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RBI का FY27 के लिए GDP वृद्धि दर 6.6% और CPI मुद्रास्फीति 5.1% का अनुमान, वैश्विक जोखिमों पर चेतावनी

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RBI का FY27 के लिए GDP वृद्धि दर 6.6% और CPI मुद्रास्फीति 5.1% का अनुमान, वैश्विक जोखिमों पर चेतावनी

सारांश

RBI ने FY27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6% किया — पहले यह 6.9% था। मुद्रास्फीति 5.1% रहने का अनुमान है, लेकिन तीसरी तिमाही में 5.9% तक पहुँचने की आशंका है। वैश्विक सप्लाई चेन, अल नीनो और कमोडिटी कीमतें प्रमुख जोखिम हैं।

मुख्य बातें

RBI ने 5 जून 2026 को FY27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% का अनुमान जारी किया, जो पहले के 6.9% अनुमान से कम है।
तिमाही GDP अनुमान: Q1 — 6.6% , Q2 — 6.3% , Q3 — 6.5% , Q4 — 6.8% ।
CPI मुद्रास्फीति FY27 के लिए 5.1% अनुमानित; Q3 में 5.9% तक पहुँचने की आशंका — ऊपरी सहनशील सीमा के करीब।
कोर इंफ्लेशन FY27 के लिए 4.7% अनुमानित।
वैश्विक सप्लाई चेन बाधाएँ, अल नीनो , कमोडिटी कीमतें और मानसून की अनिश्चितता प्रमुख ऊपरी जोखिम।
खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और जलाशयों का संतोषजनक जल स्तर कुछ राहत प्रदान करते हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 जून 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान जारी किया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएँ, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों की अस्थिरता और मौसम संबंधी जोखिम इस वृद्धि पर दबाव बना सकते हैं। तीन दिवसीय MPC बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह जानकारी दी।

तिमाही GDP अनुमान: क्या है पूरा खाका

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, 'इस वर्ष वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान है।' उन्होंने बताया कि पहले यह अनुमान 6.9% था, जिसे अब संशोधित किया गया है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में 6.6%, दूसरी तिमाही में 6.3%, तीसरी तिमाही में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अशांति ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

विकास के आधार: मज़बूत घरेलू माँग और निर्यात

गवर्नर ने कहा कि भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के PMI आँकड़े दोनों सेक्टरों की मज़बूती की पुष्टि करते हैं। निजी खपत उपभोक्ताओं के बढ़ते व्यय से सहारा पाकर स्थिर बनी हुई है, जबकि निजी और सरकारी निवेश में भी अच्छी गति देखी जा रही है। अप्रैल 2026 में माल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, हालाँकि माल ढुलाई और बीमा लागत अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक चिंताओं के बावजूद सेवा निर्यात में भी भारत की स्थिति मज़बूत बताई जा रही है।

मुद्रास्फीति का अनुमान: तीसरी तिमाही में ऊपरी सीमा के करीब

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति दर 5.1% रहने का अनुमान लगाया है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में 4.2%, दूसरी तिमाही में 5.1%, तीसरी तिमाही में 5.9% और चौथी तिमाही में 5.4% महंगाई दर अनुमानित है। गौरतलब है कि कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7% रखा गया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार फिलहाल महंगाई RBI के लक्ष्य स्तर से नीचे है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर घरेलू बाज़ारों तक अभी नहीं पहुँचा है — लेकिन तीसरी तिमाही में यह ऊपरी सहनशील सीमा के करीब पहुँच सकती है।

वैश्विक जोखिम और मानसून की चिंता

गवर्नर मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट, कमोडिटी कीमतों में तेज़ी, मानसून की अनिश्चितता और अल नीनो की संभावना महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा कर सकते हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी बताया कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और जलाशयों में संतोषजनक जल स्तर कुछ हद तक राहत देते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था ने पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक चुनौतियों का असर काफी हद तक झेला है, हालाँकि बढ़ती लागत का प्रभाव धीरे-धीरे दिखने लगा है।

आगे की राह: नज़र महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर

RBI ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नज़र रखी जाएगी। मज़बूत घरेलू माँग, निवेश गतिविधियाँ, निर्यात और सेवा क्षेत्र की स्थिरता भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगली MPC बैठक के निर्णय काफी हद तक तीसरी तिमाही के मुद्रास्फीति आँकड़ों और मानसून की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह RBI की उस सतर्कता को दर्शाता है जो वैश्विक व्यापार तनावों के बीच घरेलू विकास की सीमाओं को स्वीकार करती है। असली चिंता तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति का 5.9% तक पहुँचना है — यह RBI की 6% की ऊपरी सहनशील सीमा के बेहद करीब है, और यदि मानसून कमज़ोर रहा तो दर कटौती की गुंजाइश और सिकुड़ सकती है। निर्यात और सेवा क्षेत्र की मज़बूती उत्साहजनक है, लेकिन AI-प्रेरित वैश्विक बदलावों के बीच भारतीय IT सेवाओं की माँग की स्थिरता एक अनुत्तरित प्रश्न बनी हुई है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने FY27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान कितना रखा है?
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है, जो पहले के 6.9% के अनुमान से कम है। तिमाही आधार पर Q1 में 6.6%, Q2 में 6.3%, Q3 में 6.5% और Q4 में 6.8% वृद्धि अनुमानित है।
FY27 में भारत की मुद्रास्फीति दर कितनी रहने का अनुमान है?
RBI ने FY27 के लिए CPI आधारित मुद्रास्फीति 5.1% रहने का अनुमान लगाया है। तीसरी तिमाही में यह 5.9% तक पहुँच सकती है, जो RBI की 6% की ऊपरी सहनशील सीमा के करीब है।
GDP अनुमान घटाने के पीछे RBI के क्या कारण हैं?
RBI ने वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों की अस्थिरता, पश्चिम एशिया के तनाव और मौसम संबंधी जोखिमों को अनुमान संशोधन का कारण बताया है। बढ़ती माल ढुलाई और बीमा लागत भी दबाव का कारण है।
महंगाई के लिए प्रमुख जोखिम कौन-से हैं?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार अल नीनो की संभावना, कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून, कमोडिटी कीमतों में तेज़ी और वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट महंगाई को ऊपर धकेल सकते हैं। हालाँकि पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और जलाशयों का संतोषजनक स्तर कुछ राहत देते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती के क्या संकेत हैं?
RBI के अनुसार विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI आँकड़े मज़बूत हैं, निजी खपत स्थिर है और अप्रैल 2026 में माल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। AI संबंधी वैश्विक चिंताओं के बावजूद भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय माँग बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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