सुभद्रा संग गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं।
इस वर्ष पुरी में 25 लाख से अधिक श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल हुए।
BJP सांसद तरुण चुघ अपनी माता जी के साथ यात्रा में सम्मिलित हुए और व्यवस्थाओं की सराहना की।
मंदिर के वरिष्ठ सेवक जगन्नाथ स्वाईं महापात्र ने रथयात्रा को समानता और विश्वबंधुत्व का प्रतीक बताया।

प्रसिद्ध गायक सोनू निगम ने 16 जुलाई 2025 को पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के पहले सजीव दर्शन किए — एक ऐसी इच्छा जो वर्षों से उनके मन में थी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने अग्रज बलभद्र और भगिनी सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर — अपनी मौसी के घर — के लिए प्रस्थान करते हैं। इस वर्ष 25 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी की सड़कों पर उमड़े।

मुख्य घटनाक्रम

जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ सेवक जगन्नाथ स्वाईं महापात्र ने बताया कि वार्षिक रथयात्रा एक अनूठा अवसर है, जब भगवान जगन्नाथ गर्भगृह से बाहर निकलकर सभी भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा समानता और विश्वबंधुत्व की भावना का जीवंत प्रतीक है।

सोनू निगम की भावुक प्रतिक्रिया

सोनू निगम ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'मुझे जीवन में पहली बार यहाँ आने का मौका मिला है। मैंने अपने करियर में भगवान के लिए कई भजन गाए हैं, लेकिन इस अद्भुत नज़ारे को अपनी आँखों से देखने का मौका मुझे अब मिला है। मुझे इसके लिए बुलाया भी गया और मेरी खुद भी इच्छा थी कि मैं जगन्नाथ रथयात्रा के दर्शन कर सकूँ। आज मेरा वह सपना सच में पूरा हो गया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे सालों से इस रथयात्रा के बारे में सब कुछ जानते थे, पर इसे सामने से देखने का सौभाग्य उन्हें पहली बार मिला।

BJP सांसद का उत्साह

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तरुण चुघ अपनी माता जी के साथ इस यात्रा में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा, 'आज भगवान जगन्नाथ अपने परिवार के साथ अपनी मौसी के घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। यह एक अद्भुत और दिव्य दृश्य है। पुरी की सड़कों पर 25 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु मौजूद हैं। ऊपर से बरसात का पानी और भगवान के दर्शन — यह अध्यात्मिक वातावरण अतुलनीय है।' उन्होंने व्यवस्थाओं की भी सराहना की और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद सभी जगह इंतज़ाम सुचारू रहे।

आम जनता पर असर

यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। गौरतलब है कि जगन्नाथ रथयात्रा में जाति-धर्म का भेद नहीं होता — हर कोई रथ की रस्सी थाम सकता है। वर्षा के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस आयोजन की अटूट आस्था को दर्शाती है।

क्या होगा आगे

भगवान जगन्नाथ परंपरा के अनुसार कुछ दिन गुंडिचा मंदिर में विराजेंगे और उसके बाद 'बहुड़ा यात्रा' के रूप में वापस जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे। यह पूरा उत्सव ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है और प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस आयोजन की असली ताकत उन 25 लाख आम श्रद्धालुओं में है जो बारिश की परवाह किए बिना उमड़ते हैं। यह यात्रा उस सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है जो किसी सेलिब्रिटी की मौजूदगी की मोहताज नहीं। साथ ही, इतने बड़े जनसमागम में सुचारू व्यवस्था ओडिशा प्रशासन की तैयारी का संकेत देती है — जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ रथयात्रा 2025 कब और कहाँ हुई?
जगन्नाथ रथयात्रा 2025 का आरंभ 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर हुआ। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर के लिए रथ पर प्रस्थान करते हैं।
सोनू निगम पहली बार जगन्नाथ रथयात्रा में क्यों शामिल हुए?
सोनू निगम के अनुसार, वे वर्षों से पुरी आकर रथयात्रा देखना चाहते थे। उन्हें इस वर्ष आमंत्रण भी मिला और उनकी अपनी इच्छा भी थी, इसलिए 16 जुलाई को उन्होंने पहली बार सजीव दर्शन किए।
इस वर्ष रथयात्रा में कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
BJP सांसद तरुण चुघ के अनुसार, इस वर्ष पुरी की सड़कों पर 25 लाख से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह अटूट रहा।
जगन्नाथ रथयात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?
मंदिर के वरिष्ठ सेवक जगन्नाथ स्वाईं महापात्र के अनुसार, यह यात्रा वह अनूठा अवसर है जब भगवान जगन्नाथ गर्भगृह से बाहर आकर सभी भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। यह समानता और विश्वबंधुत्व का प्रतीक मानी जाती है।
रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ कब वापस लौटते हैं?
भगवान जगन्नाथ कुछ दिन गुंडिचा मंदिर में विराजने के बाद 'बहुड़ा यात्रा' के रूप में जगन्नाथ मंदिर वापस लौटते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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