18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

RBI MPC बैठक आज से शुरू, रेपो रेट पर यथास्थिति के आसार; महंगाई और ग्रोथ पर रहेगी नज़र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
RBI MPC बैठक आज से शुरू, रेपो रेट पर यथास्थिति के आसार; महंगाई और ग्रोथ पर रहेगी नज़र

सारांश

RBI की तीन दिवसीय MPC बैठक नई दिल्ली में शुरू हो गई है। पश्चिम एशिया तनाव और तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच HSBC, SBI रिसर्च और केयरएज सहित अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेंगे, लेकिन महंगाई और GDP अनुमानों में संशोधन तय माना जा रहा है।

मुख्य बातें

RBI MPC की तीन दिवसीय बैठक 3 जून से शुरू; नतीजे शुक्रवार को घोषित होंगे।
गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में रेपो दर पर यथास्थिति के आसार।
HSBC के अनुसार महंगाई अनुमान 4.6% से बढ़कर लगभग 5% पहुँच सकता है।
केयरएज का FY27 GDP अनुमान 6.7% ; तेल 110 डॉलर/बैरल पर पहुँचा तो घटकर 6% ।
SBI रिसर्च का FY26 के लिए GDP अनुमान 7.5% ; CPI महंगाई कई तिमाहियों तक 5% से ऊपर संभव।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार, 3 जून से नई दिल्ली में शुरू हो गई, जिसके नतीजों की घोषणा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को करेंगे। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

क्यों सतर्क है केंद्रीय बैंक

जून की यह नीति समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि दरें भले स्थिर रहें, RBI के बयान का रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क या सख्त हो सकता है।

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में RBI दरों को स्थिर रखने की नीति अपना सकता है, लेकिन समय के साथ कुछ सख्ती की संभावना भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि बाज़ार फिलहाल 2026 की चौथी तिमाही से लगभग दो बार दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा है, न कि बड़े स्तर की सख्ती की।

तेल की कीमतें और महंगाई का गणित

भंडारी के मुताबिक, RBI के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा — खासकर इस पर कि क्या वह कच्चे तेल की औसत कीमत का अपना अनुमान पहले के लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है। यदि तेल का आधारभूत अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान भी पहले के 4.6% से बढ़कर करीब 5% तक पहुँच सकता है।

केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम मानसून की आशंका और हाल में ईंधन की खुदरा कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि थोक महंगाई में वृद्धि का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेज़ी से पड़ सकता है, और फिलहाल यह बढ़ोतरी मुख्यतः आपूर्ति पक्ष से हो रही है, न कि माँग बढ़ने से।

ग्रोथ अनुमानों पर असर

केयरएज ने वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे। हालाँकि चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच जाती हैं, तो वृद्धि दर घटकर लगभग 6% रह सकती है।

SBI रिसर्च का भी मानना है कि लगातार बने महंगाई जोखिम और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए RBI रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। उसकी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर 6.6% और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 7.5% रहने का अनुमान है। साथ ही, ईंधन कीमतों और वैश्विक झटकों के कारण CPI आधारित महंगाई कई तिमाहियों तक 5% से ऊपर रह सकती है।

ब्रोकरेज की राय

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी दरों में यथास्थिति का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी और बाहरी आर्थिक स्थिति में सुधार से RBI को राहत मिली है। उसके अनुसार, यदि तेल की कीमतें और कम होती हैं तथा भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो रुपए को मज़बूती मिलेगी और केंद्रीय बैंक को लंबे समय तक दरें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

आगे क्या

शुक्रवार को घोषित होने वाले नीतिगत फैसले के साथ-साथ बाज़ार की नज़र RBI के संशोधित महंगाई और GDP अनुमानों, तथा गवर्नर के बयान के रुख पर रहेगी, जो आने वाली तिमाहियों में दर-चक्र की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बयान के रुख का है। पश्चिम एशिया तनाव से तेल का जोखिम जीवित है, मानसून सामान्य से कम रहने के संकेत हैं, और CPI के 5% के पार बने रहने की आशंका — ये तीनों मिलकर 'न्यूट्रल' रुख को असहज बनाते हैं। बाज़ार 2026 की चौथी तिमाही से कटौती का जो दांव लगा रहा है, वह बहुत हद तक इस मान्यता पर टिका है कि तेल नीचे आएगा। यदि गवर्नर मल्होत्रा महंगाई अनुमान बढ़ाते हैं, तो रेट-कट की वह कथा एक झटके में पलट सकती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI MPC की जून बैठक कब है और फैसला कब आएगा?
RBI मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक 3 जून, बुधवार से शुरू हो गई है। गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे।
क्या RBI इस बार रेपो रेट में बदलाव करेगा?
HSBC, SBI रिसर्च, केयरएज और एमके ग्लोबल सहित अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि RBI रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालाँकि वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक का बयान पहले की तुलना में अधिक सतर्क रह सकता है।
महंगाई अनुमान पर तेल की कीमतों का क्या असर पड़ सकता है?
HSBC की प्रांजुल भंडारी के अनुसार, यदि RBI कच्चे तेल का आधारभूत अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है, तो महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़कर करीब 5% तक पहुँच सकता है। केयरएज ने भी मानसून और ईंधन कीमतों से दबाव बढ़ने की चेतावनी दी है।
FY 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान क्या है?
केयरएज रेटिंग्स ने FY 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे। SBI रिसर्च का अनुमान 6.6% है, जबकि FY 2025-26 के लिए यह लगभग 7.5% है।
बाज़ार रेट कट की उम्मीद कब से कर रहा है?
HSBC के अनुसार, बाज़ार फिलहाल 2026 की चौथी तिमाही से लगभग दो बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना देख रहा है। बड़े स्तर की मौद्रिक सख्ती की उम्मीद बाज़ार नहीं कर रहा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले