RBI MPC बैठक आज से शुरू, रेपो रेट पर यथास्थिति के आसार; महंगाई और ग्रोथ पर रहेगी नज़र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार, 3 जून से नई दिल्ली में शुरू हो गई, जिसके नतीजों की घोषणा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को करेंगे। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।
क्यों सतर्क है केंद्रीय बैंक
जून की यह नीति समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि दरें भले स्थिर रहें, RBI के बयान का रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क या सख्त हो सकता है।
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में RBI दरों को स्थिर रखने की नीति अपना सकता है, लेकिन समय के साथ कुछ सख्ती की संभावना भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि बाज़ार फिलहाल 2026 की चौथी तिमाही से लगभग दो बार दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा है, न कि बड़े स्तर की सख्ती की।
तेल की कीमतें और महंगाई का गणित
भंडारी के मुताबिक, RBI के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा — खासकर इस पर कि क्या वह कच्चे तेल की औसत कीमत का अपना अनुमान पहले के लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है। यदि तेल का आधारभूत अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान भी पहले के 4.6% से बढ़कर करीब 5% तक पहुँच सकता है।
केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम मानसून की आशंका और हाल में ईंधन की खुदरा कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि थोक महंगाई में वृद्धि का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेज़ी से पड़ सकता है, और फिलहाल यह बढ़ोतरी मुख्यतः आपूर्ति पक्ष से हो रही है, न कि माँग बढ़ने से।
ग्रोथ अनुमानों पर असर
केयरएज ने वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे। हालाँकि चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच जाती हैं, तो वृद्धि दर घटकर लगभग 6% रह सकती है।
SBI रिसर्च का भी मानना है कि लगातार बने महंगाई जोखिम और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए RBI रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। उसकी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर 6.6% और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 7.5% रहने का अनुमान है। साथ ही, ईंधन कीमतों और वैश्विक झटकों के कारण CPI आधारित महंगाई कई तिमाहियों तक 5% से ऊपर रह सकती है।
ब्रोकरेज की राय
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी दरों में यथास्थिति का अनुमान जताया है। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी और बाहरी आर्थिक स्थिति में सुधार से RBI को राहत मिली है। उसके अनुसार, यदि तेल की कीमतें और कम होती हैं तथा भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो रुपए को मज़बूती मिलेगी और केंद्रीय बैंक को लंबे समय तक दरें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
आगे क्या
शुक्रवार को घोषित होने वाले नीतिगत फैसले के साथ-साथ बाज़ार की नज़र RBI के संशोधित महंगाई और GDP अनुमानों, तथा गवर्नर के बयान के रुख पर रहेगी, जो आने वाली तिमाहियों में दर-चक्र की दिशा तय करेगा।