17 जुलाई 2026
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जून एमपीसी बैठक में रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान, एसबीआई रिपोर्ट में FY27 GDP वृद्धि 6.6% रहने का पूर्वानुमान

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जून एमपीसी बैठक में रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान, एसबीआई रिपोर्ट में FY27 GDP वृद्धि 6.6% रहने का पूर्वानुमान

सारांश

SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 की MPC बैठक में RBI रेपो दर स्थिर रखेगा। FY27 में GDP वृद्धि 6.6% और CPI महंगाई 5% रहने का अनुमान है, जबकि कच्चे तेल और रुपये की कमज़ोरी बड़े जोखिम बने हुए हैं।

मुख्य बातें

SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 की MPC बैठक में RBI रेपो दर यथावत रखने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान; भू-राजनीतिक जोखिम से बदलाव संभव।
FY2025-26 Q4 में GDP वृद्धि ~7.2% और पूरे वर्ष 7.5% रहने का पूर्वानुमान।
CPI महंगाई अगली तीन तिमाहियों में 5% से ऊपर रह सकती है; FY27 अनुमान 5% ।
कच्चा तेल 2026 में $90 प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है; ईंधन कीमतों में ₹6 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी का जोखिम।
रुपये की कमज़ोरी रोकने के लिए RBI को बाज़ार हस्तक्षेप बढ़ाने और 'ऑपरेशन ट्विस्ट' जैसे उपकरणों के उपयोग का सुझाव।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव किए जाने की संभावना कम है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घरेलू मुद्रा पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक को अल्पकालिक ब्याज दरों और वैकल्पिक नीतिगत उपकरणों का सहारा लेना चाहिए।

रेपो दर पर क्या कहती है रिपोर्ट

SBI रिसर्च के अनुसार, 'ब्याज दरें फिलहाल यथावत रखी जाएंगी और आगे का निर्णय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।' रिपोर्ट में यह भी सुझाया गया है कि RBI बाज़ार की स्थिरता बनाए रखने के लिए 'ऑपरेशन ट्विस्ट' जैसे ब्याज दर आधारित उपकरणों का उपयोग कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है।

GDP वृद्धि और आर्थिक अनुमान

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण यह अनुमान बदल सकता है।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर करीब 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह दर 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।

महंगाई का परिदृश्य

रिपोर्ट के अनुसार, वृद्धि और महंगाई के मौजूदा रुझानों को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है। मौजूदा तिमाही में यह दर 4.0 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत है, हालांकि इसमें ऊपर की ओर जोखिम बने हुए हैं। फिर भी यह RBI के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर है।

रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति

रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि मज़बूत व्यापक आर्थिक आधार होने के बावजूद भारतीय रुपया अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अधिक कमज़ोर हो रहा है। इसलिए RBI को बाज़ार में हस्तक्षेप बढ़ाने की ज़रूरत बताई गई है। गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की एकतरफा गिरावट रोकने और अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। साथ ही, भुगतान संतुलन (BoP) को मज़बूत करने के लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।

कच्चा तेल और ईंधन कीमतों पर जोखिम

SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी शांति वार्ताओं को लेकर अभी भरोसे की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में जोखिम प्रीमियम लंबे समय तक ऊंचा बना रह सकता है और वर्ष 2026 के अधिकांश समय में कच्चा तेल $90 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि तेल विपणन कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई करनी है, तो पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ₹5 प्रति लीटर की कटौती करनी होगी। अन्यथा मौजूदा स्तरों से घरेलू ईंधन कीमतों में लगभग ₹6 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है — जो आम उपभोक्ता पर सीधा बोझ डालेगी। आने वाले महीनों में RBI और सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया इन जोखिमों का रुख तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

रुपये और कच्चे तेल से है। रिपोर्ट एक ओर मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार का भरोसा दिलाती है, तो दूसरी ओर मानती है कि रुपया 'अन्य मुद्राओं से अधिक' कमज़ोर हो रहा है — यह विरोधाभास नीतिगत सीमाओं को उजागर करता है। ₹6 प्रति लीटर ईंधन वृद्धि का परिदृश्य CPI को 5% से ऊपर धकेल सकता है, जिससे RBI की 'दर स्थिर रखो' की कहानी और जटिल हो जाएगी। बिना स्पष्ट BoP रणनीति के, ये अनुमान आशावादी तो हैं, पर कमज़ोर कड़ियों पर टिके हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 की MPC बैठक में RBI रेपो दर पर क्या फैसला ले सकता है?
SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार RBI जून 2026 की MPC बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे यथावत रखेगा। आगे का निर्णय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर कितनी रहने का अनुमान है?
SBI रिसर्च ने FY2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण इस अनुमान में बदलाव संभव है।
'ऑपरेशन ट्विस्ट' क्या है और RBI इसका उपयोग क्यों कर सकता है?
'ऑपरेशन ट्विस्ट' एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसमें केंद्रीय बैंक अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचकर दीर्घकालिक प्रतिभूतियाँ खरीदता है, जिससे यील्ड कर्व को नियंत्रित किया जाता है। SBI रिपोर्ट के अनुसार RBI इसका उपयोग रेपो दर बदले बिना बाज़ार की स्थिरता बनाए रखने के लिए कर सकता है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
SBI रिसर्च के अनुसार 2026 के अधिकांश समय में कच्चा तेल $90 प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है। इससे तेल विपणन कंपनियों को नुकसान होगा और घरेलू ईंधन कीमतों में ₹6 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जब तक उत्पाद शुल्क में ₹5 प्रति लीटर की कटौती न की जाए।
FY27 में CPI महंगाई का क्या अनुमान है और क्या यह RBI के लक्ष्य में है?
SBI रिपोर्ट के अनुसार FY2026-27 के लिए CPI महंगाई 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो RBI के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के भीतर है। हालांकि, रिपोर्ट में ऊपर की ओर जोखिम बने रहने की चेतावनी भी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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