10 अगस्त 2026
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आरबीआई अगली मौद्रिक नीति में रेपो रेट 5.25% पर रख सकता है स्थिर, बोफा की रिपोर्ट में संकेत

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आरबीआई अगली मौद्रिक नीति में रेपो रेट 5.25% पर रख सकता है स्थिर, बोफा की रिपोर्ट में संकेत

सारांश

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बावजूद RBI सतर्क है — BofA की रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट 5.25% पर रोक सकता है। GDP अनुमान घटा, महंगाई अनुमान बढ़ा — मानसून और कच्चे तेल पर नज़र टिकी है।

मुख्य बातें

BofA सिक्योरिटीज़ की रिपोर्ट के अनुसार, RBI आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रख सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद वैश्विक अनिश्चितता में कमी आई, जिससे डेटा-आधारित नीति निर्णय की गुंजाइश बढ़ी।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान 30 आधार अंक घटाकर 6.6% किया।
महंगाई अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.1% किया गया — मौसमी और खाद्य मूल्य जोखिमों के मद्देनज़र।
MPC के सभी सदस्य महंगाई जोखिम पर एकमत; आगे मानसून, खाद्य महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें निर्णायक होंगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज़ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता में कमी आने के बाद केंद्रीय बैंक अपनी 'वेट-एंड-वॉच' नीति जारी रख सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि RBI नीतिगत दिशा बदलने से पहले मानसून, खाद्य महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों पर नज़र बनाए रखेगा।

वैश्विक अस्थिरता में कमी का असर

BofA सिक्योरिटीज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद वैश्विक अनिश्चितता में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इससे दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय डेटा-आधारित निर्णय लेने की अधिक गुंजाइश मिली है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ार कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।

जून की MPC बैठक: क्या हुआ था

RBI ने जून 2026 में हुई MPC की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा और अपना न्यूट्रल पॉलिसी रुख भी यथावत रखा। बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) से स्पष्ट हुआ कि सभी सदस्य महंगाई के बढ़ते जोखिमों और अस्थिर आर्थिक माहौल को लेकर एकमत थे। हालाँकि, सदस्यों ने यह भी माना कि महंगाई का दबाव नियंत्रण में है और व्यापक स्तर पर इसके बने रहने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं।

巨观आर्थिक अनुमानों में बदलाव

केंद्रीय बैंक ने जून की बैठक में अपने समष्टि-आर्थिक (मैक्रो-इकोनॉमिक) अनुमानों में संशोधन किया। मौसमी जोखिमों और खाद्य कीमतों की अनिश्चितता का हवाला देते हुए, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 30 आधार अंक घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। साथ ही, महंगाई का अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया — जो यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक मूल्य स्थिरता को लेकर सतर्क है।

आगे किन संकेतकों पर रहेगी नज़र

रिपोर्ट के अनुसार, RBI आगामी नीति निर्णय से पहले तीन प्रमुख संकेतकों — मानसून की प्रगति, खाद्य महंगाई के रुझान और कच्चे तेल की कीमतें — पर बारीकी से नज़र रखेगा। गौरतलब है कि यह डेटा-आधारित दृष्टिकोण MPC के उस रुख के अनुरूप है जिसमें सदस्यों ने किसी भी दिशा में जल्दबाज़ी में कदम उठाने से परहेज़ करने की बात कही थी। अगली MPC बैठक में नीतिगत रुख पर अंतिम फैसला आर्थिक आँकड़ों की समग्र तस्वीर पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि 'वेट-एंड-वॉच' नीति कब तक चलेगी — जबकि GDP अनुमान घट रहा है और महंगाई अनुमान बढ़ रहा है, ये दोनों संकेत विपरीत दिशाओं में खिंचाव दिखाते हैं। अमेरिका-ईरान शांति समझौते से भू-राजनीतिक राहत मिली है, लेकिन घरेलू खाद्य महंगाई और अनिश्चित मानसून जैसे संरचनात्मक जोखिम अभी भी बने हैं। बोफा की रिपोर्ट केंद्रीय बैंक के डेटा-आधारित दृष्टिकोण को सही ठहराती है, पर मुख्यधारा की कवरेज यह नज़रअंदाज़ करती है कि GDP अनुमान में कटौती और महंगाई अनुमान में बढ़ोतरी एक साथ होना नीति-निर्माताओं के लिए असली दुविधा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI रेपो रेट क्या है और अभी यह कितना है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। जून 2026 की MPC बैठक में RBI ने इसे 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा और न्यूट्रल पॉलिसी रुख बनाए रखा।
BofA सिक्योरिटीज़ की रिपोर्ट में RBI के बारे में क्या कहा गया है?
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज़ की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता में कमी के बाद RBI अगली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते से केंद्रीय बैंकों को डेटा-आधारित निर्णय लेने की अधिक गुंजाइश मिली है।
RBI ने GDP और महंगाई के अनुमान में क्या बदलाव किया?
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 30 आधार अंक घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। साथ ही, महंगाई का अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया गया, जिसकी वजह मौसमी जोखिम और खाद्य कीमतों की अनिश्चितता बताई गई।
RBI अगले नीतिगत फैसले से पहले किन संकेतकों पर नज़र रखेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, RBI मानसून की प्रगति, खाद्य महंगाई के रुझान और कच्चे तेल की कीमतों पर बारीकी से नज़र रखेगा। इन तीनों संकेतकों का आकलन करने के बाद ही नीतिगत दिशा में कोई बदलाव संभव माना जा रहा है।
MPC के सदस्यों का महंगाई को लेकर क्या रुख था?
जून की MPC बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, सभी सदस्य महंगाई के बढ़ते जोखिमों और अस्थिर आर्थिक माहौल को लेकर एकमत थे। हालाँकि, उन्होंने यह भी माना कि महंगाई का दबाव अभी नियंत्रण में है और व्यापक स्तर पर इसके बने रहने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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