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आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट स्थिर रहने के आसार, महंगाई अनुमान 5% तक पहुँचने की चेतावनी: एचएसबीसी

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आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट स्थिर रहने के आसार, महंगाई अनुमान 5% तक पहुँचने की चेतावनी: एचएसबीसी

सारांश

एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट स्थिर रख सकता है, लेकिन बढ़ते तेल दाम और कमज़ोर रुपये के चलते महंगाई अनुमान 5% तक पहुँच सकता है और नीतिगत रुख आक्रामक हो सकता है।

मुख्य बातें

एचएसबीसी के अनुसार RBI की जून MPC बैठक में रेपो रेट यथावत रहने की संभावना है।
महंगाई का अनुमान पहले के 4.6% से बढ़कर 5% के करीब पहुँच सकता है।
तेल की आधारभूत कीमत अब $85 से बढ़कर $95 प्रति बैरल या अधिक मानी जा सकती है।
केयरएज रेटिंग्स ने FY2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया; तेल $110/बैरल होने पर यह 6% तक गिर सकती है।
अल नीनो और कमज़ोर मानसून के पूर्वानुमान ने महंगाई नियंत्रण की चुनौती और बढ़ाई है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर यथावत रखे जाने की संभावना है। हालाँकि, एचएसबीसी (HSBC) की विशेषज्ञों के अनुसार, कमज़ोर रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में केंद्रीय बैंक का नीतिगत रुख पहले से अधिक आक्रामक (हॉकिश) हो सकता है। यह आकलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित प्रभाव ने घरेलू महंगाई की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

एचएसबीसी का विश्लेषण

एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट और मैक्रो स्ट्रैटजिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई के महंगाई और विकास दर के अनुमान यह स्पष्ट करेंगे कि नीति निर्माता ऊर्जा संकट को किस नज़रिये से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, "महंगाई बढ़ रही है, जो ब्याज दरों में वृद्धि का समर्थन करती है, जबकि विकास धीमा हो रहा है, जो ब्याज दरों में वृद्धि के खिलाफ तर्क देता है।" भंडारी ने इसे "किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए सबसे कठिन स्थिति" बताया।

तेल की कीमतें और महंगाई का अनुमान

पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने कच्चे तेल की आधारभूत कीमत लगभग $85 प्रति बैरल और वैकल्पिक परिदृश्य के रूप में $95 प्रति बैरल मानी थी। भंडारी का मानना है कि तेल की ऊँची कीमतें अब आरबीआई के आधार परिदृश्य का हिस्सा बनेंगी, जिससे महंगाई का अनुमान पहले के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत के करीब पहुँच सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की ऊँची कीमतें और संभावित अल नीनो विकास, महंगाई नियंत्रण, राजकोषीय घाटे और चालू खाते के लिए बाधा साबित हो सकते हैं।

केयरएज रेटिंग्स की चिंताएँ

केयरएज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और खुदरा ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के कारण मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, थोक महंगाई में तीव्र वृद्धि से उपभोक्ता कीमतों पर इसका असर तेज़ी से फैलने का खतरा है। गौरतलब है कि महंगाई में मौजूदा उछाल मुख्यतः आपूर्ति पक्ष की अड़चनों के कारण है, न कि माँग में वृद्धि के कारण।

GDP वृद्धि दर पर असर

केयरएज ने कच्चे तेल की औसत कीमत $90 प्रति बैरल मानते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालाँकि, यदि भू-राजनीतिक संघर्ष लंबा खिंचा और तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के आसपास पहुँचीं, तो वृद्धि दर घटकर 6 प्रतिशत के करीब आ सकती है। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति और वैश्विक तेल बाज़ार की दिशा आरबीआई के अगले कदम को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों एक साथ संभव नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राजकोषीय अनुशासन का दावा कर रही है, लेकिन ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी ने आपूर्ति-जनित महंगाई को नई ऊँचाई दी है। केयरएज के $110/बैरल वाले जोखिम परिदृश्य को मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है, जबकि यही परिदृश्य GDP को 0.7 प्रतिशत अंक तक खींच सकता है। RBI के लिए असली परीक्षा दर-निर्णय नहीं, बल्कि वह भाषा होगी जिससे वह बाज़ार को अगले कदम का संकेत देता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई जून एमपीसी में रेपो रेट पर क्या फैसला हो सकता है?
एचएसबीसी के विश्लेषण के अनुसार, RBI जून MPC बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर स्थिर रख सकता है। हालाँकि, नीतिगत रुख पहले से अधिक आक्रामक (हॉकिश) होने की उम्मीद है।
एचएसबीसी ने महंगाई अनुमान क्यों बढ़ाया है?
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें अब आरबीआई के आधार परिदृश्य का हिस्सा बनेंगी, जिससे महंगाई अनुमान 4.6% से बढ़कर 5% के करीब पहुँच सकता है। कमज़ोर रुपया और संभावित अल नीनो इस दबाव को और बढ़ा रहे हैं।
अल नीनो का भारत की मौद्रिक नीति पर क्या असर हो सकता है?
एचएसबीसी की भंडारी ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के विकास से सामान्य से कम मानसून की आशंका है, जो खाद्य महंगाई बढ़ा सकती है और राजकोषीय घाटे तथा चालू खाते पर दबाव डाल सकती है। केयरएज रेटिंग्स ने भी इसे मुद्रास्फीति के लिए बड़ा जोखिम बताया है।
FY2027 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का क्या अनुमान है?
केयरएज रेटिंग्स ने कच्चे तेल की औसत कीमत $90 प्रति बैरल मानते हुए FY2027 के लिए GDP वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है। यदि तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल तक पहुँचीं, तो वृद्धि दर घटकर 6% के करीब आ सकती है।
महंगाई में मौजूदा उछाल का कारण क्या है?
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई में मौजूदा उछाल मुख्यतः आपूर्ति पक्ष की अड़चनों — जैसे कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और खुदरा ईंधन की बढ़ोतरी — के कारण है, न कि माँग में वृद्धि के कारण।
राष्ट्र प्रेस
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