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आरबीआई एमपीसी बैठक, जीडीपी और अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स डेटा तय करेंगे शेयर बाजार की चाल

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आरबीआई एमपीसी बैठक, जीडीपी और अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स डेटा तय करेंगे शेयर बाजार की चाल

सारांश

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को दरों पर फैसला सुनाएंगे, उसी दिन भारत की FY26 जीडीपी और अमेरिकी NFP डेटा भी आएगा — तीन बड़े ट्रिगर एक ही दिन। बीते सप्ताह निफ्टी 0.72% और सेंसेक्स 0.85% टूटा। अगला हफ्ता बाजार के लिए निर्णायक होगा।

मुख्य बातें

बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 0.72% की गिरावट, 23,547.75 पर बंद; सेंसेक्स 0.85% टूटकर 74,775.74 पर।
MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग और IMD के कमज़ोर मानसून अनुमान ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला।
RBI MPC की बैठक 3 से 5 जून तक; गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून सुबह 10 बजे फैसला सुनाएंगे।
5 जून को NSO द्वारा FY2025-26 की प्रारंभिक जीडीपी वृद्धि दर और मार्च तिमाही के आँकड़े जारी होंगे।
उसी दिन अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) और बेरोजगारी दर के आँकड़े वैश्विक बाजारों की दिशा प्रभावित करेंगे।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के रडार पर बनी रहेंगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक, वित्त वर्ष 2025-26 की जीडीपी वृद्धि दर और अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) आँकड़े — ये तीन बड़े कारक अगले सप्ताह 1 जून से 5 जून 2025 के बीच भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 0.72 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,547.75 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.85 प्रतिशत टूटकर 74,775.74 पर आ गया।

बीते सप्ताह का घटनाक्रम

सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रही — कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया, जिससे निफ्टी शुरुआती दिनों में 24,000 के स्तर के ऊपर पहुँचने में सफल रहा। हालाँकि, जैसे-जैसे सप्ताह आगे बढ़ा, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें कमज़ोर पड़ गईं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार बंद होने से पहले के अंतिम आधे घंटे में बिकवाली और तेज हो गई, जब MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग के चलते कई फंडों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के कमज़ोर मानसून अनुमान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और ऑटो बिक्री आँकड़े

अगले सप्ताह की शुरुआत मई के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आँकड़ों से होगी, जो देश के विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति, मांग और कारोबारी गतिविधियों का संकेत देते हैं। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों की मासिक बिक्री के आँकड़े भी जारी होंगे, जो उपभोक्ता मांग और आर्थिक गतिविधियों की झलक देते हैं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) भी महत्वपूर्ण रहेगा, जो मैन्युफैक्चरिंग, खनन और बिजली क्षेत्रों की स्थिति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग PMI भी निवेशकों के लिए अहम संकेतक माना जा रहा है।

3 जून: अमेरिकी आर्थिक आँकड़े और फेड नीति के संकेत

3 जून को अमेरिका से कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें आएंगी — ADP रोजगार रिपोर्ट, S&P ग्लोबल सर्विसेज PMI और ISM नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI। ये आँकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और महंगाई के दबाव की तस्वीर पेश करेंगे।

इन आँकड़ों के आधार पर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर अनुमान लगाए जाएंगे, जिसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, उभरते बाजारों की मुद्राओं और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि फेड की दर-कटौती की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता पिछले कई महीनों से वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रही है।

आरबीआई एमपीसी बैठक: 3 से 5 जून

RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 जून से 5 जून तक चलेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को सुबह 10 बजे IST बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे।

निवेशक महंगाई, आर्थिक विकास, बैंकिंग प्रणाली में तरलता और वैश्विक जोखिमों को लेकर RBI के रुख पर खास नज़र रखेंगे। बैंकिंग शेयरों, बॉन्ड यील्ड और रुपए की चाल पर इस बैठक का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। खाद्य महंगाई, मानसून की स्थिति और वैश्विक कमोडिटी कीमतों को लेकर RBI का आकलन भी बाजार ध्यान से देखेगा।

5 जून: जीडीपी डेटा और अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स

5 जून को NSO वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की प्रारंभिक जीडीपी वृद्धि दर और मार्च तिमाही के आर्थिक आँकड़े जारी करेगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति की व्यापक तस्वीर सामने आएगी और निवेशकों को विकास दर के नए संकेत मिलेंगे।

उसी दिन अमेरिका का नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) डेटा और बेरोजगारी दर भी जारी होगी। ये आँकड़े वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनके आधार पर फेडरल रिज़र्व की आगामी नीतियों को लेकर अनुमान लगाए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार अमेरिकी मंदी की आशंकाओं और व्यापार तनाव के बीच दिशा तलाश रहे हैं।

इन सबके अतिरिक्त, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक प्रयासों पर भी निवेशकों की नज़र बनी रहेगी, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम भावना पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत की जीडीपी और अमेरिकी NFP — एक साथ आना असाधारण है और बाजार की प्रतिक्रिया तीव्र हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या RBI महंगाई की चिंता और विकास दर के बीच संतुलन बना पाएगा, खासकर जब कमज़ोर मानसून अनुमान खाद्य कीमतों पर दबाव का संकेत दे रहा है। FII की लगातार बिकवाली और MSCI रीबैलेंसिंग से उपजी अस्थिरता बताती है कि बाजार की नींव अभी उतनी मज़बूत नहीं जितनी ऊपरी आँकड़े दिखाते हैं। यदि NFP कमज़ोर आया और RBI ने नरम रुख अपनाया, तो राहत-रैली संभव है — लेकिन विपरीत संयोजन में गिरावट और गहरी हो सकती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई एमपीसी की जून 2025 बैठक में क्या फैसला आ सकता है?
RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 जून 2025 तक चलेगी और गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को सुबह 10 बजे IST फैसला सुनाएंगे। बाजार विशेषज्ञों की नज़र ब्याज दरों, तरलता रुख और मानसून व महंगाई को लेकर RBI के आकलन पर रहेगी।
5 जून को जारी होने वाला भारत का जीडीपी डेटा क्यों अहम है?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) 5 जून को वित्त वर्ष 2025-26 की प्रारंभिक जीडीपी वृद्धि दर और मार्च तिमाही के आँकड़े जारी करेगा। यह डेटा देश की आर्थिक सेहत का व्यापक संकेत देगा और निवेशकों की धारणा को सीधे प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स डेटा का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है?
NFP डेटा अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति का सबसे बड़ा संकेतक माना जाता है। मज़बूत रोजगार आँकड़े फेड को दरें ऊँची रखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक पूंजी उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिका की ओर जा सकती है — और भारतीय बाजारों पर दबाव बन सकता है।
बीते सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट के क्या कारण रहे?
निफ्टी 50 में 0.72% और सेंसेक्स में 0.85% की गिरावट के पीछे FII की लगातार बिकवाली, MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग से जुड़ी पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन गतिविधि और IMD के कमज़ोर मानसून अनुमान प्रमुख कारण रहे। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें कमज़ोर पड़ने से भी निवेशकों का रुख सतर्क हो गया।
अगले सप्ताह कच्चे तेल और अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर क्या प्रभाव रहेगा?
अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए कीमतों में उछाल से महंगाई, व्यापार घाटा और कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जो बाजार की धारणा को कमज़ोर कर सकती है।
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