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आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा स्थिर, पश्चिम एशिया तनाव और महंगाई जोखिम के बीच 'न्यूट्रल' रुख बरकरार

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आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर रखा स्थिर, पश्चिम एशिया तनाव और महंगाई जोखिम के बीच 'न्यूट्रल' रुख बरकरार

सारांश

RBI ने रेपो रेट 5.25% पर थामे रखा — न बढ़ाया, न घटाया। पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा कीमतें चढ़ रही हैं, CPI लक्ष्य सीमा की ओर बढ़ रही है, और मानसून की अनिश्चितता अलग चिंता है। MPC का संदेश साफ़ है: अभी रुको, आँकड़े देखो, फिर तय करो।

मुख्य बातें

RBI की MPC ने 5 जून 2026 को रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखा; निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
पॉलिसी स्टांस 'न्यूट्रल' बरकरार; ब्याज दरों में निकट भविष्य में बदलाव की संभावना नहीं।
पश्चिम एशिया में तनाव से ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित।
CPI महंगाई अभी RBI के लक्ष्य से नीचे, लेकिन आने वाले महीनों में ऊपरी सीमा के करीब पहुँचने की आशंका।
पिछले वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 7.6% रही — NSO के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार।
दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी से कृषि उत्पादन और ग्रामीण माँग पर असर का जोखिम।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 जून 2026 को सर्वसम्मति से रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि 3, 4 और 5 जून को हुई छह सदस्यीय समिति की बैठक में आर्थिक एवं वित्तीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह फैसला किया गया। केंद्रीय बैंक ने पॉलिसी स्टांस भी 'न्यूट्रल' बनाए रखा है।

वैश्विक चुनौतियाँ और पश्चिम एशिया संकट का असर

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल की पिछली MPC बैठक के बाद से वैश्विक आर्थिक माहौल और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और नाज़ुक युद्धविराम की स्थिति के कारण ऊर्जा कीमतों में तेज़ वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। बढ़ती ऊर्जा लागत और आपूर्ति बाधाओं का असर आर्थिक विकास और महंगाई दोनों पर पड़ रहा है।

महंगाई की स्थिति और आगे का जोखिम

मल्होत्रा के अनुसार, वैश्विक दबावों के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI) अभी RBI के लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर अभी तक घरेलू बाज़ारों तक नहीं पहुँचा है। हालाँकि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह केंद्रीय बैंक की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुँच सकती है। महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़े हैं, लेकिन मौजूदा हालात में ब्याज दरों में बदलाव के बजाय स्थिति और स्पष्ट होने का इंतज़ार करने का फैसला किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही। निजी उपभोग, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के मज़बूत प्रदर्शन ने इस वृद्धि को समर्थन दिया। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI आँकड़े भी दोनों क्षेत्रों में मज़बूती और सकारात्मक कारोबारी भरोसे की पुष्टि करते हैं। अप्रैल में भारत के माल निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ी हुई है।

मानसून और कृषि क्षेत्र की चिंता

RBI ने चेतावनी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण माँग पर पड़ सकता है। हालाँकि सरकार की फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती और कम अवधि वाली फसलों जैसी योजनाएँ इस प्रभाव को काफ़ी हद तक कम करने में सहायक हो सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण खपत पहले से ही वैश्विक कमोडिटी दबावों से जूझ रही है।

आगे की रणनीति

RBI ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और महंगाई जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक सतर्क रुख बनाए रखेगा। आँकड़ों पर आधारित निर्णय प्रक्रिया जारी रहेगी और आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी दर-कटौती और ठहराव के बीच संतुलन बनाने में लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

रुपये पर दबाव है, और CPI लक्ष्य सीमा की ओर खिसक रही है; ऐसे में 'न्यूट्रल' स्टांस दर-कटौती की उम्मीद रखने वाले बाज़ारों के लिए एक सतर्क संकेत है। गौरतलब है कि 7.6% GDP वृद्धि की चमक के पीछे मानसून की अनिश्चितता और ग्रामीण माँग का सवाल छिपा है, जिसे MPC ने स्वयं रेखांकित किया। अगली बैठक तक यदि ऊर्जा कीमतें नहीं थमीं और मानसून कमज़ोर रहा, तो 'न्यूट्रल' से 'हॉकिश' की दिशा में झुकाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने जून 2026 में रेपो रेट पर क्या फैसला किया?
RBI की MPC ने 5 जून 2026 को सर्वसम्मति से रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखा। पॉलिसी स्टांस भी 'न्यूट्रल' बरकरार रखा गया है।
रेपो रेट न बदलने का मुख्य कारण क्या है?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, पश्चिम एशिया तनाव से ऊर्जा कीमतें बढ़ी हैं और महंगाई जोखिम बढ़ा है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसलिए आँकड़ों पर आधारित निर्णय लेने की नीति के तहत दरें अपरिवर्तित रखी गई हैं।
क्या आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ेगी?
RBI ने संकेत दिया है कि CPI महंगाई फिलहाल लक्ष्य स्तर से नीचे है, लेकिन आने वाले महीनों में यह केंद्रीय बैंक की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुँच सकती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाज़ारों तक नहीं पहुँचा है।
भारत की GDP वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में कितनी रही?
NSO के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 7.6% रही। निजी उपभोग, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के मज़बूत प्रदर्शन ने इस वृद्धि को आधार दिया।
मानसून की कमी से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
RBI ने चेतावनी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी से कृषि उत्पादन और ग्रामीण माँग प्रभावित हो सकती है। हालाँकि सरकार की फसल विविधीकरण और जलवायु अनुकूल खेती जैसी योजनाएँ इस प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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