आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट स्थिर रहने के आसार, महंगाई अनुमान 5% तक पहुँचने की चेतावनी: एचएसबीसी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर यथावत रखे जाने की संभावना है। हालाँकि, एचएसबीसी (HSBC) की विशेषज्ञों के अनुसार, कमज़ोर रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में केंद्रीय बैंक का नीतिगत रुख पहले से अधिक आक्रामक (हॉकिश) हो सकता है। यह आकलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित प्रभाव ने घरेलू महंगाई की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
एचएसबीसी का विश्लेषण
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट और मैक्रो स्ट्रैटजिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई के महंगाई और विकास दर के अनुमान यह स्पष्ट करेंगे कि नीति निर्माता ऊर्जा संकट को किस नज़रिये से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, "महंगाई बढ़ रही है, जो ब्याज दरों में वृद्धि का समर्थन करती है, जबकि विकास धीमा हो रहा है, जो ब्याज दरों में वृद्धि के खिलाफ तर्क देता है।" भंडारी ने इसे "किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए सबसे कठिन स्थिति" बताया।
तेल की कीमतें और महंगाई का अनुमान
पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने कच्चे तेल की आधारभूत कीमत लगभग $85 प्रति बैरल और वैकल्पिक परिदृश्य के रूप में $95 प्रति बैरल मानी थी। भंडारी का मानना है कि तेल की ऊँची कीमतें अब आरबीआई के आधार परिदृश्य का हिस्सा बनेंगी, जिससे महंगाई का अनुमान पहले के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत के करीब पहुँच सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की ऊँची कीमतें और संभावित अल नीनो विकास, महंगाई नियंत्रण, राजकोषीय घाटे और चालू खाते के लिए बाधा साबित हो सकते हैं।
केयरएज रेटिंग्स की चिंताएँ
केयरएज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और खुदरा ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, थोक महंगाई में तीव्र वृद्धि से उपभोक्ता कीमतों पर इसका असर तेज़ी से फैलने का खतरा है। गौरतलब है कि महंगाई में मौजूदा उछाल मुख्यतः आपूर्ति पक्ष की अड़चनों के कारण है, न कि माँग में वृद्धि के कारण।
GDP वृद्धि दर पर असर
केयरएज ने कच्चे तेल की औसत कीमत $90 प्रति बैरल मानते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालाँकि, यदि भू-राजनीतिक संघर्ष लंबा खिंचा और तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के आसपास पहुँचीं, तो वृद्धि दर घटकर 6 प्रतिशत के करीब आ सकती है। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति और वैश्विक तेल बाज़ार की दिशा आरबीआई के अगले कदम को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।