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RBI ने रेपो रेट स्थिर रखा: विशेषज्ञों का कहना है दीर्घकालिक विकास की राह मजबूत

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RBI ने रेपो रेट स्थिर रखा: विशेषज्ञों का कहना है दीर्घकालिक विकास की राह मजबूत

सारांश

RBI ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखा — विशेषज्ञों ने इसे संतुलित कदम बताया। लेकिन मानसून की कमज़ोरी, ऊर्जा कीमतें और भू-राजनीतिक जोखिम GDP संभावनाओं पर दबाव बना सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार महंगाई 5.9% छूने पर साल के अंत तक एक-दो बार दर बढ़ोतरी संभव।

मुख्य बातें

RBI ने 5 जून 2026 को नीतिगत रेपो दर अपरिवर्तित रखी; विशेषज्ञों ने इसे वित्तीय स्थिरता के अनुकूल बताया।
महंगाई अभी RBI के लक्ष्य 4 प्रतिशत के करीब है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम वित्त वर्ष 2026-27 की GDP वृद्धि पर असर डाल सकते हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार महंगाई 5.9% पहुँची तो साल के अंत तक एक-दो बार दर बढ़ोतरी संभव।
इंडियन बैंक के MD एवं CEO बिनोद कुमार ने खुदरा, कृषि और MSME क्षेत्रों में माँग बढ़ने का अनुमान जताया।
LIC हाउसिंग फाइनेंस के CEO त्रिभुवन अधिकारी ने कहा — स्थिर दरें आवास क्षेत्र की माँग को सहारा देंगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के निर्णय को अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों ने 5 जून 2026 को वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक संतुलित कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला मध्यम और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की संभावनाओं को बनाए रखने में सहायक होगा।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि मौद्रिक नीति का यह निर्णय अर्थव्यवस्था के समक्ष विद्यमान जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद RBI के इस कदम ने विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।

PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि महंगाई अभी भी RBI के निर्धारित लक्ष्य — 4 प्रतिशत — के करीब बनी हुई है। हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की GDP वृद्धि संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। फिर भी उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बनाए रखती है।

जोखिम और चेतावनियाँ

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि आपूर्ति संबंधी झटके, ऊर्जा की ऊँची कीमतें और सामान्य से कमज़ोर मानसून आर्थिक विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने अनुमान जताया कि यदि महंगाई बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुँचती है, तो इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।

सबनवीस ने कहा, 'हम इस साल एक से दो बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि मानसून का असर पड़ सकता है, हालाँकि फिलहाल उसे कुछ हद तक संतुलित कर लिया गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा के ज़रिये विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के RBI के व्यापक कदम 'सकारात्मक आश्चर्य' की तरह हैं।

बैंकिंग क्षेत्र की प्रतिक्रिया

इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने रुपये को स्थिर बनाए रखने के उपायों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'भू-राजनीतिक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है और वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।' बिनोद कुमार के अनुसार खुदरा, कृषि और MSME क्षेत्रों में माँग लगातार बढ़ती रहेगी क्योंकि आर्थिक स्थिति सुधारने वाली नीतियाँ लागू की जा रही हैं।

आवास क्षेत्र पर असर

LIC हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिभुवन अधिकारी ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल आवास क्षेत्र की माँग को सहारा देगा। उनके अनुसार मौजूदा दर व्यवस्था जारी रहने से उधारकर्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, ऋण प्रवाह में सुधार होगा और विभिन्न बाज़ारों में आवास माँग को मजबूती मिलेगी।

आगे क्या

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक दरों पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। गौरतलब है कि RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के नतीजे और मानसून की प्रगति आगामी महीनों में नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस असली सवाल को टालता है — क्या मौद्रिक स्थिरता अकेले विकास की गारंटी दे सकती है जब राजकोषीय प्रोत्साहन सीमित हो? मदन सबनवीस की दर-बढ़ोतरी की चेतावनी महत्वपूर्ण है: यदि मानसून कमज़ोर रहा और महंगाई 5.9% के पार गई, तो RBI उस ब्याज दर चक्र में लौट सकता है जिससे वह अभी बाहर निकला है। गौरतलब है कि MSME और आवास क्षेत्र की राहत स्थिर दरों पर टिकी है — किसी भी बढ़ोतरी का असर इन्हीं सबसे संवेदनशील वर्गों पर सबसे पहले पड़ेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने रेपो रेट क्यों स्थिर रखा?
RBI ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और मध्यम-दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से रेपो रेट अपरिवर्तित रखा। विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू महंगाई के बीच संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
क्या भारत में ब्याज दरें इस साल बढ़ सकती हैं?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार यदि महंगाई बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुँचती है, तो वर्ष 2026 के अंत तक एक से दो बार ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना है। मानसून की स्थिति इस अनुमान में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
RBI के इस फैसले का आवास क्षेत्र पर क्या असर होगा?
LIC हाउसिंग फाइनेंस के MD एवं CEO त्रिभुवन अधिकारी के अनुसार स्थिर ब्याज दरों का माहौल उधारकर्ताओं का भरोसा बढ़ाएगा और ऋण प्रवाह में सुधार लाएगा। इससे विभिन्न बाज़ारों में आवास माँग को मजबूती मिलेगी।
वित्त वर्ष 2026-27 की GDP वृद्धि पर क्या जोखिम हैं?
PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा के अनुसार भू-राजनीतिक जोखिमों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जो GDP वृद्धि संभावनाओं पर असर डाल सकती है। इसके अलावा आपूर्ति संबंधी झटके, ऊर्जा की ऊँची कीमतें और कमज़ोर मानसून भी विकास की गति को धीमा कर सकते हैं।
RBI के विदेशी मुद्रा संबंधी कदमों का क्या महत्व है?
मदन सबनवीस ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा के माध्यम से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के RBI के कदमों को 'सकारात्मक आश्चर्य' बताया। विदेशी मुद्रा बाज़ार ने इन घोषणाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
राष्ट्र प्रेस
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