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आरबीआई एमपीसी बैठक 3-5 जून: कच्चे तेल की महंगाई के बीच रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान

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आरबीआई एमपीसी बैठक 3-5 जून: कच्चे तेल की महंगाई के बीच रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान

सारांश

एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई एमपीसी 3-5 जून की बैठक में रेपो रेट स्थिर रख सकती है। ब्रेंट क्रूड में 22% गिरावट से बाहरी खाते में सुधार हुआ है, लेकिन पेट्रोल-डीजल 7% महंगा होने पर CPI 4.5% तक जा सकती है — जो दरों में कटौती की राह रोक सकती है।

मुख्य बातें

आरबीआई एमपीसी की 3-5 जून बैठक में रेपो रेट स्थिर रखे जाने का अनुमान — एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट।
ब्रेंट क्रूड में 22 प्रतिशत की गिरावट से भारत के बाह्य खाते के परिदृश्य में सुधार।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने पर कच्चा तेल $75-80 प्रति बैरल तक लौट सकता है; रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद।
पेट्रोल-डीजल में 7% वृद्धि हुई तो CPI महंगाई 4.5% तक पहुँच सकती है।
आरबीआई के $5 अरब के रुपये-डॉलर स्वैप के बाद तरलता सरप्लस घटकर 0.2% पर।
जमा वृद्धि 12.2% वार्षिक दर पर स्वस्थ, लेकिन ऋण वृद्धि से पीछे।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 3 से 5 जून के बीच होने वाली बैठक में रेपो रेट को यथावत रखे जाने की संभावना है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते महंगाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह आकलन सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में दरों में बदलाव की गुंजाइश सीमित दिखती है।

कच्चे तेल में गिरावट से बाहरी खाते में सुधार

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे पिछले दो हफ्तों में भारत के बाह्य खाते (External Account) के परिदृश्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह राहत तब तक अस्थायी मानी जाएगी, जब तक भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह शांत नहीं होता।

हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने पर तेल $75-80 प्रति बैरल तक संभव

एमके ग्लोबल की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के बाद कच्चा तेल $75-80 प्रति बैरल के दायरे में लौट सकता है। इससे रुपये को डॉलर के मुकाबले सहारा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति आरबीआई को अगले कुछ तिमाहियों तक रेपो रेट स्थिर रखने में सहूलियत देगी।

महंगाई का जोखिम: पेट्रोल-डीजल 7% महंगा हुआ तो CPI 4.5% तक पहुँच सकती है

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो खुदरा महंगाई (CPI) 4.5 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि आरबीआई का मध्यम अवधि का महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है, ऐसे में यह आँकड़ा नीति-निर्माताओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

तरलता की स्थिति और जमा-ऋण वृद्धि का अंतर

तरलता के मोर्चे पर, रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई द्वारा रुपये-डॉलर स्वैप के ज़रिए $5 अरब की तरलता डालने के बाद सरप्लस घटकर शुद्ध माँग और सावधि देनदारियों के लगभग 0.2 प्रतिशत तक सीमित रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया, 'हमें तत्काल चिंता का कोई कारण नहीं दिखता; एक बार कच्चे तेल और मुद्रा पर दबाव कम हो जाए, तो आरबीआई तरलता की स्थिति बहाल करने में सक्षम होगा।' इसके अलावा, जमा वृद्धि 12.2 प्रतिशत वार्षिक दर से स्वस्थ बनी हुई है, लेकिन ऋण वृद्धि के साथ तालमेल नहीं रख पा रही।

उपभोग सुधार की कहानी पर असर

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि दरों का स्थिर रहना भारत की उपभोग-सुधार (Consumption Recovery) और आय चक्र (Income Cycle) के लिए अनुकूल संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण माँग में सुधार और कॉर्पोरेट आय में तेज़ी के संकेत मिल रहे हैं। आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की स्थिरता और मानसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ अधिक जटिल है — कच्चे तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक कारणों से आई गिरावट जितनी तेज़ी से आई, उतनी ही तेज़ी से पलट भी सकती है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्रीय बैंक इस क्षणिक राहत को दर-कटौती की खिड़की मानेगा या महंगाई के ऊपरी जोखिम को प्राथमिकता देगा। जमा और ऋण वृद्धि के बीच बढ़ता अंतर एक संरचनात्मक चिंता है जिसे दर-नीति अकेले नहीं सुलझा सकती — इस पर मुख्यधारा की कवरेज अपेक्षाकृत कम ध्यान दे रही है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई एमपीसी की जून 2025 बैठक में क्या फैसला होने की उम्मीद है?
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई एमपीसी 3-5 जून की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई की अनिश्चितता इसकी प्रमुख वजह बताई गई है।
ब्रेंट क्रूड में गिरावट का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे भारत के बाह्य खाते के परिदृश्य में सुधार हुआ है। हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने पर तेल $75-80 प्रति बैरल तक लौट सकता है और रुपये को भी सहारा मिल सकता है।
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो खुदरा महंगाई (CPI) 4.5 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। यह आरबीआई के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर होगा।
आरबीआई अगले कुछ तिमाहियों तक दरें क्यों स्थिर रख सकता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल और मुद्रा पर दबाव कम होने के बाद आरबीआई तरलता बहाल करने में सक्षम होगा, लेकिन महंगाई के ऊपरी जोखिम को देखते हुए दर-कटौती की जल्दबाज़ी नहीं होगी। यह स्थिरता भारत की उपभोग-सुधार और आय चक्र के लिए अनुकूल मानी जा रही है।
बैंकिंग क्षेत्र में जमा और ऋण वृद्धि की स्थिति क्या है?
जमा वृद्धि 12.2 प्रतिशत वार्षिक दर पर स्वस्थ बनी हुई है, लेकिन ऋण वृद्धि के साथ तालमेल नहीं रख पा रही। आरबीआई के $5 अरब के रुपये-डॉलर स्वैप के बाद तरलता सरप्लस घटकर शुद्ध माँग और सावधि देनदारियों के लगभग 0.2 प्रतिशत तक सीमित हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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