अमेरिकी फेड ने चौथी बार दरें स्थिर रखीं, विशेषज्ञों ने कहा — गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश का सुनहरा मौका
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 18 जून 2025 को लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर बनाए रखा। नए आर्थिक अनुमानों से संकेत मिला है कि दरें लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक बाज़ारों में हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति भारतीय निवेशकों के लिए मज़बूत और गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में प्रवेश का अवसर लेकर आई है।
फेड का रुख और नए आर्थिक अनुमान
यह बैठक नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में पहली थी। फेड के नीति-निर्माताओं में मतभेद बने हुए हैं — लगभग आधे सदस्य इस वर्ष कम से कम एक और बार दर वृद्धि के पक्ष में हैं। महंगाई के बढ़े हुए अनुमान और जीडीपी वृद्धि के कमज़ोर अनुमान यह दर्शाते हैं कि फेड की प्राथमिकता अभी भी मुद्रास्फीति नियंत्रण है, भले ही इससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़े। फेड ने संकेत दिया है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए इस वर्ष बाद में 0.25% की अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है।
भारतीय बाज़ार पर असर और विशेषज्ञ राय
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च प्रमुख राजेश पलविया ने कहा कि वैश्विक शेयर बाज़ारों के लिए फेड का संदेश कुछ हद तक सख्त (हॉकिश) है, क्योंकि ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें और आगे खिसक गई हैं। उन्होंने कहा, "भारतीय शेयर बाज़ार के लिए निवेश का बुनियादी आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, कंपनियों के अच्छे नतीजे, एसआईपी के ज़रिए लगातार निवेश और सरकार द्वारा बढ़ाया जा रहा पूंजीगत खर्च भारतीय बाज़ार को समर्थन दे रहे हैं।"
पलविया के अनुसार, निकट अवधि में बाज़ार की दिशा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह और रुपए की चाल से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर नकदी की उपलब्धता अभी भी सीमित है। उनका सुझाव है कि फेड के रुख से यदि बाज़ार में अस्थिरता आती है, तो इसे मध्यम और लंबी अवधि के नज़रिए से मज़बूत कंपनियों में निवेश के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी बाज़ारों में गिरावट, तकनीकी शेयर प्रभावित
फेड के फैसले के बाद बुधवार को अमेरिकी शेयर बाज़ारों में गिरावट दर्ज की गई और सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों (यील्ड) में तेज़ बढ़ोतरी हुई। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स, अल्फाबेट और अमेज़न जैसे प्रमुख तकनीकी शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। गौरतलब है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई जब वैश्विक निवेशक पहले से ही उच्च ब्याज दरों के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर सतर्क थे।
होर्मुज़ और भू-राजनीतिक उम्मीद से बाज़ार को सहारा
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह ने बताया कि फेड की गिरावट के बाद अमेरिकी शेयर वायदा बाज़ार में फिर से तेज़ी देखी जा रही है। उन्होंने कहा, "निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही शांति समझौता हो सकता है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है। इसी उम्मीद ने बाज़ार को नया सहारा दिया है।" यह भू-राजनीतिक घटनाक्रम वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और ऊर्जा बाज़ारों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों की राय है कि जब तक फेड की दर-कटौती की समयसीमा स्पष्ट नहीं होती, भारतीय बाज़ार में FII प्रवाह और मुद्रा की अस्थिरता बनी रह सकती है। हालाँकि, घरेलू मज़बूती — विशेष रूप से SIP निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय — बाज़ार को नीचे से थाम सकती है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह चरण चुनिंदा, उच्च-गुणवत्ता वाले शेयरों में संचय का अनुकूल समय माना जा रहा है।