अमेरिका-ईरान तनाव के कारण आरबीआई अप्रैल में रेपो रेट को स्थिर रख सकता है: रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- रेपो रेट को स्थिर रखने की योजना है।
- मध्य पूर्व का संघर्ष आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।
- महंगाई 6%25 से ऊपर जाने पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।
- कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं।
- आरबीआई जीडीपी और महंगाई के अनुमान में बदलाव कर सकता है।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अप्रैल 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय ले सकता है। एक ताज़ा रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण यह कदम उठाया जा सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दरों में कटौती का दौर अब समाप्त हो चुका है, और आरबीआई को उम्मीद है कि वह लंबे समय तक दरों को स्थिर बनाए रखेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल एक न्यूट्रल रुख अपनाएगा और बदलती परिस्थितियों पर नज़र रखेगा। इसके साथ ही, तरलता और रुपए को सहारा देने के लिए कुछ विशेष उपाय भी किए जा सकते हैं।
यदि महंगाई दर 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार करती है, तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी की जा सकती है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि "युद्ध का आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर प्रभाव अगले 3-4 महीनों में स्पष्ट होगा। इसके बाद आरबीआई अपनी ब्याज दरों की दिशा पर निर्णय लेगा।"
पिछली नीति बैठक के बाद से अमेरिका-ईरान संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुँच गई हैं।
बाजारों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस संघर्ष के चलते विदेशी निवेशकों (एफपीआई) का पैसा भारत से बाहर जा रहा है, बॉंड यील्ड में वृद्धि हुई है, और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस युद्ध का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर पड़ेगा। भारत भी इससे प्रभावित होगा, इसलिए आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी और महंगाई के अपने पूर्वानुमान में बदलाव कर सकता है।
सीईए द्वारा हाल ही में जारी मासिक आर्थिक बुलेटिन में चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2027 में भी काफी बढ़ने की चेतावनी दी गई है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 7 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही, बैंक ने चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका जताई है।