RBI ने रेपो रेट स्थिर रखा: विशेषज्ञों का कहना है दीर्घकालिक विकास की राह मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के निर्णय को अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों ने 5 जून 2026 को वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक संतुलित कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला मध्यम और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की संभावनाओं को बनाए रखने में सहायक होगा।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि मौद्रिक नीति का यह निर्णय अर्थव्यवस्था के समक्ष विद्यमान जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद RBI के इस कदम ने विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि महंगाई अभी भी RBI के निर्धारित लक्ष्य — 4 प्रतिशत — के करीब बनी हुई है। हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की GDP वृद्धि संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। फिर भी उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बनाए रखती है।
जोखिम और चेतावनियाँ
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि आपूर्ति संबंधी झटके, ऊर्जा की ऊँची कीमतें और सामान्य से कमज़ोर मानसून आर्थिक विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने अनुमान जताया कि यदि महंगाई बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुँचती है, तो इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।
सबनवीस ने कहा, 'हम इस साल एक से दो बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि मानसून का असर पड़ सकता है, हालाँकि फिलहाल उसे कुछ हद तक संतुलित कर लिया गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा के ज़रिये विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के RBI के व्यापक कदम 'सकारात्मक आश्चर्य' की तरह हैं।
बैंकिंग क्षेत्र की प्रतिक्रिया
इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने रुपये को स्थिर बनाए रखने के उपायों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'भू-राजनीतिक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है और वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।' बिनोद कुमार के अनुसार खुदरा, कृषि और MSME क्षेत्रों में माँग लगातार बढ़ती रहेगी क्योंकि आर्थिक स्थिति सुधारने वाली नीतियाँ लागू की जा रही हैं।
आवास क्षेत्र पर असर
LIC हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिभुवन अधिकारी ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल आवास क्षेत्र की माँग को सहारा देगा। उनके अनुसार मौजूदा दर व्यवस्था जारी रहने से उधारकर्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, ऋण प्रवाह में सुधार होगा और विभिन्न बाज़ारों में आवास माँग को मजबूती मिलेगी।
आगे क्या
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक दरों पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। गौरतलब है कि RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के नतीजे और मानसून की प्रगति आगामी महीनों में नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।