जून एमपीसी बैठक में रेपो रेट स्थिर रहने का अनुमान, एसबीआई रिपोर्ट में FY27 GDP वृद्धि 6.6% रहने का पूर्वानुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जून 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो दर में कोई बदलाव किए जाने की संभावना कम है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घरेलू मुद्रा पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक को अल्पकालिक ब्याज दरों और वैकल्पिक नीतिगत उपकरणों का सहारा लेना चाहिए।
रेपो दर पर क्या कहती है रिपोर्ट
SBI रिसर्च के अनुसार, 'ब्याज दरें फिलहाल यथावत रखी जाएंगी और आगे का निर्णय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।' रिपोर्ट में यह भी सुझाया गया है कि RBI बाज़ार की स्थिरता बनाए रखने के लिए 'ऑपरेशन ट्विस्ट' जैसे ब्याज दर आधारित उपकरणों का उपयोग कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है।
GDP वृद्धि और आर्थिक अनुमान
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण यह अनुमान बदल सकता है।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर करीब 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह दर 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है।
महंगाई का परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, वृद्धि और महंगाई के मौजूदा रुझानों को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों में 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है। मौजूदा तिमाही में यह दर 4.0 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत है, हालांकि इसमें ऊपर की ओर जोखिम बने हुए हैं। फिर भी यह RBI के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर है।
रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति
रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि मज़बूत व्यापक आर्थिक आधार होने के बावजूद भारतीय रुपया अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अधिक कमज़ोर हो रहा है। इसलिए RBI को बाज़ार में हस्तक्षेप बढ़ाने की ज़रूरत बताई गई है। गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की एकतरफा गिरावट रोकने और अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। साथ ही, भुगतान संतुलन (BoP) को मज़बूत करने के लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।
कच्चा तेल और ईंधन कीमतों पर जोखिम
SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी शांति वार्ताओं को लेकर अभी भरोसे की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में जोखिम प्रीमियम लंबे समय तक ऊंचा बना रह सकता है और वर्ष 2026 के अधिकांश समय में कच्चा तेल $90 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि तेल विपणन कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई करनी है, तो पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में ₹5 प्रति लीटर की कटौती करनी होगी। अन्यथा मौजूदा स्तरों से घरेलू ईंधन कीमतों में लगभग ₹6 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है — जो आम उपभोक्ता पर सीधा बोझ डालेगी। आने वाले महीनों में RBI और सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया इन जोखिमों का रुख तय करेगी।