फेड चेयरमैन केविन वार्श का ऐलान: महंगाई एक विकल्प है, 5 टास्क फोर्स से होगी मौद्रिक समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने 16 जुलाई को वाशिंगटन में सीनेट बैंकिंग समिति के समक्ष अपनी अर्धवार्षिक मौद्रिक नीति सुनवाई में स्पष्ट किया कि महंगाई कोई अपरिहार्य स्थिति नहीं, बल्कि एक नीतिगत विकल्प है — और उनके नेतृत्व में लगातार ऊँची कीमतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। पदभार संभालने के सात सप्ताह बाद पहली बार कांग्रेस के सामने पेश हुए वार्श ने मूल्य स्थिरता को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया।
मुख्य घोषणाएँ और नीतिगत रुख
वार्श ने सांसदों के सामने कहा, 'जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं और आज भी कह रहा हूं, महंगाई एक विकल्प है। हमारी समिति के सदस्य लगातार ऊंची महंगाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और हम कीमतों में स्थिरता बहाल करने के लिए पूरी दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं।' उन्होंने बताया कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी हालिया बैठक में फेडरल फंड्स रेट को 3.5% से 3.75% के दायरे में अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया।
पाँच टास्क फोर्स का गठन
वार्श ने घोषणा की कि फेडरल रिजर्व ने पाँच विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। ये टास्क फोर्स क्रमशः संचार व्यवस्था, बैलेंस शीट नीति, आर्थिक आंकड़े, उत्पादकता एवं रोजगार, तथा महंगाई से जुड़े नीतिगत ढाँचे की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि इन समीक्षाओं का उद्देश्य नीति-निर्माण को अधिक प्रभावी बनाना है, क्योंकि पिछले 63 महीनों से महंगाई फेड के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति: मजबूती और चुनौतियाँ
वार्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से मजबूत बताया। उनके अनुसार आर्थिक गतिविधि अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है, घरेलू उपभोग स्थिर है और इस वर्ष मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में सुधार देखा गया है। हालांकि, उन्होंने माना कि हाउसिंग सेक्टर अभी भी पिछड़ा हुआ है। उनके अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यावसायिक निवेश इस समय अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त चालक बनकर उभरा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस
सुनवाई के दौरान कई डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने तर्क दिया कि महंगाई का एक बड़ा कारण सप्लाई में बाधाएँ हैं — जिनमें ऊर्जा की ऊँची कीमतें और टैरिफ नीति शामिल हैं। सीनेटर क्रिस वैन हॉलन ने बढ़ती लागतों के लिए ईरान से जुड़े विवाद और टैरिफ नीति को जिम्मेदार ठहराया। इस पर वार्श ने स्वीकार किया कि ऐसी घटनाएँ कुछ वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन यह केंद्रीय बैंक की व्यापक मूल्य स्थिरता की जिम्मेदारी को कम नहीं करतीं।
वैश्विक बाजारों पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर के वित्तीय बाजार फेडरल रिजर्व की हर नीतिगत हलचल पर बारीक नजर रख रहे हैं। अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर वैश्विक उधारी लागत, पूंजी प्रवाह और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधे पड़ता है — जिसमें भारत जैसे उभरते बाजार भी शामिल हैं। वार्श ने स्पष्ट किया कि फेड ब्याज दर नीति और बैलेंस शीट — दोनों को मौद्रिक नीति के प्रमुख औजार के रूप में सक्रिय रूप से इस्तेमाल करेगा। गौरतलब है कि फेडरल रिजर्व ने कोविड-19 महामारी के बाद महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को ऊँचे स्तर पर बनाए रखा है, और अब नीति-निर्माता महंगाई नियंत्रण तथा मजबूत श्रम बाजार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।